POLICE FOR PUBLIC : आम आदमी ‘मरने’ पर आमादा, पुलिस के लिए ‘एक जान’ भी अमूल्य !

वृद्ध नागरिकों की सहायता करती पुलिस का मानवीय चेहरा। (फाइल चित्र)

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 16 मई, 2019। पुलिस का काम अपने देश, राज्य, गाँव, शहर, कस्बे और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का होता है। तरह-तरह की कुत्सित मानसिकता वाले आरोपियों-अपराधियों से सामना करने वाली पुलिस का चरित्र अक्सर लोगों के सामने नकारात्मक ही प्रस्तुत किया जाता है और कई बार तो कस्टडी में पुलिस की पिटाई से मौतें, पुलिस मुठभेड़ से होने वाली मौतें भी पुलिस की नकारात्मक छवि के लिए उत्तरदायी होती हैं, परंतु वही पुलिस पब्लिक के लिए भी कितनी फिक्रमंद है ? इसके कई उदाहरण देखने को मिलते हैं।

अभी कल ही यानी 15 मई से गुजरात में सूरत नगर पुलिस आयुक्त सतीश कुमार शर्मा ने जनहित के जान-माल की सुरक्षा को देखते हुए सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस समारोह (BIRTHDAY PARTIES) के आयोजनों पर रोक लगाई है, तो कुछ दिन पहले दिल्ली के एक IPS अधिकारी ने सड़क पर तेज़ रफ्तार बाइक पर रोमांस करते एक युगल का वीडियो ट्विटर पर शेयर कर दिल्ली यातायात पुलिस को नींद से झकझोरने का प्रयास किया था।

अब एक और नया मामला सामने आया है, जो यह बताता है कि कानून-व्यवस्था और यातायात नियमों को ताक पर रख कर आपाधापी में जीवन यापन कर रहे आज के लोग जहाँ ‘अकालमृत्यु’ को आमंत्रित करने पर आमादा हैं, वहीं पुलिस ‘एक जान’ की रक्षा करना कितना मूल्यवान समझती है ? घटना गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद की है, जहाँ पुलिस ने पीड़ित व्यक्ति के लिए साक्षात् ईश्वर के अवतार की तरह काम किया।

सामने आया पुलिस का मानवीय-संवेदनशील चेहरा

जनता के मन में पुलिस को लेकर व्याप्त भय और भ्रम दूर करने के लिए सितम्बर-2016 में गुरुग्राम पुलिस आयुक्त नवदीप विर्क, संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोरा ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर किया था। (फाइल चित्र)

भारतीय संघीय व्यवस्था में पुलिस राज्यों के अधीन है। इसीलिए पुलिस के साथ राज्य विशेष का नाम जुड़ा होता है, जैसे यूपी पुलिस, गुजरात पुलिस, महाराष्ट्र पुलिस आदि। हम यहाँ गुजरात पुलिस की बात कर रहे हैं, जिसका एक मानवीय और संवेदनशील चेहरा बुधवार को देखने को मिला। घटना अहमदाबाद के पालडी क्षेत्र की है। भीषण गर्मी और तपिश के चलते सड़क पर एक वरिष्ठ नागरिक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसी दौरान वहाँ से एक पुलिस वैन गुजर रही थी। इस वैन में यातायात पुलिस एम डिवीज़न के पुलिस उप निरीक्षक (PSI) ज़ेड. आई. शेख किसी सरकार कार्य से पुलिस आयुक्त (CP) कार्यालय जा रहे थे। पीएसआई शेख ने देखा कि पालडी स्थित महालक्ष्मी चौराहे के निकट रास्ते पर लोगों की भीड़ जमा है। उन्होंने गाड़ी रुकवाई। शेख, ड्राइवर जितेन्द्र गोहिल और ऑपरेटर जयदीप डाभी गाड़ी से नीचे उतरे। निकट जाकर देखा, तो 65 वर्षीय वृद्ध बाइक चालक गर्मी के कारण बेहोश होकर ज़मीन पर पड़े थे। उनके सिर से रक्त बह रहा था।

पुलिस न देखे जात-धर्म !

अहमदाबाद में बुधवार को गर्मी से बीमार हुए वृद्ध नागरिक दीपक वकील को पुलिस की गाड़ी में अस्पताल ले जाते पीएसआई ज़ेड. आई. शेख।

आज-कल चुनावी माहौल में जाति और धर्म का विष घुला हुआ है, परंतु देश की रक्षा-सुरक्षा में लगे प्रत्येक बल (FORCE) का जवान ऐसे विष से अछूता ही रहता है। अहमदाबाद की इस घटना से यह भी सबक मिलता है कि पीएसआई शेख एक मुस्लिम कर्मचारी थे, परंतु उनके लिए ड्यूटी उनका पहला धर्म था। उन्होंने कहा, ‘मैंने 108 को फोन किया, परंतु सामने से जवाब मिला कि 108 अन्य किसी केस में व्यस्त होने से उसे आने में एक घण्टा लगेगा। मैंने 108 एम्बुलैंस का इंतज़ार करने की बजाए पुलिस की गाड़ी में ही बीमार वृद्ध दीपक वकील को निकटस्थ वी. एस. अस्पताल ले गया। इसके लिए मैंने तत्काल आदेश देकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे 4 से 5 मिनट में ही वृद्ध को पहुँचाने में सफलता मिली और उनकी जान बच गई।’

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