देखिए PUBLIC के लिए कितनी फिक्रमंद है POLICE : भारत में पहली बार इस शहर में लगा सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस समारोह पर प्रतिबंध !

आधुनिक ‘हिंसात्कम-क्रूर जन्मोत्सव’ पर सूरत पुलिस ने चलाया डंडा

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ विशेष दिनों को विशेष रूप से उत्सव के रूप में मनाता है। इसमें मुख्य रूप से जन्म दिवस और विवाह की वर्षगाँठ को हर व्यक्ति जीवन में विशेष दिवस बनाना चाहता है और तरह-तरह के आयोजनों से आनंद लेने का प्रयास करता है, परंतु भारत का एक शहर ऐसा भी है, जहाँ अब सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस उत्सवों के आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसा करने वाला यह शहर भारत का पहला शहर बना है।

राजधानी दिल्ली से 1,156 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर वैसे तो देश-दुनिया में डायमंड सिटी और सिल्क सिटी जैसे नामों से विख्यात है, तो यहाँ के लोग ‘सूरती लाला’ जैसी उपाधि प्राप्त कर पूरे देश में अपने बेफिक्र-निश्चिंत और बिंदास्त जीवन को लेकर मशहूर हैं। जी हाँ, अब आप समझ ही गए होंगे कि हम गुजरात के दक्षिणी हिस्से में स्थित सूरत शहर की बात कर रहे हैं।

सामान्यत: जनमानस में पुलिस को लेकर ऐसी धारणा या ग्रंथि बैठ गई है कि लोग पुलिस से दूर ही रहना चाहते हैं। आम जीवन से लेकर फिल्मों तक में पुलिस की भ्रष्टाचारी, अत्याचारी और दुराचारी छवि प्रस्तुत की जाती है, परंतु कानून-व्यवस्था संभालने वाली वही पुलिस रोज-ब-रोज के असंख्य अपराधों की पड़ताल और अपराधियों की तलाश के बीच आम जनता की सुरक्षा को लेकर भी कितनी फिक्रमंद रहती है, यह सूरत पुलिस की ओर से जन्म दिवस उत्सवों पर रोक लगाने के उठाए गए कदम से प्रतिबिंबित होता है।

नहीं मनाया जा सकेगा सार्वजनिक स्थल पर जन्मोत्सव

आधुनिक जीवन शैली की तरफ तेजी से दौड़ते लोग जहाँ पहले कभी घरों या बहुत-बहुत तो होटलों में जाकर जन्म दिवस मना लेते थे, वहीं अब इन उत्सवों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और लोग सार्वजनिक स्थलों पर भी जन्म दिवस समारोहों का आयोजन करने लगे हैं। जन्म दिवस की खुशी में आम लोग तो अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा ताक पर रख देते हैं, परंतु जागृत सूरत पुलिस ने जन्म दिवस समारोहों को आज जिस तौर-तरीके से मनाया जा रहा है, उसके ख़तरों को नज़रअंदाज़ नहीं किया और आज यानी 14 मई, 2019 मंगलवार से शहर में बाग-बगीचों, बस रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (BRTS) कॉरिडोर और पुल (ब्रिज) सहित सभी सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस समारोह के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

आधुनिक अंदाज़ के ख़तरों ने विवश किया पुलिस को

सूरत शहर पुलिस आयुक्त सतीश कुमार शर्मा ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी कर शहर में सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस उत्सव मनाने पर यह प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। आपके मन में प्रश्न यह उठ रहा होगा कि अंततः सूरत पुलिस को लोगों के लिए उत्सव समान एक दिन यानी जन्म दिवस समारोह को सार्वजनिक स्थल पर आयोजित किए जाने में क्या आपत्ति थी ? इसका उत्तर अधिसूचना में दिया गया है। वास्तव में पहले लोग जन्म दिवस पर सामान्यत: केक काटते थे और नृत्य-भोजन आदि करते थे, परंतु जन्म दिवस को मनाने के आज के आधुनिक अंदाज़ ने पुलिस को यह कदम उठाने पर विवश कर दिया। यह बात आज के ज़माने के सभी लोग जानते हैं कि जो जन्म दिवस जन्म की तारीख पर मनाया जाता था, वह जन्म दिवस अब जन्म की तारीख शुरू होने के समय यानी रात्रि 12 बजे मनाया जाने लगा है। इसके अलावा जन्म दिवस समारोह में शामिल लोग विशेषकर आज के युवा वर्ग के लोग एक-दूसरे पर सैलो टेप चिपकाते हैं, केमिकल और अन्य फोम जबरन लगा देते हैं। सबसे बुरी दशा उसकी होती है, जिसका जन्म दिन होता है, परंतु इस खुशी में वह यह भूल जाता है कि इस तरह की चीज़ें घातक भी साबित हो सकती हैं। जन्म दिवस को मनाने की इस ‘हिंसात्मक-क्रूर’ पद्धति में किसी की मृत्यु तक हो सकती है। इस पर यदि ऐसा समारोह सार्वजनिक स्थल पर हो, तो आम जनता को विक्षेप और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचने की भी आशंका रहती है। यही कारण है कि पुलिस ने आम जनता के प्रति अपनी चिंता और फिक्रमंदी दिखाते हुए सार्वजनिक स्थलों पर जन्म दिवस समारोहों के आयोजन पर प्रतिबंध लगाया है।

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