देश से झूठ कौन बोल रहा है, नरेन्द्र मोदी या राहुल गांधी ? जानिए पूरा सच !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। अपने बयानों को लेकर विवादों से घिरे रहने वाले कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने एक और विवादास्पद बयान देकर एक बार फिर नई बहस को जन्म दे दिया। बीते दिनों जब देश बेटियों के साथ गैंगरेप और निर्मम हत्या को लेकर गुस्से में था, तब राहुल गांधी ने देश को ‘रेप कैपिटल’ कहकर विवाद जगाया और अब उन्होंने देश के पीएम को ‘आरएसएस का पीएम’ कह कर नया विवादित बयान दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी को देश से झूठ बोलने वाला पीएम भी कहा। उन्होंने बयान में कहा कि ‘आरएसएस का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता है।’ राहुल गांधी के इस बयान में राजनीतिक अपरिपक्वता तो है ही, साथ ही बदजुबानी भी है। ऐसा भी नहीं है कि राहुल गांधी ने ऐसी बदजुबानी पहली बार की है। देश को रेप कैपिटल कहने वाला बयान भी बदजुबानी के दायरे में ही आता है। राहुल गांधी बयान देने से पहले भूल जाते हैं कि इससे पहले उन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के दौरान भी विवादित बयान दिये थे, जिन्हें पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपने फायदे के लिये इस्तेमाल किया था। उससे भी पहले राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान राफेल डील को लेकर खुद ही देश में झूठ फैलाया था और जिसके लिये उन्हें सुप्रीम कोर्ट से माफी तक माँगनी पड़ी थी। तब ही यह साबित हो गया था कि देश से झूठ कौन बोलता है ? जहाँ तक देश से झूठ बोलने की बात है तो यहाँ भी राहुल गांधी की राजनैतिक अपरिपक्वता ही उजागर हुई है।

क्या कहा राहुल गांधी ने और किस बारे में ?

दरअसल, देश में नागरिकता कानून (CAA) बनने के बाद इस कानून को लेकर तथा नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इतना ही नहीं, इन दोनों को लेकर एक समुदाय विशेष के लोगों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन भी किये। विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला अभी भी जारी है। ऐसे में दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा की ओर से एक रैली का आयोजन किया गया, जिसे पीएम मोदी ने संबोधित किया। इस रैली से पीएम मोदी ने पूरे देश में हिंसक हो रहे समुदाय को समझाने का प्रयास किया और कहा कि नागरिकता बिल का देश के नागरिकों से कोई संबंध नहीं है। यह कानून पड़ोसी देशों में उत्पीड़न झेलने के बाद भारत में आकर बसने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिये लाया गया है। इसी प्रकार उन्होंने एनआरसी को लेकर भी स्पष्टता की कि अभी देश में एनआरसी लाने की कोई पहल ही नहीं हुई है। न तो एनआरसी पर केन्द्रीय सरकार के मंत्रिमंडल में कोई चर्चा हुई है और न ही देश की संसद में इससे जुड़ा कोई बिल लाया गया है। फिर एनआरसी को लेकर इतना हंगामा क्यों किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में केन्द्र सरकार ने कोई डिटेंशन सेंटर (हिरासत केन्द्र) नहीं बनवाया है। आप लोगों को झूठ बोल कर गुमराह किया जा रहा है। इसमें पीएम मोदी ने कुछ भी गलत नहीं कहा।

हालाँकि कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने 26 दिसंबर गुरुवार को अपने ऑफिसियल ट्वीटर हैंडल पर एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने बीबीसी न्यूज़ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि, ‘आरएसएस का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता है।’ राहुल गांधी के इस बयान को लेकर ही नया विवाद छिड़ गया है।

राहुल गांधी को भाजपा का करारा जवाब

भाजपा की ओर से राहुल गांधी को इस बयान का जवाब भी दे दिया गया है, जिसमें भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि, ‘राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया है और उसमें जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है, वो आपत्तिजनक है। संबित पात्रा ने भी जवाबी ट्वीट में इस बात का उल्लेख कर ही दिया कि राहुल गांधी से भद्रता और अच्छी भाषा की अपेक्षा करना ग़लत है।’

झूठ कौन बोल रहा है ?

हम पीएम मोदी के बयान और राहुल गांधी के बयान की तुलना करें तो सहज रूप से समझा जा सकेगा कि ‘कौन झूठ बोल रहा है।’

बीबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट में असम के गोवालपारा जिले के माटिया गाँव में बन रहे डिटेंशन सेंटर को दिखाया गया है, जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। इसका दो तिहाई निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है। इसे दिसंबर 2019 तक बन कर तैयार होना था, परंतु समय पर निर्माण पूरा नहीं हो सका, अब मार्च-2020 तक पूरा करने की नई डेडलाइन तय की गई है। इस डिटेंशन सेंटर में 3,000 अवैध प्रवासियों को रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसे 46 करोड़ रुपये की लागत से लगभग ढाई हेक्टेयर भूमि पर तैयार किया जा रहा है। यह डिटेंशन सेंटर वास्तव में केन्द्र सरकार असम सरकार के साथ मिल कर बनवा तो रही है, परंतु यह केन्द्र सरकार या असम सरकार की परियोजना नहीं है। यह न्यायपालिका के आदेश से बनाया जा रहा है और चूँकि 2009 से कांग्रेस शासित केन्द्र और असम सरकार में जो बांग्लादेशी घुसपैठिये असम में पकड़े गये, उन्हें रखने के लिये सरकार के पास कोई उचित जगह नहीं थी, इसलिये असम सरकार ने कुछ जेलों को ही डिटेंशन सेंटर में बदल दिया है। इनमें रह रहे अवैध प्रवासियों को उचित सुविधाएँ नहीं मिलने की अदालत से शिकायत की गई थी, जिसकी सुनवाई के बाद न्यायपालिका ने उनके लिये उचित सुविधाओं वाला डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया था। इस प्रकार यह सेंटर पहले से हिरासत में रखे गये अवैध प्रवासियों के लिये बनाया जा रहा है, न कि पूरे देश में एनआरसी लागू करके देश के मुस्लिमों को उसमें रखने के लिये। इस प्रकार मोदी सरकार का यह कहना कि कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनाया जा रहा है, सही है। क्योंकि देश का एक समुदाय जिस भ्रम में हिंसक आंदोलन कर रहा है, उसका भ्रम दूर करने के लिये ही पीएम मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बना रही है, जो कि सही है। इससे स्पष्ट है कि पीएम मोदी कोई झूठ नहीं बोल रहे हैं, बल्कि कांग्रेसी सांसद राहुल गांधी ही देश को गुमराह करने वाला बयान दे रहे हैं।

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