VIDEO : ‘मोदी है तो ही मुमकिन है’ : जब ओबामा ने दिया वीज़ा, ट्रम्प ने की कॉपी और अब पोम्पियो बोल पड़े, ‘मोदी है तो मुमकिन है’ !

भारत यात्रा पर आने से पहले माइक पोम्पियो का ‘नमो-नमो’

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 13 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, यूएस, यूएसए, अमेरिका। यह केवल एक देश नहीं, अपितु विश्व का सबसे शक्तिशाली देश है। वॉशिंगटन से उठने वाली हर दहाड़ दुनिया के हर देश को दहलाने की क्षमता रखती है। यद्यपि ‘जगत जमादारी’ का स्वयंभू चोला पहने अमेरिका को कई देश न केवल गंभीरता से नहीं लेते, अपितु उससे भिड़ने में भी घबराते नहीं है।

जहाँ तक भारत की बात है, तो अंकल सेम की कोशिश हमेशा भारत से भाईचारे की ही रहती है और जब से नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से बराक ओबामा से लेकर डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ करबद्ध मुद्रा में ही व्यवहार करता आया है। एक समय था जब भारत के साथ पूरी दुनिया में एकमात्र रूस खड़ा रहता था। यहाँ तक कि पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भी अमेरिका जैसे देश पाकिस्तान के साथ खड़े थे, परंतु 21वीं शताब्दी का भारत नया भारत बन चुका है।

नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तेजी से बढ़ी है, वैसी पहले कभी नहीं बढ़ी। दूसरी तरफ भारत के साथ चार बार युद्ध करके चारों बार हारने वाले और उसके बाद आतंकवाद के ज़रिए भारत विरोधी अभियान छेड़ने वाले पाकिस्तान के साथ अब न तो अमेरिका जैसी ताक़त है और न ही कोई अन्य विकसित व समृद्ध देश उसके साथ है। मोदी की सफल विदेश और कूटनीति के आगे पूरी दुनिया भारत के आगे नतमस्तक है और सहयोग को तत्पर है।

यह भूमिका इसलिए देनी पड़ रही है, क्योंकि भारत में लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान लगातार तीन महीनों तक जो नारा केवल एक राजनीतिक दल का था, वह नारा चुनाव परिणामों में पूरे देश का बन गया और अब तो दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के विदेश मंत्री भी उस नारे का उल्लेख करते देखे-सुने गए हैं। जी हाँ, हम जिस नारे की बात कर रहे हैं, वह है, ‘मोदी है तो मुमकिन है’। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो 24 जून को भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, परंतु उन पर मोदी का रंग अभी से चढ़ गया है। पोम्पियो ओसाका में 28 व 29 जून को होने वाले जी-20 सम्मेलन के आलोक में 24 जून को भारत का दौरा करने वाले हैं और इस दौरान वे भारत में अपने समकक्ष विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भेंट करने वाले हैं।

इस बीच भारत आगमन से पहले माइक पोम्पियो पर नरेन्द्र मोदी का रंग चढ़ गया है और वे मोदी तथा एस. जयशंकर की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। बुधवार को भारत-अमेरिका व्यापार परिषद् की बैठक में पोम्पियो ने कहा, ‘मैं देखना चाहता हूं कि मोदी दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत कैसे बनाते हैं ? अपने समकक्ष जयशंकर से मिलने के लिए भी उत्साहित हूँ। वे एक मजबूत साथी हैं। हम भारत की नई सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे। मोदी ने अपने चुनाव अभियान में कहा था, ‘मोदी है तो मुमकिन है’। अब देखना है कि वे दुनिया के साथ रिश्तों और भारत की जनता से किए वादों को कैसे संभव बनाते हैं। उम्मीद है कि वे अमेरिका के साथ रिश्तों को और मजबूत करेंगे। भारत यात्रा के दौरान ट्रम्प प्रशासन के ‘महत्वाकांक्षी एजेंडा’ पर बातचीत होगी। भारत के चुनाव नतीजों से आश्चर्यचकित नहीं हुआ, बल्कि मैं जानता था कि पीएम मोेदी नए तरीके के नेता हैं। उन्होंने एक राज्य को 13 साल दिए। चायवाले के बेटे हैं और गरीब से गरीब का विकास उनकी प्राथमिकता में है। उन्होंने भारत के करोड़ों घरों में बिजली और गैस चूल्हे पहुंचाए हैं।’

‘मोदी है तो मुमकिन है’ : ओबामा ने दिया वीज़ा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) का यह चुनावी नारा वैसे तो लोकसभा चुनाव 2019 के लिए ही था, परंतु वास्तविकता यह है कि मोदी ने जब से शासकीय-चुनावी राजनीति में कदम रखा है, तब से बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो नामुमकिन लगता था, परंतु मोदी के कारण मुमकिन हुआ। घरेलू राजनीति को छोड़ कर केवल अमेरिका के परिप्रेक्ष्य में देखें, तो ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे के आगे 2014 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी झुकना पड़ा। ओबामा ने गुजरात दंगों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका आने का वीज़ा नहीं दिया था, परंतु 2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्हीं ओबामा को न केवल मोदी को वीज़ा देना पड़ा, अपितु दुनिया भर में मोदी-ओबामा की दोस्ती और केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी रही।

‘मोदी है तो मुमकिन है’ : ट्रम्प ने की मोदी की नकल

‘मोदी है तो मुमकिन है’ वाली बात ओबामा के बाद राष्ट्रपति बनने की रेस में आए डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अपने चुनाव अभियान में सिद्ध कर दी। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने ‘अबकी बार-मोदी सरकार’ का नारा दिया था। डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव 2015 में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान इसी नारे की नकल करते हुए ‘अबकी बार-ट्रम्प सरकार’ का नारा दिया था। इतना ही नहीं, कअमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी भाजपा के 2019 के ‘फिर एक बार-मोदी सरकार’ की तर्ज पर ‘फिर एक बार-ट्रम्प सरकार’ का नारा दिया जाने लगा है।

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