क्या कुलभूषण के साथ सचमुच न्याय कर पाएगा पाकिस्तान ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में कैद हैं। पहले मंगलवार को ऐसी खबर आई कि पाकिस्तान जाधव को अपनी निर्दोषिता साबित करने के लिये एक मौका देने जा रहा है। इसके लिये पाकिस्तान अपने आर्मी एक्ट में बदलाव करने तक को तैयार हो गया है। इस कानूनी संशोधन के बाद जाधव को सिविल कोर्ट में अपील करने का अवसर दिया जाएगा। हालाँकि शाम होने तक पाकिस्तान ने पलटी मार ली। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट करके साफ कर दिया कि पाकिस्तान अपने सैन्य कानून में कोई बदलाव नहीं करेगा, इस प्रकार की खबरों में कोई दम नहीं है। हाँ आईसीजे के कहने पर मामले की समीक्षा और पुनर्विचार के लिये अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिसके बारे में समय आने पर जानकारी दी जाएगी। आम तौर पर पाकिस्तान में ऐसे केस जो सैन्य अदालत में सैन्य कानूनों के तहत चलाये जाते हैं, उनमें सिविल कोर्ट में अपील करने का विकल्प नहीं होता है। किसी भी व्यक्ति या संगठन को सिविल कोर्ट में अपील करने का अधिकार नहीं दिया जाता है। पाकिस्तानी मीडिया ने इस प्रकार की खबरें जारी की थी कि स्वीडन के हेग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत के निर्णय के बाद कुलभूषण जाधव को यह विशेष छूट देने के लिये पाकिस्तान अपने कानूनों में बदलाव करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। हालांकि आसिफ गफूर की सफाई के बाद पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं कि ऐसे समय जब दोनों देशों के बीच सम्बंध इतने अच्छे भी नहीं हैं कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सौहार्द बढ़ाने के लिये यह कदम उठाने जा रहा हो। तो दूसरा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि पाकिस्तान ऐसा करता भी है तो फिर ऐसा करने के पीछे उसकी मंशा क्या हो सकती है ?

पाकिस्तान की मंशा पर उठते हैं ये सवाल ?

जब पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के सेवा निवृत्त अधिकारी और सेवा निवृत्ति के बाद कारोबारी बने कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार करने की घोषणा करने के बाद उनका एक वीडियो जारी किया, जिसमें खुद कुलभूषण जाधव के मुँह से कहलवाया कि वे भारतीय जासूस हैं और पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। इस वीडियो को मुख्य आधार बनाकर पाकिस्तान ने उन पर अपनी सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया और सैन्य अदालत ने इस वीडियो को मजबूत प्रमाण मानते हुए उन्हें दोषी करार दिया और फाँसी की सजा सुना दी।

पाकिस्तान की अदालत के इस फैसले के खिलाफ भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में अपील की और पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया। भारत के पक्ष को मजबूत मानते हुए आईसीजे ने भी पाकिस्तान को फटकार लगाई और उसे अपने कैदी को राजनयिक पहुँच उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके बाद आईसीजे के दबाव में पाकिस्तान ने कुलभूषण को राजनयिक पहुँच उपलब्ध तो कराई, परंतु उसमें भी कुटिलता दिखाई और ऐन मौके पर मुलाकात की जगह बदल दी। इतना ही नहीं, दूसरी बार मुलाकात कराने से इनकार करके उसने दूसरी कुटिलता दिखाई। आईसीजे ने अपने फैसले में कुलभूषण की फाँसी की सजा पर रोक लगाते हुए पाकिस्तान को अपने फैसले की समीक्षा करने का आदेश दिया था। इसलिये पाकिस्तान को आईसीजे को जवाब देने के लिये कोई न कोई आडंबर रचना जरूरी है, जिससे वह आईसीजे, भारत तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की आँखों में धूल झोंक सके।

आईसीजे ने समीक्षा की प्रक्रिया तय करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर ही छोड़ी है और कहा है कि वह समीक्षा का काम ईमानदारी और न्यायपूर्ण ढंग से अंजाम दे। अब यदि पाकिस्तान की सरकार, न्यायपालिका और पाकिस्तानी सैन्य अदालत सक्रियता और आज़ाद ख्याल दिखाते हैं, तो पाकिस्तान का कुलभूषण को अपनी निर्दोषिता सिद्ध करने का अवसर देना सार्थक हो सकता है, जिसकी उम्मीद कम ही है।

ज्यादा संभावना तो यह है कि पाकिस्तान कोई दिखावा करके आईसीजे को यह समझाने का प्रयास करेगा कि उसने तमाम प्रक्रियाओं का पालन किया है। ताकि आईसीजे कुलभूषण की फाँसी पर लगी रोक हटा ले और पाकिस्तान जाधव को सजा देकर आईसीजे और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश दे सके कि पाकिस्तान भी भारत द्वारा प्रेरित सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित है और पाकिस्तान में होने वाले आतंकी हमलों में भारत को संदेह की नज़र से देखा जाए।

पाकिस्तान के लिये कुलभूषण जाधव को निर्दोष करार देकर छोड़ देना और सुरक्षित भारत के सुपुर्द कर देना आसान नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से उसकी सैन्य अदालतों की न्याय प्रणाली पर सवाल उठेगा, जो पाकिस्तान की सेना को कतई स्वीकार नहीं होगा। इसलिये भी पाकिस्तान अपने सैन्य कानूनों में संशोधन नहीं कर सकता, क्योंकि सेना उसे इस प्रकार की इजाजत नहीं देगी। ऐसे में भारत को पाकिस्तान से बहुत सारी उम्मीदें लगाने जैसा नहीं है।

हाँ भारत के पास कुछ विकल्प जरूर हैं, परंतु भारत के और आईसीजे दोनों के ही विकल्प बहुत सीमित हैं, जिस तरह से आईसीजे कुलभूषण जाधव को भारत की माँग पर निर्दोष करार देकर मुक्त करने का आदेश नहीं दे सकती, वैसे ही भारत भी पाकिस्तान की किसी भी टेढ़ी चाल की आईसीजे में शिकायत करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता। कुल मिला कर कुलभूषण जाधव का मामला पूरी तरह से पाकिस्तान के हाथ में है। ऐसे में भारत के पास एकमात्र उपाय कूटनीतिक तरीके से पाकिस्तान के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल बनाने की पहल करने का है। ताकि इस पहल के बाद वह भी पाकिस्तान से सौहार्द के रूप में कुलभूषण की आज़ादी की उम्मीद कर सके, इतना ही किया जा सकता है, जिसकी संभावना बहुत कम है, परंतु इतना तो तय है कि दो देशों की कूटनीतिक लड़ाई ने एक जीवन पर मृत्यु की तलवार लटका दी है।

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