यक्ष प्रश्न : ‘डर’ है, तो दुगुना कैसे हुआ बजाज परिवार का नेटवर्थ ?

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 2 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। विख्यात और शीर्षस्थ उद्योगपति राहुल बजाज ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार की नीतियों पर फिर एक बार प्रश्न उठाए हैं। राहुल बजाज आज ट्विटर पर ट्रेंड भी कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के सामने यह बात कही कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की आलोचना करते समय डर नहीं लगता था, परंतु वर्तमान मोदी सरकार की आलोचना करने से डर लगता है। बजार समूह के अध्यक्ष राहुल बजाज ने कहा कि देश में भय का माहौल है, लोग सरकार की आलोचना करने से डरते हैं और विश्वास नहीं करते हैं कि केन्द्र सरकार उनकी किसी भी आलोचना की सराहना करेगी।

चूँकि राहुल बजाज ने यह वक्तव्य गृह मंत्री की उपस्थिति में दिया, इसलिए ट्विटर पर मोदी विरोधियों के हौसले बुलंद हो गए और आज सुबह से ही #बजाजनेबजा_दी ट्रेंड कर रहा है। हजारों ट्विटर यूज़र्स इस बात की सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष यह बात कही। लोगों को बजाज का यह वक्तव्य असाधारण साहसिक लग रहा है। स्वयं बजाज के पुत्र राजीव बजाज ने भी यही प्रतिक्रिया दी है, परंतु बजाज समूह की प्रगति के आँकड़े राहुल बजाज के डर के माहौल के वक्तव्य से बिल्कुल उल्टी कहानी कह रहे हैं। आँकड़े कहते हैं कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद (2015 से 2019) के दौरान बजाज समूह का नेटवर्थ दुगुना हुआ है। ऐसे में यक्ष प्रश्न यही उठता है कि यदि डर है, तो दुगुना कैसे हुआ बजाज परिवार का नेटवर्थ ?

आँकड़े खोल रहे ‘डर’ की पोल

देश में बुद्धिजीवियों का मानो अकाल पड़ा है या बाढ़ आ गई है। अकाल इसलिए, क्योंकि जो लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीति और नीयत पर प्रश्न खड़े करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, उनकी बौद्धिक क्षमता कहीं न कहीं किसी वाद-विवाद से घिरी हुई है। इसलिए वे असली बुद्धिजीवियों का अकाल है और नकली बुद्धिजीवियों की बाढ़ आ गई है। राहुल बजाज ने शाह के सामने साहस क्या दिखाया, कांग्रेस के हौसले बुलंद हो गए और ट्विटरबाज़ों की उंगलियाँ फटाफट चल पड़ीं, परंतु बजाज के बयान के विपरीत मोदी सरकार के शासनकाल में बजाज परिवार का कारोबार तेजी से फला-फूला है। आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में बजाज परिवार भारत के सबसे धनवान घरानों में 19वें नंबर पर था और उसका नेटवर्थ 4.4 अरब डॉलर था, परंतु चार वर्ष बाद यानी वर्ष 2019 में बजाज समूह का नेटवर्थ दुगुना होकर 9.2 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि यूपीए सरकार के शासनकाल में बजाज परिवार का नेटवर्थ मोदी सरकार के शासनकाल की तुलना में आधा था। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि यदि देश में, विशेषकर उद्योग जगत में कोई डर का माहौल है, तो फिर बजाज परिवार का नेटवर्थ दुगुना कैसे हो गया ?

जाने-अनजाने ‘गिरोह’ में शामिल हो गए बजाज ?

राहुल बजाज का परिवारिक इतिहास वैसे कांग्रेस से जुड़ा रहा है। यद्यपि राहुल बजाज अक्सर सरकार विरोधी रुख अपनाते रहे हैं और सकारात्मक आलोचना बुरी बात भी नहीं है, परंतु राहुल बजाज ने यह वक्तव्य पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के वक्तव्य के ठीक बाद दिया है। सिंह ने इससे पहले कहा था कि उद्योगपतियों में डर का माहौल है। वे नई परियोजनाएँ शुरू करने से घबराते हैं। उनके अंदर असफलता का भय है। मनमोहन के बाद बजाज ने भी उसी बात का दोहरा कर जाने-अनजाने उस गिरोह में स्वयं को शामिल कर लिया, जो मोदी सरकार के विरुद्ध पिछले कुछ वर्षों से लगातार ‘डर का माहौल’ वाला अभियान चला रही है। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भी मॉब लिंचिंग के नाम पर कृत्रिम भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर असहिष्णुता के नारे फैलाए गए। मोदी के विरुद्ध तानाशाही के आरोप लगाए गए। अवॉर्ड वापसी गैंग भी सक्रिय हुई। टुकड़े-टुकड़े गैंग ने भी मोदी राज में डर के माहौल के अभियान में कंधे से कंधा मिला कर काम किया, परंतु जनता ने चुनाव परिणामों में सबको जवाब दे दिया।

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