#MahaSurprise : विधानसभा में होगा चमत्कार, फडणवीस के साथ भी हैं ‘पवार’ !

* होटलों में दिखाई दे रहा ‘बहुमत’ कितना वास्तविक ?

* MNS नेता संदीप देशपांडे के ट्वीट में छिपी है पवार की राजनीति ?

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 25 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र में रातोंरात राष्ट्रपति शासन हटा कर देवेन्द्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) नेता फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा-NCP) के समर्थन का दावा करते हुए सरकार को बना ली, परंतु इसके बाद घटे घटनाक्रमों से महाराष्ट्र के राजनीतिक वातावरण में यह संदेश प्रसारित हो रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह की चाणक्य नीति में कहीं कोई झोल है और फडणवीस फँस गए हैं, परंतु ऐसे किसी भी निष्कर्ष पर अभी से पहुँचना शीघ्रता होगी।

वास्तव में फडणवीस सरकार के भाग्य का निर्णय तो अब विधानसभा के भीतर ही होगा। वैसे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडणवीस को अपनी सरकार का बहुमत सिद्ध करने के लिए 7 दिन का समय दिया है, परंतु चूँकि सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार फडणवीस को कदाचित बहुमत सिद्ध करना होगा। तारीख़ कोई भी होगी, बहुमत का निर्णय तो विधानसभा में ही होगा। ऐसे में सबकी निगाहें महाराष्ट्र विधानसभा पर रहेंगी, जब मुख्यमंत्री फडणवीस विश्वास मत प्रस्तुत करेंगे।

जिस दिन से फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, उस दिन से शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने अपने-अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए अघोषित रूप से ‘बंधक’ बना कर रखा है। इस होटल से उस होटल में विधायकों को ले जाया जा रहा है। तीनों दल मीडिया के सामने अपने सभी विधायक साथ होने का न केवल दावा कर रहे हैं, अपितु बाक़ायदा रोज़ाना गिनती भी कर रहे हैं। वैसे विधानसभा चुनाव परिणामों के अनुसार देखा जाए, तो शिवसेना (56)+एनसीपी (54)+कांग्रेस (44) विधायकों की कुल संख्या 154 होनी चाहिए, जो बहुमत के आँकड़े 145 से अधिक ही है, परंतु सबसे बड़ी सेंध तो शनिवार को लगी, जब तत्कालीन एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार उप मुख्यमंत्री बन गए और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने यह कह दिया कि यह अजित पवार का व्यक्तिगत निर्णय है। अजित पवार वैसे राजभवन में जब उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने गए थे, तब अपने साथ 8 से 10 विधायक ले गए थे, परंतु कहते हैं और दावे किए जा रहे हैं कि वे सारे विधायक एनसीपी छावनी में लौट आए हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि एनसीपी एकजुट है, परंतु चूँकि अजित पवार ने अभी तक उप मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र नहीं दिया है और वे बार-बार कह रहे हैं कि वे एनसीपी में ही हैं, तो यह भी स्पष्ट हो जाता है कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस (SNC) के विधायकों की कुल संख्या अजित पवार को हटा कर गिनी जाए, तो 153 रह जाती है।

ये है फडणवीस सरकार बचाने की पुख्ता रणनीति

राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों को लगता है कि देवेन्द्र फडणवीस अजित पवार पर भरोसा करके फँस गए और उनकी स्थिति भी कर्नाटक में बी. एस. येदियुरप्पा की तरह ही होगी, जो बहुमत नहीं सिद्ध कर सके थे, परंतु पिक्चर अभी बाकी है। वास्तव में विधानसभा में विश्वास मत के दौरान कई पत्ते खुलेंगे। आवश्यक नहीं है कि होटलों में दिखाई देने वाला बहुमत हॉल में दिखाई दे। एसएनसी की तिकड़ी इस भ्रांति में है कि वह अपने 153 विधायकों को भाजपा की तथाकथित तोड़फोड़ से बचा कर ही फडणवीस सरकार को गिरा देगी, परंतु यह तिकड़ी और कई राजनीतिक विश्लेषक इस बात को ध्यान में नहीं ले रहे कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले फडणवीस की पार्टी भाजपा के पास 105 विधायक हैं और अजित पवार को मिला दें, तो 106 विधायक हुए। ऐसे में भाजपा को बहुमत के लिए आवश्यकता है 39 विधायकों की। विधानसभा में निर्दलीय विधायकों की संख्या 13 है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसी भी पार्टियाँ हैं, जिनके विधायकों की संख्या भी निर्णायक सिद्ध हो सकती है और जो भाजपा का समर्थन कर सकती हैं। इनमें बहुजन विकास अघाड़ी (3), जन सुराज्य शक्ति (1), क्रांतिकारी शेतकरी पार्टी (1), पीजैंट्स एण्ड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (1), प्रहार जनशक्ति पार्टी (2), राष्ट्रीय समाज पक्ष (1) तथा स्वाभिमानी पक्ष (1) शामिल हैं। इन पार्टियों के विधायकों की संख्या 10 होती है। 13 निर्दलीय और इन 10 विधायकों के समर्थन के साथ फडणवीस सरकार के पक्ष में भाजपा (105), अजित पवार (1), निर्दलीय (13) और अन्य पार्टियों (10) के कुल विधायक 139 हो जाएँगे। ऐसी स्थिति में फडणवीस को केवल 6 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता रह जाएगी। संभावनाओं के इस खेल में आवश्यक नहीं है कि सभी निर्दलीय और उपरोक्त सभी अन्य दलों के विधायक भाजपा का समर्थन करें, तो यह भी आवश्यक नहीं है कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के केवल 6 ही विधायक टूटें। फडणवीस सरकार की ज़रूरत के अनुसार भी विधायक टूट सकते हैं।

पवार ही पवार, नहीं गिरेगी फडणवीस सरकार

एसएनसी की तिकड़ी मीडिया और कैमराओं के सामने भले ही अपने विधायकों की एकजुटता दिखा रहे हों, परंतु वास्तविकता यह है कि यदि इन विधायकों को उनकी अपनी ही पार्टी को विश्वास नहीं है। इस सारी उठापटक के बीच भी भाजपा की छावनी में यह आश्वतता दिखाई दे रही है कि फडणवीस सरकार विधानसभा में बहुमत सिद्ध कर देगी, तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है पवार। जी हाँ, एक पवार एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार हैं, तो दूसरी ओर फडणवीस को मुख्यमंत्री बनवाने वाले अजित पवार हैं। दोनों ओर पवार हैं और इसीलिए फडणवीस सरकार नहीं गिरेगी। महाराष्ट्र में केवल 1 सीट हासिल करने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे-MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे समग्र घटनाक्रम में मौन हैं, परंतु आज उनकी पार्टी के एक नेता संदीप देशपांडे ने एक ऐसा ट्वीट किया, जो पवार का वास्तविक अर्थ समझा रहा है। संदीप देशपांडे ने मराठी में यह ट्वीट किया है, जिसके अनुसार, ‘जिन्हें अब भी लगता है कि यह केवल अजित पवार का निर्णय है, उन्हें पुन: एक बार बाल दिवस की शुभकामना..!’ देशपांडे का यह ट्वीट कई संकेत देता है। देशपांडे वही हैं, जिन्होंने कुछ दिनों पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के साथ अपनी तसवीर भी शेयर की थी। देशपांडे अपने इस ट्वीट से स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि अजित पवार अपनी मरज़ी से फडणवीस या भाजपा के साथ नहीं गए हैं, अपितु इस निर्णय के पीछे शरद पवार की ही मुख्य भूमिका है।

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