हाय राम : सरकारी VIDEO CONFERENCE में सरेआम हुआ ऐसा कुछ कि शर्म से झुक गया सबका सिर !

* पूरे 2 मिनट चलता रहा ‘खेल’ !

* अब जाँच से क्या होगा फायदा ?

* ‘सुधार’ में विलंब पर भी सवाल

* पहले भी होती रही हैं ऐसी घटनाएँ

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 5 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। अब राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक सरकारी कार्यालय में महिला अधिकारी के सामने ही ऐसी लज्जित कर देने वाली घटना घटित हुई है, जिससे बड़े-बड़े अधिकारियों के हाथ-पाँव फूल गये। सचिवालय में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से अधिकारियों के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था, जिसमें विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा भी उपस्थित थी। वह वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों से सरकार की विविध योजनाओं पर चर्चा कर रही थी, इसी दौरान स्क्रीन पर कुछ और ही चल पड़ा। यह कुछ ऐसा था, जिसे देखकर महिला सचिव सहित सभी उच्च अधिकारी दंग रह गये।

घटना 3 जून सोमवार की है। सचिवालय में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा ने सरकारी योजनाओं पर चर्चा के लिये अपने विभाग के जिलाधिकारियों से चर्चा के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था। बैठक में उनके साथ विभाग के उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वह अधिकारियों को सम्बोधित कर रही थी, जिसमें पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन चल रहा था। इसी दौरान स्क्रीन पर अचानक पोर्न वीडियो चलने लगा, यह दृश्य महिला सचिव मुग्धा सिन्हा और उनके साथ मौजूद उच्च अधिकारियों ने भी देखा। यह दृश्य देखते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों को समझ नहीं आया कि वह ऐसा क्या करें, जिससे इस वीडियो को रोका जा सके। इस दौरान दो मिनट तक वीडियो स्क्रीन पर चलता रहा। अंततः अधिकारियों ने टेक्निकल टीम को बुलाया, जिसने आकर वीडियो बंद किया।

यह शर्मनाक घटना पूरे सचिवालय में चर्चा का विषय बन गई। इस घटना से महिला सचिव अधिकारियों पर बेहद नाराज़ हुईं और उन्होंने इस पूरे मामले के दोषी लोगों का पता लगाने के लिये नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को जाँच करने के लिये कहा है, ताकि दोषी लोगों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सके।

बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस में अधिकारी लैपटॉप के माध्यम से जुड़े हुए थे। इसी दौरान किसी अधिकारी के लैपटॉप पर अचानक पॉपअप विज्ञापन आने पर अधिकारी ने गलती से क्लिक कर दिया, जिसकी वजह से पॉर्न साइट खुल गई। हालाँकि इस लापरवाही के कारण विभाग की काफी किरकिरी हुई।

संसद में सांसद देख रहे थे पॉर्न वीडियो

उल्लेखनीय है कि इससे पहले संसद के चालू सदन में कुछ सांसद मोबाइल में पोर्न वीडियो देखते हुए पकड़े गये थे, तब इस बात को लेकर काफी हंगामा हुआ था।

धार्मिक चैनल पर आधे घण्टे चली थी पॉर्न फिल्म

2017 में पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था जब लोग एक इस्लामिक धार्मिक चैनल देख रहे थे, इसी दौरान इस धार्मिक चैनल पर पॉर्न फिल्म चल पड़ी थी। ‘ट्यूबा टीवी’ पर 20-25 मिनट तक पॉर्न फिल्म ब्रोडकास्ट होती रही। इस घटना से गुस्साए लोगों ने चैनल का लाइसेंस रद्द करने तक की माँग की। लोगों के गुस्से को देखते हुए स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और चैनल के विरुद्ध क्रिमिनल एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की।

चैनल से इस बारे में जब मीडिया ने पूछा तो उस चैनल के प्रबंधन का उत्तर था कि कुछ लोगों ने अपने एजेंडे को फैलाने के लिये साजिश के तहत यह सब कुछ किया। चैनल के प्रबंधन ने सार्वजनिक रूप से इस घटना के लिये माफी भी माँगी और कहा कि इस तरह की गलती फिर नहीं दोहराई जाएगी।

अश्लील वीडियो देखने के लिये होता है ‘WiFi’ का उपयोग

एक वैश्विक अध्ययन में पाया गया है कि बस, ट्रेन से लेकर मॉल और कॉर्पोरेट ऑफिसों में ‘WiFi’ से लोग पॉर्न वीडियो देखने के लिये प्रेरित होते हैं। ‘नार्टन बाय सिमांटेक’ द्वारा किये गये अध्ययन में एक हजार से अधिक भारतीयों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि हर तीन में से एक से अधिक भारतीयों ने वयस्कों के लिये मौजूद सामग्री देखने के लिये सार्वजनिक वाईफाई का उपयोग किया। इस मामले में भारतीय अकेले नहीं हैं, वैश्विक स्तर पर हर छह में से एक से अधिक व्यक्ति वयस्कों के लिये मौजूद सामग्री देखने के लिये होटल, हवाई अड्डा, पुस्तकालयों तथा कामकाज के स्थलों पर सार्वजनिक वाईफाई का प्रयोग करते हैं।

इस सर्वेक्षण में मेक्सिको, जापान, हॉलैंड, ब्राजील, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के लोगों को भी शामिल किया गया था। सर्वे में शामिल हुए कुल लोगों में से 31 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने वयस्कों के लिये नेट पर मौजूद सामग्री देखने के लिये सार्वजनिक वाईफाई का प्रयोग किया। 34 प्रतिशत ने यह काम बस, ट्रेन, स्टेशन आदि जगहों पर किया और 24 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने पुस्तकालयों में ऐसा करने के लिये सार्वजनिक वाईफाई का उपयोग किया। जबकि 34 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने हवाई अड्डे पर सार्वजनिक वाईफाई सेवा का लाभ लेकर वयस्कों के लिये नेट पर मौजूद सामग्री देखी। सर्वेक्षण करने वाली संस्था का कहना है कि सार्वजनिक वाईफाई के प्रयोग के दौरान सुरक्षा और वास्तविकता को लेकर लोगों के विचारों में गहरा भेद उभरकर सामने आया। उल्लेखनीय है कि कोई व्यक्ति निजी उपकरण पर जिसे वह व्यक्तिगत समझता है उस पर साइबर अपराधी बिना सुरक्षा वाले वाईफाई नेटवर्क या असुरक्षित ऐप्स के माध्यम से आसानी से पहुँच सकते हैं।

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