जानिए किस तरह ‘मोदी मैजिक’ ने महाराष्ट्र-हरियाणा में पलट दिया इतिहास ?

* हरियाणा में पहली बार-महाराष्ट्र में दूसरी बार ‘दोबारा’ CM बनेंगे फडणवीस-खट्टर

* वसंतराव नाइक के बाद दूसरे दीर्घकालिक शासक बनेंगे देवेन्द्र फडणवीस

* बंसीलाल-भजनलाल के बाद तीसरे दीर्घकालिक शासक बनेंगे मनोहरलाल खट्टर

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 25 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के परिणामों को लेकर पूरे देश में यह चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP-बीजेपी) अध्यक्ष अमित शाह का प्रभाव कम हुआ है, क्योंकि जनता ने दोनों ही राज्यों में भाजपा को 2014 की तुलना में कम सीटें दी हैं। गुरुवार को सुबह जब दोनों राज्यों के परिणामों के रुझान आ रहे थे, तब पूरे देश में, मीडिया में और सोशल मीडिया पर यही संदेश दिया जा रहा था कि मोदी मैजिक थोड़ा कमज़ोर पड़ा है। धारा 370 सहित राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों ने जनता पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ा है। दोनों राज्यों की जनता ने क्षेत्रवाद व क्षेत्रीय मुद्दों के आधार पर जनादेश दिया है, परंतु हम आपको बताएँगे कि ये सारे कयास और अनुमान किस तरह अनुचित हैं ? हम आपको बताएँगे कि क्यों महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही राज्यों में मोदी मैजिक के आधार पर ही भाजपा सत्ता में वापसी कर रही है ?

इस बात पर तो सभी विचार-विमर्श, तर्क और चर्चा कर रहे हैं कि महाराष्ट्र-हरियाणा में भाजपा का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव 2014 और लोकसभा चुनाव 2014 की तुलना में बुरा रहा है, परंतु इस तथाकथित बुरे प्रदर्शन के बावजूद भाजपा यदि महाराष्ट्र में (शिवसेना के साथ ही) और हरियाणा में निर्दलीयों के समर्थन से दोबारा सत्ता में आ रही है, तो यह मोदी मैजिक का ही करिश्मा है, क्योंकि गृह मंत्री का कामकाज भी देख रहे भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह मंत्रालयीन व्यस्तता के कारण दोनों राज्यों की चुनावी रणनीति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाए, तो कार्यवाहक अध्यक्ष जे. पी. नड्डा भी शाह जितने प्रभावशाली सिद्ध नहीं हुए। इसके अलावा महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार की धारदार पावर और हरियाणा में मुख्यमंत्री खट्टर को छोड़ कमज़ोर स्थानीय नेतृत्व तथा विद्रोहियों के विघ्न भी भाजपा की सत्ता वापसी में बड़ा रोड़ा बने हुए थे। फिर भी भाजपा ने दोनों राज्यों में सत्ता में वापसी की है, तो यह केवल और केवल मोदी मैजिक का ही कमाल है। मोदी मैजिक ने ही दोनों राज्यों के चुनावी इतिहास को पूरी तरह पलट दिया और जनता ने पाँच वर्ष से चल रही सरकार को ही दोबारा सत्ता पर बैठाने का जनादेश दिया।

नाइक के बाद नए नायक बनेंगे देवेन्द्र फडणवीस

सबसे पहले बात करते हैं महाराष्ट्र की, तो जनता ने यहाँ 44 वर्षों के बाद किसी मुख्यमंत्री को दोबारा मुख्यमंत्री बनने का जनादेश दिया है। गुजरात से अलग होकर पृथक महाराष्ट्र बनने के बाद के 59 वर्षों के इतिहास में एकमात्र कांग्रेस नेता वसंतराव नाइक ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने 11 वर्ष 77 दिनों तक लगातार काम किया है। इसका अर्थ यह हुआ कि नाइक ने 5-5 वर्षों का कार्यकाल 2 बार पूरा किया, जबकि तीसरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और कांग्रेस ने शंकरराव चवाण को मुख्यमंत्री बना दिया। महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चवाण से लेकर 17वें मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चवाण तक का इतिहास देखने से पता चलता है कि वसंतराव को छोड़ कर कोई भी मुख्यमंत्री अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। चौथे मुख्यमंत्री नाइक ने 5 दिसम्बर, 1963 से 20 फरवरी, 1975 तक लगातार मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। नाइक के बाद 13 मुख्यमंत्री सत्ता पर आए, परंतु कोई भी 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका। इस अस्थिरतापूर्ण इतिहास को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 ने पलट दिया है, क्योंकि जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत देकर 18वें मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। यदि फडणवीस अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हैं, तो वे वसंत नाइक के बाद ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री बनेंगे, जिनके नाम सबसे लम्बे शासन काल (10 वर्ष) का रिकॉर्ड दर्ज होगा। यह सत्य है कि महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के जनाधार में कमी आई है, जिसका मुख्य कारण एनसीपी प्रमुख शरद पवार का आक्रामक प्रचार अभियान रहा है। विधानसभा चुनाव 2014 में भाजपा (122) और शिवसेना (63) ने अलग चुनाव लड़ कर भी कुल 185 सीटें जीती थीं। इतना ही नहीं, भाजपा को 31.5 और शिवसेना को 19.80 यानी लगभग 50 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव 2019 में भाजपा-शिवसेना ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा। इसके बावजूद पवार की पावर के चलते भाजपा को 25.7 प्रतिशत मतों के साथ 105 और शिवसेना को 16.41 प्रतिशत मतों के साथ 56 सीटें मिलीं यानी 2014 की तुलना में भाजपा-शिवसेना के मतों और सीटों दोनों में गिरावट आई, परंतु गठबंधन को बहुमत के आँकड़े 145 से 16 सीटें अधिक यानी 161 सीटें मिली हैं यानी जनता ने स्पष्ट बहुमत से अधिक सीटें देकर फडणवीस सरकार पर मुहर लगाई है। यह संभव हो सका, क्योंकि एक तरफ मोदी मैजिक था, तो दूसरी तरफ फडणवीस सरकार की शुद्ध कामकाजी छवि थी।

मनोहरलाल खट्टर रचेंगे इतिहास

अब बात करते हैं हरियाणा की, जहाँ भाजपा को ‘अबकी बार-75 पार’ के लक्ष्य से बहुत कम सीटें मिली हैं, परंतु हरियाणा का इतिहास खंगालने से पता चलता है कि यहाँ भी कांग्रेस और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के कारण लगातार राजनीतिक अस्थिरता रही है। मनोहरलाल खट्टर हरियाणा के 10वें और ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो दोबारा सत्ता में वापसी करने जा रहे हैं। हरियाणा की जनता ने खट्टर से पहले हुए 9 मुख्यमंत्रियों में से किसी को भी दोबारा मुख्यमंत्री बनने लायक नहीं छोड़ा। हर चुनाव के बाद हरियाणा में मुख्यमंत्री बदल जाने की परम्परा रही है, परंतु विधानसभा चुनाव 2019 ने यह मिथक तोड़ दिया है। यह सत्य है कि जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत से 6 सीटें दूर रखा, परंतु राजनीतिक गणित से देखा जाए, तो टिकट न मिलने से नाराज़ होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे भाजपा के ही लोगों के कारण बहुमत नहीं मिल सका। एक तरफ कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपिन्दर सिंह हुड्डा और दूसरी तरफ विद्रोही। इन दोहरी चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता ने भाजपा की सीटों की संख्या 40 तक पहुँचाई। हुड्डा-विद्रोहियों की चुनौती, शाह की व्यस्तता और हरियाणा भाजपा की कम अनुभवी टीम के बावजूद भाजपा को यदि 40 सीटें मिलीं, तो इसके पीछे मोदी मैजिक का ही कमाल है। हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस के भगवत दयाल शर्मा से लेकर 9वें मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा तक किसी को भी जनता ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर नहीं बैठाया। यद्यपि कभी कांग्रेस के नेता रहे और बाद में हरियाणा विकास पार्टी (हविपा-HVP) का गठन करने वाले बंसीलाल के नाम सबसे लम्बा शासन करने का रिकॉर्ड है, परंतु वह भी लगातार शासन का नहीं है। इसी तरह कांग्रेस-आपातकाल विरोधी आंदोलन से उपजे जनता पार्टी के नेता और बाद में कांग्रेस में शामिल हो जाने वाले भजनलाल के नाम भी दूसरे सबसे दीर्घकालिक शासक का रिकॉर्ड है, परंतु वे भी लगातार सत्ता में नहीं रहे। उन्हें भी जनता ने चुनावों के दौरान कुर्सी से हटा दिया। दूसरी तरफ 2014 में नए-नए मुख्यमंत्री बने मनोहरलाल खट्टर ने अनुभवहीन टीम के साथ काम किया और बहुमत से कुछ दूर रह जाने के बावजूद दोबारा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तो यह घटना न केवल हरियाणा के एक मुख्यमंत्री को दूसरा मौका नहीं देने के रिकॉर्ड को तोड़ रही है, अपितु खट्टर यदि 5 वर्षों के कार्यकाल पूरा करेंगे, तो वे हरियाणा के ऐसे पहले मुख्यमंत्री बन जाएँगे, जो लगातार 10 वर्षों तक इस पद पर रहेंगे और बंसीलाल-भजनलाल के बाद ऐसे तीसरे मुख्यमंत्री कहलाएँगे, जिनके नाम सबसे लम्बे शासन का रिकॉर्ड दर्ज होगा।

You may have missed