राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की ये कैसी राजनीति : उत्तर प्रदेश ही टारगेट क्यों ?

*केसीआर को क्यों नहीं कोसा, योगी से ही बैर क्यों ?

*राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ पर मौन क्यों ?

विशेष टिप्पणी : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। हर देश, हर भाषा और हर समाज में दुष्कर्म और हत्या जैसी बर्बरता को क्रूरता और हैवानियत की पराकाष्ठा ही कहा गया है। दुष्कर्म और हत्या जैसी बर्बरता चाहे नाबालिग के साथ हो या बालिग के साथ हो, उसे पारिभाषित नहीं किया जा सकता। क्योंकि बर्बरता हर हाल में बर्बरता ही है। हाल के दिनों में दो घटनाएँ पूरे देश में चर्चा के केन्द्र में हैं। हैदराबाद में पशु चिकित्सक दिशा दुष्कर्म और हत्या का मामला और दूसरा उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जलाने की घटना। हम इन घटनाओं में कोई फर्क नहीं कर रहे और एक बार फिर दोहराना चाहते हैं कि बर्बरता हर हाल में बर्बरता ही है, जो कि इन दोनों ही घटनाओं में हुई। हम सवाल उठाना चाहते हैं कि क्या ऐसी घटनाओं पर राजनीति होनी चाहिये ? एक सर्वसम्मत जवाब मिलेगा – कदापि नहीं। यह जवाब ही एक और सवाल को जन्म देता है कि फिर देश जिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रहा है, उन्हें क्या हो गया है ? इन दोनों ही नेताओं ने हैदराबाद की घटना को लेकर दुःख व्यक्त किया, जो कि अपेक्षित था, परंतु विशेष रूप से उन्नाव की घटना को लेकर जिस तरह से इन दोनों नेताओं ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार और केन्द्र में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को निशाना बनाया हुआ है, उससे तो यही सिद्ध हो रहा है कि यह दोनों भाई-बहन उन्नाव की घटना का राजनीतिकरण कर रहे हैं।

उन्नाव पर ही क्यों उत्पात मचा रहे ?

क्यों यह दोनों विशेष कर प्रियंका गांधी उन्नाव की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही हैं। क्यों इन्हीं प्रियंका गांधी ने हैदराबाद की घटना को लेकर तेलंगाना की केसीआर सरकार पर कोई टिप्पणी नहीं की। 27 नवंबर की रात हैदराबाद में दिशा के दुष्कर्म और मर्डर की घटना घटित हुई और अगले दिन 28 नवंबर को उसका जला हुआ शव मिलने के साथ घटना प्रकाश में आई थी। इसके बाद आज शनिवार को 7 दिसंबर तक 10 दिन के भीतर ही उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जलाने की घटना भी घटित हुई, परंतु इन्हीं दस दिन के भीतर कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटनाएँ हुईं। राहुल-प्रियंका ने कांग्रेस शासित इन राज्यों की घटनाओं के लिये अपने मुख्यमंत्रियों, उनकी पुलिस और प्रशासनिक तंत्र पर कोई सवाल क्यों नहीं उठाया ? इससे भी जाहिर होता है कि इन दोनों का एक मात्र लक्ष्य उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और केन्द्र की मोदी सरकार पर छींटाकशी करना ही है। यदि सचमुच इन्हें पीड़ितों से कोई हमदर्दी होती तो उन्नाव पीड़िता राजधानी दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन थी, इन दोनों को कहीं दूर भी नहीं जाना था। अस्पताल जाकर भी खेद व्यक्त कर सकते थे, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। क्योंकि उनका मकसद केवल उन्नाव-उन्नाव का नाम लेकर उत्पात मचाना है और उपरोक्त सरकारों पर दोषारोपण करना है।

यदि सचमुच इन नेताओं को पीड़ितों की चिंता होती तो राजस्थान और मध्य प्रदेश जाकर पीड़ित बच्चियों के परिवारों से मिलते। और तो और, देश में सर्वाधिक चर्चित हैदराबाद की घटना में भी इन भाई-बहन ने पीड़िता के परिवार से मिलने की दरकार नहीं ली। फिर कैसे देश इनकी बात को गंभीरता से ले सकता है। राष्ट्रीय स्तर के इन कांग्रेसी नेताओं को अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता को परिपक्वता में बदलना होगा और कुंठित मानसिकता से बाहर निकल कर अपनी सोच को व्यापक बनाने की जरूरत है।

इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने केरल में अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड में एक कार्यक्रम के दौरान देश को दुनिया का रेप कैपिटल कह कर देश का अपमान करने का भी काम किया है। इन दोनों के ट्वीट देख कर कोई भी सहज रूप से अनुमान लगा सकता है कि इन दोनों का उद्देश्य उन्नाव की घटना को लेकर केवल और केवल राजनीति करना ही है।

28 नवंबर से लेकर अभी तक के प्रियंका गांधी के ट्वीट

हैदराबाद की घटना के दो दिन बाद 30 नवंबर को प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट करके दुःख जताया था। इसके बाद उनके सभी ट्वीट उन्नाव की घटना पर ही केन्द्रित रहे।

28 नवंबर से लेकर अभी तक के राहुल गांधी के ट्वीट

राहुल गांधी ने हैदराबाद की घटना के एक दिन बाद 29 नवंबर को पहला ट्वीट किया और दुःख व्यक्त किया। इसके बाद आज उन्नाव की घटना का जिक्र किया।

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