अब देश के 50 करोड़ नौकरीपेशा लोगों की बढ़ जाएगी सैलरी : जानिए कैसे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। अगर आप अपनी सैलरी (SALARY) से 12 प्रतिशत प्रोविडेंट फंड (PROVIDENT FUND-PF) कटने से परेशान हैं और चाहते हैं कि आपको इसे घटाने का विकल्प मिलना चाहिये, ताकि आपके हाथ में आने वाली टेक होम सैलरी (TAKE HOME SALARY) बढ़ जाए, तो आपके लिये एक खुश खबर है। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली केन्द्र सरकार आपको यह विकल्प देने जा रही है। इससे देश के लगभग 50 करोड़ नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ होगा और हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ जाएगी। दरअसल मोदी सरकार के मंत्रिमंडल ने सोशल सिक्युरिटी बिल-2019 (SOCIAL SECURITY BILL 2019) को पिछले सप्ताह मंजूरी दी है और अब यह बिल संसद के इसी सत्र में पेश होने जा रहा है। यदि सब कुछ ठीक रहा और बिल पास हो गया तो देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी।

दरअसल अभी कर्मचारियों की बेज़िक सैलरी (BASIC SALARY) से 12 प्रतिशत हिस्सा पीएफ के रूप में काट लिया जाता है। इतना ही हिस्सा नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर (EMPLOYER) की ओर से भी एम्प्लॉयीज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) में जमा कराया जाता है। कर्मचारी के इस 12 प्रतिशत हिस्से में से 8.33 प्रतिशत रकम कर्मचारी की एम्प्लॉयीज़ पेंशन स्कीम यानी (EPS) में चली जाती है। मोदी सरकार ने कर्मचारी के पक्ष में उसकी बेज़िक सैलरी से कटने वाले 12 प्रतिशत हिस्से में कटौती करने का विचार किया है और सोशल सिक्युरिटी बिल में इसके लिये प्रस्ताव किया है। इस बिल को कैबिनेट (CABINET) की मंजूरी मिल गई है और अब इसी सप्ताह यह बिल संसद में पेश होने वाला है।

तरलता बढ़ाने के लिये मोदी सरकार उठा रही कदम

मोदी सरकार का मानना है कि कर्मचारी की बेज़िक सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्से में कटौती किये जाने से उसके हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ जाएगी। सैलरी बढ़ने का मतलब है कि यह पैसा खर्च किया जाएगा और इससे बाजार में लिक्विडिटी (LIQUIDITY) बढ़ेगी। हालाँकि मोदी सरकार का यह भी कहना है कि नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर की ओर से ईपीएफओ में जमा किये जाने वाले हिस्से में कोई कटौती नहीं की जाएगी और न ही उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।

ग्रेच्युएटी पाने के लिये 5 वर्ष तक काम करना जरूरी नहीं

इस विधेयक में ऐसा भी प्रस्ताव किया गया है जिससे फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स भी प्रो-रेटा (PRO-RATA) आधार पर ग्रेच्युएटी (GRATUITY) हासिल करने के पात्र हो जाएँगे। अभी के नियम के अनुसार जो कर्मचारी किसी कंपनी या संगठन में पाँच वर्ष तक नौकरी करते हैं, वे ही ग्रेच्युएटी प्राप्त करने के अधिकारी होते हैं, परंतु अब उन्हें ग्रेच्युएटी के लिये एक ही कंपनी में 5 साल तक काम नहीं करना पड़ेगा।

ईपीएफओ और ईएसआईसी की स्वायत्तता रहेगी बरकरार

इस बिल में किये गये प्रस्ताव के अनुसार कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत एक सोशल सिक्युरिटी फंड (SSF) बनाया जाएगा, जिसमें से सभी कर्मचारियों-वर्कर्स को पेंशन, मेडिकल कवर, प्रसूति, मातृत्व, डेथ और विकलांगता जैसे लाभ दिये जाएँगे। इस बिल में कहा गया है कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों की संख्या वाले सभी प्रतिष्ठानों को अपने कर्मचारियों को एम्प्लॉयीज़ स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ESIC) के तहत विविध सुविधाएँ देनी होंगी। बिल में किये गये प्रस्ताव के अनुसार श्रम मंत्रालय उस प्रस्ताव को वापस लेगा, जिसमें पहले कहा गया था कि ईपीएफओ से जुड़े लोगों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को अपनाने का विकल्प दिया जाए। वर्तमान व्यवस्था में अधिक रिटर्न मिल रहा है और कई अन्य फायदे भी मिल रहे हैं। श्रम मंत्रालय इस प्रस्ताव को भी रद्द करेगा कि ईपीएफओ और ईएसआईसी को कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चलाया जाएगा। अब सरकार ने इन दोनों की वर्तमान स्वायत्तता को बरकरार रखने का निर्णय किया है।

ज्ञात हो कि सरकार देश में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (EASE OF DOING BUSINESS) को सुधारने पर काम कर रही है, जिसके लिये वह वर्तमान श्रम कानूनों को एक कोड के अंतर्गत लाने का काम कर रही है। सोशल सिक्युरिटी कोड में 8 केन्द्रीय श्रम कानूनों को समाहित किया गया है।

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