उधर रुदाली-इधर खुशहाली : इमरान का कश्मीरी मातम, मोदी ने नहीं लिया ‘नापाक’ नाम भी !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 15 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। ब्रिटिश साम्राज्य से 72 वर्ष पहले भारत मुक्त हुआ और साथ ही विश्व में पाकिस्तान नामक एक नए राष्ट्र की अनचाही उत्पत्ति हुई। हिन्दू पूर्वजों के वंशज मोहम्मद अली जिन्ना, जो स्वयं तो ‘कट्टर धार्मिक’ नहीं थे, परंतु उसी के सहारे उन्होंने मुस्लिमों के लिए एक अलग देश मांगा और भारत से मिले टुकड़े के बल पर भारत को ही मिटाने के पापपूर्ण संकल्पों के साथ पाकिस्तान की नींव रखी। दूसरी तरफ 200 वर्षों की दासता से मुक्त हुआ भारत बँटवारे की पीड़ा, ब्रिटिश साम्राज्य से मिले खंड-खंड भारत को एकजुट करते हुए लगातार आगे बढ़ता गया और आज पूरी दुनिया में उसका डंका बजता है, परंतु जिन्ना की नफरतभरी नींव पर खड़े हुए पाकिस्तान की सुई 72 वर्षों से भारत विरोधी एजेंडा पर ही टिकी हुई है।

यही कारण है कि 72 वर्षों के बाद भी जब भारत और पाकिस्तान ने स्वतंत्रता दिवस मनाया, तब दोनों ही देशों के स्वतंत्रता दिवस समारोहों और उत्सवों में घोर विरोधाभास नज़र आया। पाकिस्तान में जहाँ बुधवार को मनाए गए स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और सभी मंत्रियों के बीच कश्मीरी रुदाली बज रही थी, वहीं भारत में गुरुवार को मनाए गए स्वतंत्रता दिवस पर देश की खुशहाली की बातें हो रही थीं, विकास के सपने संजोए जा रहे थे, नए भारत के निर्माण की नींव में नए-नए मील के पत्थर जोड़े जा रहे थे।

कश्मीर : मोदी की सहजता, आरिफ-इमरान का राग

जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद भारत में जहाँ 73वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर 72 वर्षों में पहली बार भारी उत्साह था। 15 अगस्त, 1947 से लेकर 72वें स्वतंत्रता दिवस तक जम्मू-कश्मीर धारा 370 के चंगुल में फँसा हुआ था। यह पहला मौका था, जब पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का वास्तविक अभिन्न अंग महसूस कर रहा था। देश के लोगों में भी 73वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर कश्मीर के मुद्दे पर भारी उत्साह था। यद्यपि भारत के लोगों में कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर उत्साह था, उन्माद नहीं। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 92 मिनट का भाषण भी केवल जम्मू-कश्मीर और धारा 370 व अनुच्छेद 35ए पर केन्द्रित नहीं था। मोदी ने इन मुद्दों को सहजता से उल्लेख किया और भाषण के अगले मुद्दों पर चल पड़े। मोदी ने अपने भाषण में कश्मीर से ऊपर उठ कर आतंकवाद, राष्ट्र की सुरक्षा, राष्ट्र की समस्याओं, उनसे निपटने के उपाय सहित कई मुद्दों को स्पर्श किया। दूसरी तरफ पाकिस्तान में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके सभी मंत्री बुधवार को अपने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर कश्मीरी मातम मनाते दिखाई दिए। सभी पाकिस्तानी नेताओं ने आज़ादी दिवस पर केवल और केवल कश्मीर राग आलापा। इमरान खान ने न्यू पाकिस्तान को लेकर कोई विज़न नहीं दिया। उन्होंने इस बेहतरीन मौके पर भारत के विरुद्ध ज़हर उगला, पर नए पाकिस्तान को लेकर कोई घोषणा नहीं की। पाकिस्तान का पूरा आज़ादी पर्व कश्मीर के इर्द-गिर्द घूमता रहा।

पावन अवसर पर ‘नापाक’ काम करने से बचे मोदी

पाकिस्तान का निर्माण ही धार्मिक कट्टरता और नफरत की बुनियाद पर हुआ है। पाकिस्तान की यह रुदाली 73वें स्वतंत्रता दिवस पर ही नहीं, अपितु हर स्वतंत्रता दिवस पर रहती आई है। पाकिस्तानी नेताओं का एकमात्र एजेंडा भारत विरोध है, जो उन्हें जिन्ना से विरासत में मिला है। धारा 370 तो 5 अगस्त को हटाई गई, परंतु इससे पहले भी पाकिस्तान का हर स्वतंत्रता दिवस भारत के नाम के उल्लेख बिना अधूरा ही माना जाता रहा है। वहाँ के नेताओं को तब तक सुकून नहीं मिलता, जब तक कि वे भारत को गालियाँ नहीं बक देते। इस बार गालियों का उबाल अधिक था, क्योंकि पाकिस्तानी नेताओं की कश्मीरी दुकानों पर ताले पड़ चुके थे। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों ने पाकिस्तानी नेताओं के भीतर तक ऐसा भय बैठा दिया कि बेचारे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) को बचाने की जुगत में जुट गए और स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पीओके स्थित मुज़फ्फराबाद को चुना। पाकिस्तानी नेताओं ने यह सोच कर मुज़फ्फराबाद में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया कि इससे भारत को कड़ा संदेश देंगे, परंतु भारत ने इस बात को तनिक भी गंभीरता से नहीं लिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की आक्रामक नीति से घबराए पाकिस्तान को ऐसा करने से कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि मोदी-शाह ने जिस दिन मिशन पीओके छेड़ दिया, उस दिन वह उसे हासिल करके ही दम लेंगे। जहाँ तक भारत की बात है, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने भाषण में कश्मीर का उल्लेख किया, परंतु गर्व के साथ। इतना ही नहीं, उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर नापाक पाकिस्तान का नाम तक लेना उचित नहीं समझा। मोदी के पूरे 92 मिनट के भाषण में पाकिस्तान के लिए सबक तो कई थे, परंतु मोदी ने अपनी जीभ पर इस नापाक नाम को नहीं आने दिया।

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