देश ने 12 मई को दे दिया था मोदी को बहुमत, अंतिम चरण में मिला बंपर बोनस ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 मई, 2019। लोकसभा चुनाव-2019 के चुनाव सात चरणों में सम्पन्न हो चुके हैं। 23 मई को चुनाव के परिणाम घोषित होंगे, परंतु उससे पहले रविवार को अलग-अलग न्यूज चैनलों के एक्जिट पोल आ गये हैं। इन एक्जिट पोल के आँकड़ों पर नज़र डालें तो यह सिद्ध हो रहा है कि देश के मतदाता 12 मई को छठे चरण के मतदान में ही निवर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोबारा पीएम बनाने के लिये भाजपा-एनडीए को आवश्यक बहुमत दे चुका था। ऐसे में रविवार को हुए सातवें चरण के मतदान में लोगों ने भाजपा को बंपर बोनस दिया है, जो आगामी 23 मई को कदाचित सटीक सिद्ध होगा।

सातवें चरण के चुनाव सम्पन्न होने के साथ ही रविवार को अलग-अलग चैनलों के एक्जिट पोल के नतीजे सामने आये हैं। इन एक्जिट पोल के आँकड़ों को देखें तो पता चलता है कि 12 मई को सम्पन्न हुए छह चरणों के मतदान में ही मतदाताओं ने पीएम मोदी के नाम पर फिर से मुहर लगा दी थी और भाजपा को स्पष्ट बहुमत तक पहुँचा दिया था। आपको बता दें कि छठे चरण तक 542 में से 483 सीटों पर ही मतदान सम्पन्न हो चुका था। इन्हीं में से मतदाताओं ने पीएम मोदी और भाजपा-एनडीए को बहुमत के आँकड़े 282 सीटों तक पहुँचा दिया था और सातवें व अंतिम चरण में मतदाताओं ने बंपर बोनस देकर मोदी और भाजपा के 300 पार के स्वप्न को भी साकार कर दिया, जो एग्ज़िट पोल 2019 में स्पष्ट नज़र आ । भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की संपूर्ण सीटों की बात करें तो एक्जिट पोल का आँकड़ा 325 से भी ऊपर जाता दिखाई दे रहा है।

एक्जिट पोल के आँकड़ों की बात करें तो आँकड़ों से यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो रहा है कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के नेतृत्व को स्वीकार किया है और उन पर दोबारा विश्वास व्यक्त किया है। इन आँकड़ों का यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि मतदाताओं को पीएम मोदी की ‘चौकीदारी’ पसंद आ रही है और मतदाताओं ने उनकी सरकार के कामों पर मुहर लगाई है। इन आँकड़ों से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि मतदाताओं ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन तथा अन्य विपक्षी दलों के महा गठबंधन को सिरे से नकार दिया है। क्योंकि आँकड़े देखें तो पता चलता है कि कांग्रेस सहित यूपीए और अन्य सभी विपक्षी दल मिलकर भी बहुमत के आँकड़े तक पहुँचते दिखाई नहीं दे रहे हैं।

एक्जिट पोल के आँकड़ों के अनुसार पीएम मोदी और भाजपा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा दक्षिण में कर्नाटक में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रही है। एक्जिट पोल में छठे चरण तक के ही आँकड़े सामने आये हैं, अभी सातवें व अंतिम चरण के आँकड़े प्राप्त नहीं हो सके हैं। यह आँकड़े आने के बाद झारखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों का चित्र भी स्पष्ट हो जाएगा।

कहते हैं कि दिल्ली के सिंहासन का रास्ता देश के सबसे बड़े 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यहाँ माना जा रहा था कि सपा-बसपा और राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन भाजपा को नुकसान पहुँचाएगा, परंतु आँकड़े बता रहे हैं कि मतदाताओं ने इस महागठबंधन को नकार दिया है और भाजपा की राजनीति यहाँ सफल रही है। यहाँ पिछली बार के मुकाबले भाजपा की सीटें जरूर घटी हैं, परंतु इतनी भी नहीं घटी हैं जितनी सीटें घटने के कयास लगाये जा रहे थे। एक्जिट पोल के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी दल 50 से 60 सीटें जीतने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के अलावा इस बार के चुनाव में जिस राज्य पर सबसे ज्यादा नज़र रखी जा रही है, वह है पश्चिम बंगाल। उत्तर प्रदेश में भाजपा को जो 10 से 12 सीटों का नुकसान होता दिखाई दे रहा है, उसकी कमी पश्चिम बंगाल पूरी करता दिखाई दे रहा है, जहाँ से भाजपा को 10-11 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। इसके अलावा बिहार से चौंकाने वाला आँकलन सामने आ रहा है, यहाँ कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का पूरी तरह सूपड़ा साफ होता दिखाई दे रहा है और भाजपा तथा मुख्यमंत्री नितिश कुमार के जेडीयू और केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान के गठबंधन को हैरान कर देने वाली सफलता मिलती दिखाई दे रही है।

इस प्रकार कहा जा सकता है कि मतदाताओं ने मजबूत सरकार पर मुहर लगाई है और मजबूर सरकार को नकार दिया है।

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