विरोधियों का झुंड देख रहा है सत्ता के सपने और मोदी जुटे हैं ‘विकसित भारत’ के अभियान में : क्या मोदी को 23 मई के बाद भी PM बने रहने का दृढ़ विश्वास है ?

लोकसभा चुनाव 2019 में नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए समय-समय पर और विभिन्न मंचों पर एकजुटता का प्रदर्शन करने वाले मोदी विरोधी नेता। (फाइल चित्र)

देश में राजनेताओं पर लोकसभा चुनाव 2019 का सुरूर छाया हुआ है। सभी राजनेता अपने-अपने चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी एक दिन में तीन से चार रैलियाँ कर रहे हैं। इतने व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद मोदी एक प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यों के प्रति भी पूरी तरह से समर्पित रहते हैं। एक तरफ विपक्ष मोदी को हराने के लिये पसीना बहा रहा है, वहीं भाजपा और मोदी दावा कर रहे हैं कि देश में फिर एक बार मोदी सरकार ही बनेगी, परंतु मोदी ने तो दावे से परे जाकर एक ऐसा काम कर दिया है, जो दर्शाता है कि मोदी को यह पूरा विश्वास है कि मतगणना दिवस यानी 23 मई को भाजपा-एनडीए ही जीतेंगे और वे ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

मोदी का यह विजय विश्वास इस बात से झलकता है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को नये सिरे से सरकार गठित होने के बाद प्रथम 100 दिन में किये जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों का एजेण्डा तैयार करने का निर्देश दिया है। नई सरकार के प्रथम 100 दिन का एजेण्डा तैयार करने का निर्देश चुनाव परिणाम से पहले ही देकर मोदी ने विरोधियों को कड़ा संदेश दे दिया है कि चुनाव में भाजपा-एनडीए ही जीतेंगे और नरेन्द्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे। इस निर्देश में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश है नौकरशाही में सुधार लाने के लिये बड़े और कड़े फैसले लेने का।

प्रधानमंत्री मोदी के आदेश के बाद पीएमओ, नीति आयोग और उसके उपाध्यक्ष तथा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. के. विजय राघवन को स्वच्छ भारत अभियान के साथ-साथ व्यापक आर्थिक और नौकरशाही सुधारों का एजेण्डा तैयार करने का काम सौंपा गया है। मोदी ने 100 दिन में ही तेल, गैस, खनिज, बुनियादी ढांचा और शिक्षा को लाल फीताशाही से मुक्त करने वाले फैसलों पर ध्यान केन्द्रित करने को कहा है, ताकि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने की नींव रखी जा सके। इस एजेण्डा में अगले पांच वर्षों में जीडीपी वृद्धि को ढाई अंक तक बढ़ाकर दोहरे अंक तक पहुंचाने का भी लक्ष्य निर्धारित करने का अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। मोदी का मानना है कि विविध क्षेत्रों में लाल फीताशाही को दूर करके जीडीपी को ढाई प्रतिशत तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है।

जब अन्य राजनीतिक दलों के पास मोदी के विरुद्ध प्रचार करने के अतिरिक्त दूसरा कोई एजेण्डा नहीं है, वहीं मोदी का एजेण्डा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य मिशन को व्यापक बनाने का है, ताकि हर व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके। दोबारा सत्ता में आने के बाद मोदी का एजेण्डा रोजगार सृजन के क्षेत्रों पर केन्द्रित होगा। इन क्षेत्रों में पर्यटन और लघु तथा मध्यम कद के उद्योग शामिल हैं। पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिये नदियों को आपस में जोड़ने का काम प्राथमिकताओं में शामिल होगा। बांधों और लिंकेज का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि भारत को ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बांध और सिंधु जल संधि से भारत की नदियों के ज्यादा उपयोग से कोई खतरा न हो।

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