हे राम ! पिछले 15 वर्षों में बलात्कार की 4 लाख घटनाएँ, पर फाँसी किसी को नहीं..!

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। तेलंगाना (TELANGANA) की राजधानी हैदराबाद (HYDERABAD) में पशु चिकित्सक (VETERINARY) दिशा की बलात्कार और हत्या की घटना के बाद देश में एक बार फिर बलात्कारियों को फांसी की सज़ा देने की माँग बुलंद हो रही है। ऐसे में जो एक तथ्य सामने आया है वो काफी चौंकाने वाला है। देश में पिछले 15 वर्षों से किसी बलात्कारी को फांसी पर नहीं लटकाया गया है। बलात्कारी को अंतिम फाँसी 15 वर्ष पहले 2004 में दी गई थी, तब से लेकर अभी तक देश में 4 लाख से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज हो चुके हैं। सबसे अधिक चर्चित दिल्ली के निर्भया कांड (NIRBHAYA CASE DELHI) में फाँसी की सज़ा पाने वाले 4 अपराधियों को भी अभी तक फाँसी पर नहीं लटकाया गया है। इसी प्रकार कई अन्य मामलों में भी आरोपियों को फाँसी की सज़ा तो सुनाई गई है, परंतु कानूनी पेचीदगियों के कारण उनकी सज़ा पर अमल नहीं किया गया है।

धनंजय चैटर्जी को फाँसी

पश्चिम बंगाल (WEST BENGAL) के कुलुडीही में जन्मा धनंजय चैटर्जी एक सुरक्षा पहरेदार था। उसने 5 मार्च 1990 को भवानीपुर में 14 वर्षीय हेतल पारिख के साथ उसी के निवास पर बलात्कार किया था और इस घटना को अंजाम देने के बाद उसने हेतल की हत्या कर दी थी। इस मामले में गिरफ्तार धनंजय को 14 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की अलीपुर जेल (ALIPUR JAIL) में रखा गया था और उसे फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी। इस सज़ा के खिलाफ उसके परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी और वहाँ से याचिका खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका की थी, 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी अपराध की भयंकरता को देखते हुए अपराधी की दया याचिका 4 अगस्त 2004 को खारिज कर दी थी। इसके 10 दिन बाद 14 अगस्त को उसे अलीपुर जेल में फाँसी पर लटका दिया गया था। यह संयोग ही था कि उसे उसके जन्मदिन को ही मृत्युदंड दिया गया था।

2004 से लेकर अब तक बलात्कार के 4 लाख मामले

बलात्कारी धनंजय चैटर्जी को फाँसी दिये 15 साल बीत चुके हैं। यह विडंबना ही है कि इसके बाद से अब तक देश में किसी बलात्कारी को फाँसी पर नहीं लटकाया गया है, जबकि इन 15 सालों में बलात्कार की 4 लाख से भी अधिक घटनाएँ हो चुकी हैं। इनमें दिल्ली का बहुचर्चित निर्भया कांड भी शामिल है, जिसमें 4 आरोपियों को दोषी ठहरा कर फाँसी की सज़ा सुनाई गई है, परंतु उन्हें सज़ा सुनाए हुए भी 6 साल बीत चुके हैं। अब तक इन बलात्कारियों को भी फाँसी पर नहीं लटकाया गया है। इसके बाद जम्मू में कठुआ की गुड़िया का बलात्कार और हत्या केस, उन्नाव बलात्कार कांड, मध्य प्रदेश में 4 महीने की बालिका के साथ बलात्कार और हत्या जैसे कई अन्य मामले भी सामने आए।

इस बीच आपको बता दें कि तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद रेप और मर्डर केस की पीड़िता का नाम बदल दिया है। अब से पीड़िता को ‘जस्टिस फोर दिशा (JUSTICE FOR DISHA)’ के नाम से जाना जाएगा। इससे पहले दिल्ली के निर्भया और अभया मामलों में ऐसा किया गया था। पीड़िता और उसके परिवार को संरक्षण देने के उद्देश्य से ऐसा किया गया है।

कई मामलों में लोगों के गुस्से को देखते हुए वकीलों ने आरोपियों की पैरवी करने से भी इनकार कर दिया। केन्द्र सरकार ने बाल यौन अपराध संरक्षण कानून यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैक्युअल ऑफेंसेज़ एक्ट (POSCO) 2012 में संशोधन करके 12 साल तक के बच्चों (लड़का-लड़की) के साथ दुष्कर्म करने पर कम से कम सज़ा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल, उम्रकैद और मृत्युदंड तक की सज़ा का प्रावधान किया है। इसके बावजूद भी बच्चों के साथ होने वाले दुष्कर्म के अपराधों में कोई कमी नहीं आई है। हर साल लगभग 40 हजार मामले बलात्कार के दर्ज हो रहे हैं। हर दिन औसत 106, हर घंटे औसत 5 और हर 20 मिनट में एक बलात्कार की घटना हो रही है। इन 40 हजार मामलों में से लगभग 10 हजार मामले नाबालिग बच्चियों से जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार हर साल लगभग 2000 मामले गैंगरेप के सामने आते हैं। यह भी एक कटु सत्य है कि दुष्कर्म के मामलों में मात्र 25 प्रतिशत आरोपियों को ही सज़ा मिल पाती है, जबकि 71 प्रतिशत मामले तो रिपोर्ट ही नहीं किये जाते हैं।

देश की लोक सभा (LOK SABHA) और राज्यों की विधानसभाओं (ASSEMBLY) में 30 प्रतिशत नेताओं (POLITICIAN) का आपराधिक रिकॉर्ड है। इनमें से 51 प्रतिशत पर महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले दर्ज हैं। 4 नेता तो सीधे-सीधे दुष्कर्म के मामलों का सामना कर रहे हैं। पूरे देश में भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत लगभग 3 करोड़ मामले अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। इनमें से भी 30 लाख मामले तो देश के 21 हाई कोर्ट (HIGH COURT) में लंबित हैं, जबकि बड़ी बात तो यह है कि इनमें से भी डेढ़ लाख से ज्यादा मामले केवल दुष्कर्म के हैं।

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