अब कौड़ी-कौड़ी को मोहताज़ हो जाएगा पाकिस्तान : पीएम इमरान खान की उड़ी नींद : जानिये क्या है वजह

अहमदाबाद, 16 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम। ‘गरीबी में आटा गीला’ यह कहावत आजकल पाकिस्तान पर पूरी तरह से चरितार्थ हो रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। अब अगले हफ्ते होने वाली फाइनांसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक ने पाकिस्तानी पीएम की नींद उड़ा रखी है। क्योंकि इस बैठक में जैश-ए-मोहम्मद और लश्करे-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के विरुद्ध कारगर कदम उठाने में विफल रहे पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने का फैसला किया जा सकता है और यदि ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को विश्व की कोई भी बड़ी संस्था कर्ज के रूप में आर्थिक मदद नहीं देगी।

कंगाली के मुहाने पर खड़ा है पाकिस्तान

अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान जो पहले ही कंगाली के मुहाने पर खड़ा है, वह कौड़ी-कौड़ी के लिये मोहताज़ हो जाएगा। हाल में भारत की अठन्नी पाकिस्तान के एक रुपये की हो गई है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान का रुपया रसातल में चला गया है। पाक पीएम इमरान खान पहले ही राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में यह बात कह चुके हैं कि वह जब से सरकार में आए हैं, तब से ही बहुत दबाव में हैं, क्योंकि पिछले 10 साल में पाकिस्तान का कर्ज 6,000 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 30 हजार अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुँच गया है। इससे पाकिस्तान के पास अमेरिकी डॉलर की कमी हो गई है और अब उसके पास इतने भी डॉलर नहीं बचे हैं कि वह विदेशों से लिये कर्ज की किश्तें भी भर सके। उन्होंने कहा था कि उन्हें डर है कि कहीं पाकिस्तान डिफॉल्टर ना हो जाए और उसकी हालत वेनेजुएला जैसी ना हो जाए।

ब्लैक लिस्ट हो सकता है पाक

अब उन्हें अपना अंदेशा सच होते दिख रहा है, जिसके कारण उनकी नींद उड़ गई है। आतंकी संगठनों के विरुद्ध कड़े कदम नहीं उठाने के कारण वह पहले से ही एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है, उसे इन आतंकी संगठनों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिये जो समय दिया गया था वह पूरा हो चुका है। उसे 27 प्रकार के एक्शन लेने का सुझाव भी दिया गया था, जिन पर अमल करने में वह विफल रहा है। ऐसे में 16 से 21 जून के बीच एफएटीएफ की ओरलैंडो में हो रही बैठक में पाकिस्तान के विरुद्ध ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिसे लेकर ही पाक पीएम की चिंता बढ़ी हुई है।

बचाव के लिये जवाब तैयार करने में जुटा

इतना सब होने के बावजूद पाकिस्तान है कि अपनी कारगुजारियों से बाज़ नहीं आ रहा है। वह आतंकी संगठनों पर कार्यवाही करने के बजाय इस बैठक में अपने बचाव के लिये जवाब तैयार करने में जुटा है। ऐसे में यदि पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट हो गया तो उसे विश्व की कोई भी बड़ी संस्था कर्ज नहीं देगी और ऐसे में उसके डिफॉल्टर होने का खतरा और बढ़ जाएगा।

टेरर फंडिंग को रोकने का काम करती है एफएएफटी

उल्लेखनीय है कि एफएटीएफ वह इंटरनेशनल एजेंसी है जो पूरे विश्व में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर नज़र रखती है। यह एशिया-पैसिफिक ग्रुप, मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनांसिंग, नरसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिये की जाने वाली फंडिंग को रोकने का काम करती है। इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर एफएटीएफ कार्यवाही करती है।

ब्लैक लिस्ट होने से बचने के लिये पाक को चाहिये 3 वोट

पाकिस्तान जो कि पहले से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल है, उसे यदि इस लिस्ट से बाहर आना है तो उसे एफएटीएफ के 36 में से कम से कम 15 सदस्यों का वोट हासिल करना होगा। जबकि ब्लैक लिस्ट होने से रोकने के लिये कम से कम 3 सदस्यों का वोट मिलना चाहिये।

ओरलैंडो में होने वाली एफएटीएफ की बैठक में भले ही पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही पर मुहर लग जाए, परंतु इसकी औपचारिक घोषणा पेरिस में अक्टूबर में होने वाली एफएटीएफ की बैठक में की जाएगी। यह बैठक 18 से 23 अक्टूबर के दौरान होगी।

कौड़ी-कौड़ी को मोहताज़ होने की कगार पर पाकिस्तान

ज्ञात हो कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्थाएँ अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने एक प्रस्ताव प्रस्तुत करके जून-2018 में पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। यदि पाकिस्तान को एफएटीएफ ब्लैक लिस्ट करता है तो पाकिस्तान पर इसके बहुत गंभीर प्रभाव पड़ेंगे। ब्लैक लिस्ट होने पर पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लग सकती है। आईएमएफ पहले ही कह चुका है कि पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेरर फाइनांसिंग के विरुद्ध कारगर कदम उठाने चाहिये। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि यदि पाकिस्तान को आईएमएफ से कर्ज चाहिये तो उसे एफएटीएफ से क्लियरेंस लेना आवश्यक है। आईएमएफ के अतिरिक्त कई अन्य बड़ी संस्थाएँ भी पाकिस्तान को फंडिंग करने से इनकार कर सकती हैं। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान कौड़ी-कौड़ी के लिये मोहताज़ हो सकता है।

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