जगदीशपुर के ‘जिन्न’ से मोदी के आदर्श गाँव ककरहिया ने कहा, ‘यह चौकीदारों का गाँव है, यहाँ चोरों का आना वर्जित है’

लोकसभा चुनाव 2019 में चौकीदार शब्द खूब चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब कांग्रेस के लिये यह सूत्र बुलंद किया कि मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि देश का प्रधान सेवक हूँ – चौकीदार हूँ और देश की तिजोरी पर कांग्रेस का पंजा नहीं पड़ने दूँगा तो दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबाणी की कंपनी को जान-बूृझकर लाभ करवाने का आरोप लगाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिये ‘चौकीदार चोर है’ का नारा बुलंद किया। इसके बाद मोदी ने अपने नाम के आगे चौकीदार लगाना शुरू किया तो सभी भाजपाइयों ने भी इस शब्द को अपना लिया। भाजपा समर्थक भी स्वयं को चौकीदार कहने लगे और अब तो इस फेहरिश्त में गाँव भी जुड़ने लगे हैं।

अब एक और गाँव ने अपने सभी प्रवेश मार्गों पर पोस्टर लगाकर यह घोषित कर दिया है कि यह गाँव चौकीदारों का गाँव है और यहाँ चोरों का आना वर्जित है। यह गाँव है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिले का ककरहिया गाँव।

वाराणसी-भदोही मार्ग पर वाराणसी से लगभग 22 कि.मी. दूर स्थित रोहनिया विधानसभा क्षेत्र का ककरहिया गाँव आज-कल अपने एक पोस्टर को लेकर खूब चर्चा में है। इस गाँव के हर रास्ते पर इन दिनों एक पोस्टर लगा हुआ है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि ‘यह चौकीदारों का गाँव है, यहाँ चोरों का आना वर्जित है।’ एक तरफ वाराणसी संसदीय क्षेत्र का ककरहिया गाँव है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोद लेकर आदर्श गाँव के रूप में विकसित किया है, तो दूसरी तरफ अमेठी संसदीय क्षेत्र का जगदीशपुर गाँव है, जिसे सांसद राहुल गांधी ने गोद तो लिया, परंतु गोद लेने के बाद 2014 से 2019 हो गया, राहुल कभी लौट कर इस गाँव नहीं आए और राहुल गांधी जगदीशपुर के लिए जिन्न साबित हुए। यही कारण है कि ककरहिया ने जगदीशपुर के लिए ‘जिन्न’ सिद्ध हुए राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस और मोदी विरोधी गठबंधन करने वाले सपा-बसपा गठबंधन के नेताओं के लिए नो एंट्री कर दी है।

दरअसल इस गाँव को स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना (S) के तहत 23 अक्टूबर 2017 को गोद लिया है। गोद लेने के बाद प्रधानमंत्री ने अपनी सांसद निधि से इस गाँव में सड़क, बिजली, पानी जैसी प्राथमिक सुविधाएँ विकसित की हैं। इसलिये गाँव के लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के समर्थक हो गये हैं और उन्होंने भाजपा के अतिरिक्त अन्य सभी दलों के लिये अपने गाँव में नो-एंट्री का पोस्टर लगाया है।

ग्रामजनों का कहना है कि इससे पहले इस क्षेत्र से जो भी सांसद या विधायक चुने जाते थे, वह वोट माँगने के लिये तो गाँव में आते थे, परंतु चुनाव जीतने के बाद इस गाँव की उपेक्षा करते थे और पाँच साल तक दिखाई नहीं देते थे, विकास के काम करना तो दूर की बात है, परंतु पीएम मोदी ने इस गाँव को गोद लेकर इस गाँव के विकास पर फोकस किया, जिससे गाँववाले प्रभावित हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के संभल जिले की चंदौसी तहसील का रामरायपुर गमटिया गाँव भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के कार्यों से प्रभावित होकर अपने गाँव में इसी तरह के पोस्टर लगा चुका है। इस गाँव के पोस्टर में भी लिखा गया था कि ‘यह चौकीदारों का गाँव है और यहाँ चोरों का आना वर्जित है।’ इस पूरे गाँव ने भाजपा को ही वोट देने का दावा भी किया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का ही यह नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के अमरोहा लोकसभा क्षेत्र में रजबपुर के पास स्थित फरीदपुर गाँव के लोगों ने भी ‘मैं भी चौकीदार हूँ’ का पोस्टर लगाया था। इस गाँव के लोगों ने भी पोस्टर में अन्य दलों के लिये कड़ी चेतावनी वाले शब्दों का प्रयोग किया था और लिखा था कि अगर महा गठबंधन के प्रत्याशी इस गाँव में आते हैं तो अपने जान-माल की जिम्मेदारी पर आयें।

इस प्रकार देखा जाये तो पीएम मोदी की ‘मैं भी चौकीदार’ वाली मुहिम कारगर सिद्ध हो रही है और उनका यह सूत्र केवल भाजपाई नेता कार्यकर्ता ही नहीं अपना रहे हैं, बल्कि पीएम मोदी के समर्थक भी उनके इस सूत्र से प्रभावित नज़र आ रहे हैं।

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