अभेद्य बनेंगे एयरबेस : अब आँख उठाते ही ध्वस्त हो जाएगा दुश्मन !

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 14 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। 31 दिसम्बर, 2015 को रात 12 बजते ही 1 जनवरी, 2016 को जहाँ पूरे विश्व ने नए वर्ष 2016 का धूमधाम से स्वागत किया था, वहीं भारत के लिए 2016 के नए वर्ष का आरंभ आतंकवादी आक्रमण के साथ हुआ था। अभी तो भारत के लोग नींद से जागते, उससे पहले ही पंजाब से आई आतंकवादी हमले की ख़बर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। चार से पाँच आतंकवादियों ने 1 जनवरी, 2016 को तड़के लगभग 3.30 बजे भारतीय वायुसेना के पठानकोट एयरबेस में घुसपैठ की और निद्राधीन जवानों को मौद की नींद सुला देने के बदइरादे से फायरिंग शुरू कर दी। जैश-ए-मोहम्द (JEM) के इन आतंकवादियों ने पहले तो 4 जवानों को बंधक बना लिया। इन आतंकियों का इरादा पठानकोट एयरबेस को नष्ट कर देने का था, परंतु भारतीय वायुसेना के जवानों ने तुरंत ही मोर्चा संभाला और सभी आतंकवादियों को मौत की नींद सुला दिया। यद्यपि इस हमले में भारत के 7 जवान शहीद हो गए।

क्या है आईपीएसएस ?

पठानकोट एयरबेस पर हुए इस आतंकी आक्रमण के बाद भारत ने आतंकवादियों की ओर से ऐसे किसी भी आक्रमण के दोबारा प्रयास को विफल बनाने की दिशा में व्यापक कदम उठाए और अब शीघ्र ही वह समय भी आएगा, जब भारतीय वायुसेना (IAF) का पठानकोट एयरबेस अभेद्य बन जाएगा। इतना ही नहीं, वायुसेना के 23 संवेदनशील एयरबेस भी इस तरह अभेद्य बन जाएँगे कि दुश्मन को आँख उठाते ही ध्वस्त कर दिया जाएगा। सरकार और वायुसेना ने इसके लिए ज़ोरदार कवायद शुरू की थी, जिसके तहत दिसम्बर-2019 तक पठानकोट एयरबेस पूरी तरह अभेद्य बन जाएगा। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने कहा, ‘पठानकोट एयरबेस में इंटीग्रेटेड परिमिटर सिक्यॉरिटी सिस्टम (IPSS) का पायलट प्रोजेक्ट नवंबर-दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे अन्य बेस पर शुरू किया जाएगा।’ वायुसेना ने ‘सेंसिटिव और हाई-रिस्क’ वाले अपने 23 एयरबेस पर IPSS इंस्टॉल करने की योजना बनाई है। IPSS एक कॉम्प्रिहेंसिव मल्टी-सेंसर, मल्टी लेयर्ड, हाइ-टेक सर्विलांस और इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली) है। वहीं, दूसरी ओर इसके साथ ही वायुसेना अपने अन्य 19 एयर स्टेशनों के लिए भी ‘इलेक्ट्रिक स्मार्ट पावर फेन्सेस’ के मामले को आगे बढ़ा रही है।

यह इलेक्ट्रॉनिक आँख रखेगी दुश्मन पर नज़र

वास्तव में भारतीय वायुसेना ने पठानकोट आतंकी आक्रमण के बाद अपने एयरबेसों की सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटेड परिमीटर सिक्योरिटी सिस्टम (IPSS) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। पठानकोट एयरबेस पर आईपीएसएस नवम्बर-दिसम्बर तक कार्यरत् हो जाएगा, जो पठानकोट एयरबेस को अभेद्य बना देगा। IPSS एक कम्प्रिहेंसिव मल्टी-सेंसर, मल्टी लेयर्ड, हाइ-टेक सर्विलांस और इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली) है। PSS यानी इंटीग्रेटेड परिमिटर सिक्यॉरिटी सिस्टम में विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रो-ऑप्टिक और मोशन-डिटेक्शन सेंसर, सर्विलांस और थर्मल कैमरों के साथ एक ‘स्मार्ट परिमिटर फेन्स’ शामिल है। इसके साथ एक कमांड और कंट्रोल सेंटर है, जिसे 24 घंटे लाइव विडियो फीड मिलती है। इसके चलते किसी भी तरह के आक्रमण का तुरंत पता चल जाएगा। IPSS इलेक्ट्रॉनिक आंख की तरह है, जो घुसपैठ का पता चलते ही उचित जवाबी उपाय शुरू करने में सहायता करेगा। चूँकि एयरबेस का एरिया काफी बड़ा होता है। इसके चलते यह संभव नहीं है कि कोई व्यक्ति इसकी हर जगह पर नज़र रख सके। ऐसे में IPSS एक बेहतर और प्रभावी उपाय है।

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