रामपुर के रण में ‘चीरहरण’ : जानिए कौन है द्रौपदी और कौन हैं दुर्योधन, दुःशासन, धृतराष्ट्र ? ‘भीष्म’ क्यों हैं मौन ?

पाँच हजार वर्ष पहले महाभारत में धृतराष्ट्र की सभा में दुर्योधन के दुस्साहस के बल पर दुःशासन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था। उस सभा में धृतराष्ट्र के चेहरे पर दिखने वाली आँखें देख नहीं सकतीं, तो अंतर्दृष्टि पर मोह का पर्दा था। उस सभा में भीष्म पितामह हस्तिनापुर के सिंहासन से बंधे होने की प्रतिज्ञा के कारण विवश थे और उन्हें अपनी आँखों के सामने कुलवधु द्रौपदी का चीरहरण देखना पड़ा, परंतु पाँच हजार वर्ष हो जाने के बाद आज भी उत्तर प्रदेश के चुनावी महाभारत में द्रौपदी निःसहाय है। धृतराष्ट्र मोहांध है। दुर्योधन और दुःशासन मनमानी कर रहे हैं और भीष्म मौन हैं। प्रश्न यह उठता है कि उस भीष्म की तो मजबूरी थी। इस भीष्म की क्या मजबूरी है ?

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रामपुर के रण की, जहाँ समाजवादी पार्टी (सपा-SP) के दिग्गज नेता आज़म खान और भाजपा नेता व बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा के बीच काँटे की टक्कर होने जा रही है। अब, आपको ये भी बताए देते हैं कि रामपुर के इस रण में जनता की सभा में जया प्रदा को बना दिया गया है द्रौपदी और आज़म खान दुर्योधन-दुःशासन की तरह उनका चीरहरण कर रहे हैं। धृतराष्ट्र की भूमिका में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और भीष्म हैं सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव।

आज़म ने लांघी सभी मर्यादाएँ

चुनावी महाभारत में जया प्रदा से काँटे की टक्कर होने और ‘मेरा दुश्मन ताक़तवर है’ कह कर परिणाम से पहले ही हार स्वीकार कर चुके आज़म खान ने जया प्रदा पर शब्दों से प्रहार करने में सभी मर्यादाएँ लांघ दीं। एक जनसभा में आज़म खान ने वोट मांगते हुए उपस्थित लोगों से पूछा, ‘क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का ख़ून पिया, जिसे उंगली पकड़ कर हम रामपुर में लेकर आए, उसने हमारे ऊपर क्या-क्या इल्ज़ाम गाए ? क्या आप उसे वोट देंगे ?’ यहाँ तक तो ठीक था, परंतु आज़म खान यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे जो कहा, उसने पूरी सपा, अखिलेश और मुलायम पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। कभी सपा में रहीं जया प्रदा के भाजपा में शामिल हो जाने पर कटाक्ष करते हुए आज़म खान ने कहा, ‘आपने 10 साल जिसने अपना प्रतिनिधित्व कराया, उनकी असलियता समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिनों में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाखी रंग का है।’

आज़म की निर्लज्जता पर मुलायम मौन क्यों ?

आज़म खान ने इस तरह का वक्तव्य देकर चुनावी महासभा में खुलेआम जया प्रदा को द्रौपदी बना कर उनका चीरहरण किया, परंतु सपा के भीष्म मुलायम सिंह यादव अभी भी मौन हैं। प्रश्न यह उठता है कि मुलायम सिंह को कौन-सी प्रतिज्ञा मौन रहने पर विवश कर रही है ? क्या मुलायम अखिलेश के दबदबे से विवश हैं ? क्या मुलायम आज़म की दगंबाई के आगे विवश हैं ? आखिर मुलायम मौन क्यों हैं ? 5 हजार वर्ष पूर्व के भीष्म की विवशता को भी जब कई लोग न्यायोचित नहीं मानते, तो आज के भीष्म मुलायम (जो किसी प्रतिज्ञा से बंधे नहीं हैं) और उनके मौन को लोग क्षमा करेंगे ?

सुष्मा स्वराज ने मुलायम को चेताया

विदेश मंत्री और भाजपा नेता सुष्मा स्वराज ने भी आज़म के वक्तव्य पर ट्वीट कर सीधे-सीधे मुलायम सिंह यादव को चेतावनी दी कि आप भीष्म की तरह मौन न रहें। सुषमा ने ट्वीट किया, ‘मुलायम भाई – आप पितामाह हैं समाजवादी पार्टी के। आपके सामने रामपुर में द्रौपदी का चीरहरण हो रहा है। आप भीष्म की तरह मौन साधने की ग़लती मत करीए।’ सुष्मा ने अपने ट्वीट में अखिलेश, जया भादुड़ी और डिंपल यादव को भी टैग किया है।

आज़म के विरुद्ध महिला आयोग एक्शन में

आज़म खान ने जया प्रदा नहीं, अपितु समग्र नारी जाति का अपमान किया है, जिसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NWC) भी एक्शन में आ गया है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने आज़म के वक्तव्य को अत्यंत अमर्यादित ठहराते हुए कहा कि आयोग आज़म खान को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा। NWC चुनाव आयोग (EC) से भी आग्रह करेगा कि वह आज़म के चुनाव लड़ने पर रोक लगाए। रेखा शर्मा ने ट्वीट किया, ‘आज़म खान हमेशा महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अशिष्ट रहे हैं। NCW इसका स्वतः संज्ञान लेगा और उन्हें नोटिस भेजेगा। हम EC से भी आग्रह करेंगे कि वह आज़म के चुनाव लड़ने पर रोक लगाए।’

बेशर्म आज़म को वक्तव्य पर अफसोस नहीं

जया प्रदा पर अपने वक्तव्य को लेकर आज़म खान ने कोई खेद नहीं जताया। विवादों में घिरने के बाद आज़म ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘मेरी बात को ग़लत तरीके से पेश किया गया। मैंने किसी का ना नहीं लिया और अगर मैं दोषी साबित होता हूँ, तो चुनाव से हाथ पीछे कर लूँगा। मैं रामपुर विधानसभा सीट से नौ बार विधायक और एक बार प्रदेश का मंत्री रहा हूँ। मुझे पता है क्या कहना है। अग़र कोई यह साबित कर दे कि मैंने किसी का नाम लिया और किसी का नाम लेकर अपमान किया, अगर यह साबित होता है, तो मैं चुनाव से हाथ पीछे कर लूँगा।’

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