‘मोदी’ पर सवाल उठा कर ख़ुद कठघरे में आ गए राहुल गांधी ?

* मानहानि के आधा दर्जन मुकदमों का सामना कर रहे राहुल

* ‘तारीख पर तारीख’ के कारण गुजरात, महाराष्ट्र व बिहार के चक्कर लगा रहे राहुल

*दोषी सिद्ध हुए, तो 2 वर्ष के कारावास व दंड का है प्रावधान

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भगोड़े ललित मोदी और नीरव मोदी के साथ पीएम नरेन्द्र मोदी का नाम जोड़ कर उन्हें कठघरे में खड़ा करना चाहते थे, परंतु अब खुद ही आधा दर्जन मानहानि के मुकदमों में ‘तारीख पर तारीख’ का सामना कर रहे हैं। राहुल गांधी के लिये ‘मोदी’ उपनाम अब गले की फाँस बन गया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी उपनाम को लेकर दिये गये विवादित बयान के कारण उन्हें अदालत में घसीटा जा रहा है। दिलचस्प बात तो यह है कि उन्हें अदालत के चक्कर लगवाने वाले भी मोदी ही हैं। एक बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी हैं तो दूसरे सूरत के भाजपा विधायक प्रणेश मोदी हैं। कुल मिला कर ‘मोदी’ उपनाम अब राहुल गांधी को डरा रहा है। क्योंकि वे गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार में लगभग आधा दर्जन मानहानि के मुकदमों का सामना कर रहे हैं, जिनमें से कुछ मामलों में तो उन्हें जमानत भी लेनी पड़ी है। कुल मिलाकर राहुल गांधी के लिये भाजपा के ये ‘मोदी’ मुश्किलें पैदा करने का पर्याय बन गये हैं।

सूरत की अदालत में हुए पेश

मई 2019 में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध ‘चौकीदार चोर है’ का नारा बुलंद किया था और कर्णाटक के कोलार में 13 अप्रैल को एक चुनाव प्रचार रैली में उन्होंने भगोड़े आरोपियों ललित मोदी और नीरव मोदी का नाम लेते हुए पीएम नरेन्द्र मोदी का नाम भी उनके साथ जोड़ा था। साथ ही यह सवाल उठाया था कि ‘सभी चोरों के उपनाम मोदी ही क्यों होते हैं ?’ राहुल गांधी की इस टिप्पणी से नाराज़ हुए सूरत पश्चिम विधानसभा सीट के निर्वाचित भाजपा विधायक प्रणेश मोदी ने स्थानीय सत्र अदालत में राहुल गांधी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। प्रणेश मोदी ने अपनी याचिका में कहा कि राहुल गांधी ने पूरे मोदी समुदाय की मानहानि की है, इसलिये उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिये। यह याचिका विचारार्थ स्वीकार करते हुए अदालत ने भी कहा था कि प्रथम दृष्टया आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। इसके बाद अदालत ने मई में राहुल गांधी के विरुद्ध समन जारी किये थे और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने को कहा था। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राहुल गांधी को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने से छूट दी थी और अगली सुनवाई 10 अक्टूबर सुनिश्चित की थी।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह से पराजय होने के बाद राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से ही कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। इसी बीच राहुल गांधी पिछले दिनों विदेश चले गये थे, जो गुरुवार को ही लौटे हैं और सीधे सूरत एयरपोर्ट पर उतरने के बाद पौने ग्यारह बजे सत्र अदालत में पेश हुए, जहाँ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बी. एच. कापड़िया ने उनसे उनका नाम, उम्र और पता पूछा। इसके बाद उन पर लगे आरोप पढ़ कर सुनाये और उनसे पूछा कि ‘क्या वे उन पर लगे इन आरोपों को स्वीकार करते हैं।’ राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि ‘उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है।’ इसके तुरंत बाद राहुल गांधी के वकील किरीट पानवाला ने अदालत के समक्ष राहुल गांधी को इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान उपस्थित होने से स्थाई छूट देने की माँग करने वाली एक अर्जी दायर की और मामले की अगली तारीख देने की विनती की। तत्पश्चात् अदालत ने इस मुकदमे की अगली तारीख 10 दिसंबर मुकर्रर कर दी और कहा कि पेशी से स्थाई छूट देने की अर्जी पर सुनवाई भी उसी दिन होगी। इस बीच राहुल गांधी अदालत में लगभग 15 मिनट तक उपस्थित रहे।

पटना में भी जमानत पर हैं

इसी बयान पर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी राहुल गांधी के विरुद्ध पटना की सत्र अदालत में अप्रैल-2019 में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मामले में राहुल गांधी को 6 जुलाई को उपस्थित होकर जमानत लेनी पड़ी है। यह मुकदमा भी चल ही रहा है।

नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी पहले से ही जमानत पर हैं।

भिवंडी कोर्ट में भी चल रहा मानहानि केस

महाराष्ट्र की भिवंडी कोर्ट में भी राहुल गांधी के विरुद्ध मानहानि का केस चल रहा है, जो लगभग 5 साल पुराना है। इस मामले में भी इसी महीने 19 अक्टूबर को राहुल गांधी को अदालत में पेश होना है। 6 मार्च-2014 को महाराष्ट्र के सोनाले में एक आम सभा के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि महात्मा गांधी की हत्या में जो लोग शामिल थे, वे आरएसएस के लोग थे। इसलिये संघ के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ भिवंडी कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे को खत्म कराने के लिये राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता के वकीलों को दो विकल्प दिये थे या तो राहुल गांधी माफी माँग लें या फिर मुकदमा लड़ें। राहुल गांधी ने वहाँ भी पहले विकल्प को नकार दिया था। इसलिये अब वे तारीख पर तारीख का सामना कर रहे हैं।

मझगाँव कोर्ट से भी जमानत पर हैं राहुल गांधी

दूसरा एक मानहानि का मामला भी महाराष्ट्र की शिवड़ी, मझगाँव अदालत में चल रहा है। इसमें भी राहुल गांधी को 4 जुलाई को जमानत मिली है। यह मामला भी आरएसएस की मानहानि से जुड़ा है। दरअसल कर्नाटक के पत्रकार गौरी लंकेश की सितंबर-2017 में बेंगलुरू में हत्या हुई थी। हत्या के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि जो भी संघ और बीजेपी की आइडियोलॉजी के विरुद्ध बोलता है, वो पिटता है, उस पर हमले होते हैं और यहाँ तक कि हत्या कर दी जाती है।

अहमदाबाद में भी चल रहा मानहानि का केस

ज्ञात हो कि राहुल गांधी को शुक्रवार को भी गुजरात की एक अन्य अदालत में पेश होना है। अहमदाबाद की अदालत में भी उनके विरुद्ध मानहानि का मुकदमा चल रहा है। यह मुकदमा नोटबंदी के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की ओर से दिये गये एक बयान को लेकर है, जिसमें राहुल गांधी और सुरजेवाला ने कहा था कि 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी होने के बाद 5 दिन के भीतर ही अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (ADCB) ने 745.59 करोड़ के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट 2000 के नये नोटों में बदल कर ब्लैक मनी को व्हाइट किया था। इस बयान को लेकर एडीसी बैंक और उसके अध्यक्ष अजय पटेल ने पिछले वर्ष राहुल गांधी और सुरजेवाला के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया था। यह मामला भी भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दर्ज किया गया है। इस मामले में अहमदाबाद की सत्र अदालत ने अप्रैल-2019 में सुनवाई शुरू की थी। तब कोर्ट ने राहुल गांधी को 27 मई को पेश होने का आदेश दिया था। उस समय इस केस में राहुल गांधी के वकील पंकज चांपानेरी ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा था कि इस दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि देने के लिये राहुल गांधी शांतिवन जाएँगे, इसलिये उन्हें कोर्ट से पेशी के लिये कोई दूसरा समय दिया जाए, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए राहुल गांधी और सुरजेवाला को 12 जुलाई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। 12 जुलाई को पेश होने पर भी अदालत ने उनसे यही सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने भी यही जवाब दोहराया था कि ‘मैं गुनाहगार नहीं हूँ, मुझे आरोप स्वीकार नहीं हैं।’ तब अदालत ने उन्हें 15 हजार रुपये के बांड पर रिहा किया था। इसके बाद सुनवाई 7 सितंबर तक टाल दी गई थी। 7 सितंबर को सुनवाई के वक्त राहुल गांधी कैलास मानसरोवर की यात्रा पर थे, इसलिये उपस्थित नहीं हुए थे और सुनवाई 11 अक्टूबर तक के लिये स्थगित कर दी गई थी। अब शुक्रवार को राहुल गांधी को इस मामले में भी अदालत में पेश होना है।

उल्लेखनीय है कि यदि राहुल गांधी पर आरोप साबित होते हैं तो उन पर जिस भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर हुआ है, उसके तहत 2 साल कैद की सजा अथवा जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

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