कच्चा चिट्ठा : अगर अंबाणी बेईमान, तो सोनिया-मनमोहन महाबेईमान और राहुल बेईमानों के सरदार : जानिए कैसे ?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए लोकसभा चुनाव 2019 में अनिल अंबाणी एक ऐसा मंत्र बन गए हैं, जिसका जाप करते-करते राहुल गांधी हर मर्यादा की सीमा को लांघते जा रहे हैं। अनिल अंबाणी की आड़ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को धूमिल करने की राहुल की सनक एक न एक दिन उन्हें ऐसे कुचक्र-दुष्कचक्र-चक्रव्यूह में फँसा देगी, जहाँ से उनका निकलना असंभव हो जाएगा।

यह बात हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि राफेल डील में रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबाणी की एविएशन कंपनी को फ़ायदा कराने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगा रहे राहुल गांधी को भ्रम हो गया है कि वे एक दिन इस आरोप को सिद्ध कर देंगे और मोदी को जेल जाना पड़ेगा, परंतु राहुल कदाचित यह नहीं जानते कि उनकी यह नादान दीवानगी कहीं उन्हें ही कोर्ट-कचहरी के बाद कहीं जेल की हवा न खिलवा दे।

राहुल गांधी अनिल अंबाणी पर पिछले दो वर्षों से निशाना साधे हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने हाल ही में अनिल अंबाणी को क्रॉनी कैपिटलिस्ट (घोर पूंजीवादी) और बेईमान करार दिया, परंतु हम यहाँ जो डॉ. मनमोहन सिंह सरकार के 2004-2014 तक के कार्यकाल के जो आँकड़े रखने जा रहे हैं, उसे पढ़ने के बाद आप यह कहने को विवश हो जाएँगे कि यदि अनिल अंबाणी बेईमान हैं, तो तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और यूपीए सरकार के मुखिया तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह महाबेईमान हैं। इतना ही नहीं, इतिहास के पन्नों को पलटने की मेहनत नहीं करने वाले वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बेईमानों के सरदार की संज्ञा दी जा सकती है।

यूपीए सरकार ने 1 लाख करोड़ के कॉण्ट्रैक्ट दिए !

राहुल गांधी जिस अनिल अंबाणी को घोर पूंजीवादी और बेईमान बता रहे हैं, उसी अनिल अंबाणी के रिलायंस ग्रुप को यूपीए सरकार के शासन काल में एक लाख करोड़ रुपए के कॉण्ट्रैक्ट दिए गए थे। रिलायंस समूह ने एक वक्तव्य में राहुल के आरोपों का खंडन करते हुए कहा, ‘राहुल गांधी दुर्भावनापूर्ण ढंग से ग़लत सूचनाओं तथा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर मिथ्यारोप का अभियान चला रहे हैं। राहुल ने जो दावे किए हैं, उनका न तो कोई आधार हैऔर न ही उन्होंने मानहानि और अपमानसूचक अपने बयानों को जायज़ ठहराने के लिए कोई विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दस साल के शासन काल 2004-2014 के दौरान अनिल अंबाणी के रिलायंस ग्रुप को बिजली, दूरसंचार, सड़क, मेट्रो सहित ढाँचागत क्षेत्र की एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का ठेका मिला था।’ रिलायंस समूह ने राहुल को उन्हीं के शब्दों में उत्तर देते हुए उनसे यह स्पष्ट करने का आग्रह किया कि यूपीए सरकार ने आखिरकार दस साल तक कथित क्रॉनी कैपिटलिस्ट और बेईमान व्यवसायी की मदद क्यों ली ?

यूपीए सरकार ने अनिल को बनाया अंबाणी !

अनिल अंबाणी और डॉ. मनोहन सिंह की फाइल तसवीर (सौजन्य TIMESCONTENT.COM)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि मोदी सरकार चार-पाँच उद्योगपतियों के लिए ही काम कर रही है, परंतु राहुल यूपीए के 10 साल के शासन काल पर नज़र डालने की ज़हमत नहीं उठाना चाहते। एक रिपोर्ट के अनुसार 2004-2014 के दौरान यूपीए सरकार ने ऐसी कंपनियों को ठेके दिए, जिन्होंने आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। इतना ही नहीं, जो अनिल अंबाणी आज राहुल की राजनीतिक आँख में सबसे ज्यादा चुभते हैं, यूपीए सरकार ने कई प्रोजेक्ट्स सरकारी कंपनियों से छीन कर उसी अंबाणी के रिलायंस समूह को दिए थे। एक लाख करोड़ से अधिक के ये प्रोजेक्ट्स यूपीए शासन के आख़िरी सात वर्षों यानी 2007-2014 के दौरान दिए गए। यूपीए शासन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस की अनिल अंबाणी से ऐसी मिली भगत थी कि सरकारी कंपनियों रोड ट्रांसपोर्ट एण्ड हाईवेज़, टेलिकॉम, NHAI, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट ऑथोरिटी और DMRC जैसी सरकारी इकाइयों से प्रोजेक्ट्स छीन कर अनिल अंबाणी को दिए गए, जिसके कारण अंबाणी की इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी देश की सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी बन गई। इस दौरान 16,500 करोड़ के 12 प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए, जिससे अनिल अंबाणी की कंपनी R-INFRA देश में सबसे बड़ी प्राइवेट रोड डेवलपर बन गई। अनिल रिलायंस कम्युनिकेशन (RCOM) के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल्स की तमाम प्रक्रियाओं को हासिये पर कर दिया गया। अनिल की 6 क्पनियों रिलायंस कम्युनिकेशन्स, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस नैचरल रिसॉर्सेज़ लिमिटेड और रिलायंस मीडियावर्क्स पर भी यूपीए-मनोहन सरकार मेहरबान थी।

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