पिता के नाम पर सहानुभूति बँटोरने की राहुल की कोशिश पर मोदी की चुनौती भारी : ‘दूध के धुले’ थे राजीव ?

लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की रैली में भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम क्या लिया, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने पिता के नाम पर चुनावी सहानुभूति बटोरने के प्रयासों में जुट गये, परंतु यहाँ भी उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता की कलई खुल गई। वह जनता की सहानुभूति तो नहीं ले सके, ऊपर से उनके पिता की फजीहत होने लगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राहुल गांधी को अपने पिता के नाम पर चुनाव लड़ने की चेतावनी दे दी और इसी के साथ मीडिया स्व. राजीव गांधी का इतिहास खंगालने में जुट गई। इतिहास खंगालने पर स्व. राजीव गांधी के कुछ ऐसे कच्चे चिट्ठे खुलकर जनता के सामने आ गये कि जिन्हें देखकर अब कांग्रेसियों को बगलें झाँकनी पड़ रही हैं। आप भी जान लीजिये क्या कुछ सामने निकलकर आया है…

अनायास ही मिली थी राज गद्दी

20 अगस्त 1944 को मुंबई में जन्मे राजीव गांधी एक एयरलाइन कंपनी में पायलट की नौकरी करते थे और उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं थी। हाई प्रोफाइल लाइफ जीने वाले राजीव गांधी ने इटालियन नागरिक एंटोनिया माईनो से 1968 में शादी की थी, जिससे लंदन के कैंब्रिज विश्व विद्यालय में पढ़ाई के दौरान मुलाकात हुई थी। शादी के बाद एंटोनिया ने अपना नाम बदलकर सोनिया गांधी रख लिया था और भारत में रहने आ गई थी, जहां उन्होंने दो बच्चों को जन्म दिया था। 1970 में राहुल और 1971 में प्रियंका का जन्म हुआ था। 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल घोषित किया था, इस दौरान राजीव गांधी अपने परिवार के साथ विदेश रहने चले गये थे। 1980 में अपने छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद माता की मदद के लिये वह स्वदेश लौटे और 1982 में कांग्रेस से जुड़कर महासचिव बने। इसके बाद इसी साल अमेठी से चुनाव लड़कर सांसद बने। 31 अक्टूबर-1984 को आतंकवादियों द्वारा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या किये जाने के बाद उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में प्रधानमंत्री की राजगद्दी मिल गई।

राजतिलक होते ही लगा सिक्ख विरोधी दंगों का कलंक

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिक्ख विरोधी दंगे हुए। राजनीतिक अपरिपक्वता में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी दंगों को रोकने में तो विफल रहे ही। साथ ही उनके एक बयान ने दंगों को भड़काने का काम किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई विशाल वृक्ष धराशायी होता है तो धरती हिलती ही है। उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया और दिल्ली में सर्वाधिक सिक्ख समुदाय का नरसंहार हुआ।

भोपाल गैस दुर्घटना की कालिख पुती

1984 के साल का अंत आते-आते 3 दिसंबर-1984 को भोपाल गैस कांड हो गया। भोपाल में यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने में जहरीली गैस के रिसाव से लगभग 15,000 लोगों की जान गई वहीं असंख्य लोग अंध और अपंग हो गये। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर इस कांड के मुख्य आरोपी एंडरसन को देश से भगाने में मदद करने का आरोप लगा। खुद कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता स्व. अर्जुन सिंह ने अपनी किताब में इसका खुलासा किया था।

बोफोर्स तोप सौदे के लिये खाई गई दलाली

माता की मृत्यु की सहानुभूति की लहर में बहुमत के साथ चुनकर आई कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी के कार्यकाल में ही भारतीय सेना के लिये खरीदी गई बोफोर्स तोपों के सौदे के लिये स्वीडन की कंपनी से 80 लाख डॉलर की दलाली खाने का आरोप लगा। सोनिया गांधी के मित्र और इटालियन नागरिक ओतावियो क्वात्रोची ने इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाई थी। कुल 400 तोपों की खरीद के लिये 1.3 अरब डॉलर का सौदा हुआ था। आरोप है कि स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी ने उससे बोफोर्स तोपें खरीदने के लिये 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत बाँटी थी। इसमें से 64 करोड़ रुपये राजीव गांधी और उनके परिवार को मिले होने का आरोप लगता रहा है। इसके अलावा क्वात्रोची को देश से भगाने में मदद करने का भी आरोप लगता रहा है।

कलंकित इतिहास के कारण 1989 में गँवाई सरकार

सिक्ख दंगों के दंश, भोपाल गैस त्रासदी और बोफोर्स तोप दलाली कांड के कलंकित इतिहास के कारण 1989 के चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई। 21 मई 1991 को चेन्नई के श्रीपेरंबदूर में आतंकवादियों ने बम विस्फोट में राजीव गांधी की हत्या कर दी। लोकसभा चुनाव-2019 में राहुल गांधी और प्रधानमंत्री के बीच राजीव गांधी को लेकर छिड़ी चुनावी जंग के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्राइन ने ट्वीट करके बताया कि कैसे वामपंथी दल राजीव गांधी के विरुद्ध ‘गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर हैं’ के नारे लगाते थे। आजकल सोशल मीडिया पर भी कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं।

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