संसद-सत्र शुरू होते ही फिर कश्मीर पर शुरू हुई राजनीति : विपक्ष ने सरकार को घेरा तो अमित शाह ने आज़ाद को दी चुनौती

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। यूं तो 18 नवंबर से संसद का शीत कालीन सत्र (PARLIAMENT WINTER SESSION) शुरू हुआ है, परंतु सर्दी के मौसम के बावजूद संसद के दोनों सदनों में राजनीति का माहौल हमेशा ही गर्म रहता है। इस सत्र की शुरुआत के साथ ही दोनों सदनों लोकसभा (LOK SABHA) और राज्यसभा (RAJYA SABHA) में पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर राजनीति शुरू हो चुकी है। सत्र की शुरुआत भी खूब हंगामेदार रही, जिसकी पहले से ही अपेक्षा की जा रही थी। पहले दिन दिल्ली की खराब हवा और गंदे पानी की बात उठी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किये गये चिटफंड एमेंडमेंट बिल (CHIT FUND AMENDMENT BILL) पर खुली चर्चा भी हुई। राज्यसभा के 250वें सत्र को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया। राज्यसभा के सदस्यों ने भी सदन की कार्यवाही को और बेहतर बनाने के लिये अपने सुझाव पेश किये। इसी के साथ जम्मू कश्मीर (JAMMU KASHMIR-J&K) का मुद्दा भी उठा। पहले दिन की तरह ही दूसरा दिन भी हंगामेदार रहा। दिल्ली की हवा को लेकर विपक्ष ने खूब शोर मचाया। इसी बीच राज्यसभा में चर्चा के बाद जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक भी पास हो गया, जो लोकसभा में पहले ही पास हो चुका था। तीसरे दिन राज्यसभा में पहले तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को लेकर रिपोर्ट पेश की गई। इसके बाद कांग्रेस की ओर से गांधी परिवार की एसपीजी (SPG) सुरक्षा हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया। घूम-फिर कर कांग्रेस फिर कश्मीर को राजनीति के लिये राज्यसभा में घसीट लाई और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे ग़ुलामनबी आज़ाद ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए तो गृह मंत्री अमित शाह भी पूरी तैयारी के साथ सदन में आये थे, उन्होंने आज़ाद को जवाब देने के साथ-साथ चुनौती भी दी।

अमित शाह ने आँकड़ों को लेकर आज़ाद को दी चुनौती

दरअसल आज़ाद ने इतिहास का हवाला दिया तो शाह ने इतिहास को लेकर ही कांग्रेस पर पलटवार कर दिया। शाह ने सदन का नेतृत्व कर रहे उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू से कहा कि ‘मैं नहीं चाहता था कि हम अतीत में जाएँ, परंतु वो घसीट कर वहाँ पर ही ले गये।’ शाह ने उप राष्ट्रपति से कहा कि ‘अब उन्होंने कहा है तो मुझे जवाब देना पड़ेगा। अगर वो नहीं रुके तो आप मुझे भी नहीं रोक सकते। उन्हें सहा, अब मुझे भी सहन कीजिये।’

राज्यसभा में ग़ुलामनबी आज़ाद ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया था और कहा था कि आज के जमाने में इंटरनेट और स्वास्थ्य सेवाएँ काफी जरूरी हैं। पड़ोसी देश 1947 से अस्तित्व में है और हम भी सीएम रहे हैं। अभी तक कुछ ही दिनों के लिये इंटरनेट बंद रहता था, परंतु ऐसा कभी नहीं हुआ कि साढ़े तीन महीने तक इंटरनेट बंद कर दिया जाए। इसी को लेकर अमित शाह ने जवाब देना शुरू किया और कहा कि इंटरनेट आज के जमाने में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिये महत्वपूर्ण है, परंतु मैं कहना चाहता हूँ कि पूरे देश में मोबाइल 1995-96 में आया, जबकि कश्मीर में मोबाइल 2003 में आया और वह भी भाजपा सरकार लाई थी। शाह ने कहा कि कश्मीर में भी इंटरनेट जरूरी है, परंतु देश की सुरक्षा का प्रश्न है, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई का प्रश्न है तो हमें सोचना पड़ेगा और जब हमें जरूरी लगेगा, तब हम इसे बहाल भी करेंगे। जम्मू कश्मीर की स्थिति के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में भी शाह ने कहा कि घाटी में अब स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। 5 अगस्त के बाद एक भी व्यक्ति की पुलिस फायरिंग में मृत्यु नहीं हुई है। घाटी के जिन 195 पुलिस थाना क्षेत्रों में पाबंदियाँ लागू की गई थी, वे हट चुकी हैं, पत्थरबाजी की घटनाएँ भी पिछले साल की तुलना में कम हुई हैं।

इसके अलावा स्कूल-कॉलेज भी खुल रहे हैं और सुचारू रूप से परीक्षाएँ भी हो रही हैं। घाटी में सभी अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्र भी खुले हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी (OPD) में इलाज के लिये पहुँच रहे हैं, कहीं कोई दिक्कत नहीं है। पर्याप्त मात्रा में दवाइयाँ उपलब्ध हैं। दुकानों पर तथा अस्पतालों में भरपूर मात्रा में दवाइयाँ हैं। उन्होंने आँकड़े भी दिये। आज़ाद ने शाह को टोका तो शाह ने उन्हें चुनौती दे डाली। शाह ने कहा कि अगर आज़ाद इन आँकड़ों को चैलेंज करते हैं तो मैं इन आँकड़ों की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ। आप रिकॉर्ड पर कहिये कि ये आँकड़ा गलत है, हम इस मसले पर घण्टों की चर्चा के लिये भी तैयार हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया पर भी छाया कश्मीर मुद्दा

संसद में कश्मीर मुद्दा उठते ही मीडिया ने भी इसे तुरंत लपक लिया। मीडिया में भी कश्मीर को लेकर एक बार फिर गरमा गरम बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भी कश्मीर मुद्दा ट्रेंड कर रहा है। कश्मीर से धारा 370 (ARTICLE 370) हटाने के बाद से सुर्खियों में आए अमित शाह भी मीडिया (MEDIA) तथा सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA) में छाये हुए हैं। शाह ने जलियाँ वाला बाग राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट से कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है और गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा भी हटाकर उन्हें हाशिये पर ला दिया है, जिससे इस परिवार के सदस्यों की फिलहाल बोलती बंद है। जो कांग्रेस नेता कश्मीर और महाराष्ट्र को लेकर सदन में सरकार पर हमलावर रवैया अपना रहे हैं, उन्हें भी अमित शाह के कड़े तेवरों का सामना करना पड़ रहा है।

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