मोदी के ताबड़तोड़ ACTIONS का अब दिख रहा असर, पाकिस्तान हुआ कंगाल, पाकिस्तानी हुए बेहाल

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में फरवरी महीने में आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान में सिर्फ आतंकवादियों के अड्डों को ही तबाह नहीं किया है, बल्कि पाकिस्तान को ही पूरी तरह से बर्बादी के कग़ार पर ला खड़ा किया है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान के विरुद्ध जो ताबड़तोड़ एक्शन लिए, उसे लेकर कई लोगों का मानना था कि ऐसे एक्शन्स से कुछ नहीं होगा, पाकिस्तान पर हमला करना चाहिए, परंतु ऐसा कहने वालों के लिए यह एक सुकून देने वाली खबर है कि तीन महीने पहले मोदी सरकार की ओर से उठाए गए ताबड़तोड़ कदमों का असर अब पाकिस्तान पर दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था कंगाल हो गई है और पाकिस्तानी जनता महंगाई की मार से बेहाल है।


मुंबई धमकों के वक्त 1993 में नरसिंह राव (कांग्रेस) और 008 में डॉ. मनमोहन सिंह (कांग्रेस) की सरकार थी।

भारत में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी हमले कोई नई बात नहीं है। 2014 से पहले भी मुंबई में 1993 और 2008 में हुए दो बड़े आतंकी हमले सहित कई आतंकी हमले हुए, परंतु न 1993 की कांग्रेस सरकारों ने उन आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान को केवल बुरा-भला कहा और जाँच-पड़ताल तक ही सीमित रहीं। पहले की सरकारें जनता की पाकिस्तान को जवाब देने की आवाज़ को अपनी कमजोर इच्छाशक्ति के चलते दबा दिया करती थीं, परंतु 2014 में प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में हुए दो बड़े आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान को करारा जवाब दिया गया। 2016 के उरी हमले के बाद भारतीय थल सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक की, तो इस वर्ष फरवरी में हुए पुलवामा आतंकी हमले ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनकी सरकार और सेना के धैर्य का बांध तोड़ दिया।

पुलवामा हमले के बाद मोदी ने पाकिस्तान के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू किया। मोदी ने सबसे पहले पाकिस्तान को भारत की ओर से दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा छीना। एयर स्ट्राइक तो महज पुलवामा आतंकी हमले का बदला था, परंतु एमएफएन का दर्जा वापस लेकर मोदी सरकार ने पाकिस्तान को वर्षों तक याद रहे, ऐसा करारा झटका दिया। यह दर्जा छिनने के बाद पाकिस्तान की हालत खराब होने का जो सिलसिला शुरू हुआ उससे निपटना वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान के लिये चुनौती बन गया है। पुलवामा हमले के लगभग दो महीने बाद पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैस्टिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक महँगाई दर 2.2 प्रतिशत से उछलकर 9.4 प्रतिशत हो गई है और इसमें 6.97 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। महँगाई की इस मार से पाकिस्तान की जनता बेहाल हो गई है। दूध, सब्जियाँ, पेट्रोल और दवाइयाँ जैसी जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम आसमान पर पहुंच गये हैं।

दवाइयों के बढ़े दामों को नियंत्रित करने के लिये सरकार ने देश भर में मुनाफाखोरी के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की है। सरकार ने ऑडिटर जनरल से ड्रग रेग्युलेटरी ऑथोरिटी के खातों का ऑडिट करने के लिये कहा है। कराची डेयरी फॉर्मर्स एसोसियेशन ने अचानक दूध के दामों में 23 रुपये की बढ़ोतरी कर दी, जिससे दूध 120 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। खुदरा बाजार में तो इसकी कीमत 180 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। टमाटर जैसी सब्जियाँ इतनी महंगी हो गई हैं कि लोग सब्जियाँ नहीं खरीद पा रहे हैं। टमाटर का दाम प्रति किलो 150 रुपये तक पहुंच गया है।

आपको बता दें कि पाकिस्तानी रुपये की कीमत भारतीय रुपये की तुलना में आधी है। वहाँ के केन्द्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाकर 10.75 प्रतिशत कर दी हैं। पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान सरकार ने महँगाई दर 6 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा था, जिसे वह पूरा नहीं कर पाई है। अगले वर्षों में पाकिस्तान में 10 लाख लोगों के बेरोजगार होने की संभावना दर्शाई जा रही है। इससे गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों की संख्या में 40 लाख की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

पाकिस्तान के पास चीजें आयात करने के लिये भी पर्याप्त पैसा नहीं है। उसका विदेशी पूंजी भंडार अभी मात्र 8.5 अरब डॉलर है, जो दो महीने के आयात के लिये भी पर्याप्त नहीं है। पाकिस्तान आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो गया है कि अभी पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा के रूप में मात्र 1,027 करोड़ डॉलर हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के सुझाये गये न्यूनतम स्तर से भी कम है। पाकिस्तान विदेशी कर्ज के लगातार बढ़ने की समस्या से भी जूझ रहा है।

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