जानिए भारत ने दबाई कौन-सी नस, जिससे चिल्ला रहा है चीन ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 31 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही चीन की ओर से प्रतिक्रिया आ गई, जो कि अपेक्षित ही थी कि वह ऐसा कुछ करेगा। इसीलिये भारत को इससे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, बल्कि भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज करवा दी है। सवाल यह उठता है कि भारत ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने और प्रदेश का विभाजन करके लद्दाख और जम्मू कश्मीर नामक दो अलग-अलग केन्द्र शासित प्रदेश बनाने को अपना आंतरिक मामला बताया हुआ है, इसके बावजूद पाकिस्तान के बाद अब चीन के पेट में दर्द क्यों हो रहा है ? दरअसल भारत के इस कदम से चीन की एक ऐसी नस दब रही है, जिसकी वजह से वो दर्द से चीख पड़ता है। इस नस का नाम है अक्साई चिन और शक्सगाम घाटी।

जम्मू कश्मीर और लद्दाख में शामिल है अक्साई चिन

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को जब संसद में जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करने और प्रदेश का पुनर्गठन करके जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो पृथक केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का बिल पास कराया था, तो स्पष्ट शब्दों में इस बात का भी उल्लेख किया था कि जब वे जम्मू कश्मीर का नामोल्लेख करते हैं तो इसका अर्थ सम्पूर्ण प्रदेश समझना चाहिये जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK), उत्तरी कश्मीर यानी गिलगिट और बाल्टिस्तान तथा चीन अधिकृत अक्साई चिन और ट्रांस काराकोरम यानी शक्सगाम घाटी भी सम्मिलित है। जम्मू कश्मीर प्रदेश का विभाजन करके दो पृथक केन्द्र शासित प्रदेश गठित करने के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हस्ताक्षरित बिल 31 अक्टूबर 2019 गुरुवार से लागू हो गया है। यह बिल पास होने के 86वें दिन लागू हुआ है। इसी दिन देश के भूतपूर्व उप प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री और 465 रियासतों को मिला कर अखंड भारत का निर्माण करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की 144वीं जन्म जयंती भी है।

चीन ने जताई आपत्ति

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बृहस्पतिवार को चीन की राजधानी बीजिंग में मीडिया से कहा कि भारत ने एकपक्षीय तरीके से अपने घरेलू कानून को बदल दिया और प्रशासनिक विभाजन को लागू किया है। ऐसा करके भारत ने चीन की संप्रभुता को चुनौती दी है। उन्होंने भारत के इस कदम को गैरकानूनी और निरर्थक बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी भी तरीके से प्रभावी नहीं होगा, यह बदलाव चीन के वास्तविक नियंत्रण वाले क्षेत्र पर प्रभावी नहीं होगा।

भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें

चीन के इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि बीजिंग को इस विषय पर भारत के स्पष्ट रुख की जानकारी है। उन्हें भारत के रुख से अवगत कराया जा चुका है कि पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य का केन्द्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन का विषय पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। रवीश कुमार ने यह भी कहा कि भारत ऐसे विषयों में अन्य देशों से टिप्पणी की अपेक्षा नहीं करता है। इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा किया हुआ है। 1963 के कथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत पीओके के भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी देश के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचता है और अन्य देशों से भी ऐसी ही अपेक्षा रखता है कि दूसरे देश भी भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।

किसके पास है कितना कश्मीर ?

1947 में भारत और पाकिस्तान के बँटवारे के बाद दो ही महीने के भीतर जम्मू कश्मीर पर बुरी नज़र रखने वाले पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने के लिये कबाइलियों की घुसपैठ कराई थी, जिन्हें खदेड़ने के लिये जम्मू कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरी सिंह ने भारत से मदद की गुहार लगाई थी। मदद के बदले उन्होंने भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, जिसके बाद भारतीय सेना ने जम्मू कश्मीर से पाकिस्तानी घुसपैठिये कबाइलियों को खदेड़ना शुरू कर दिया था। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के युद्ध विराम की घोषणा किये जाने से लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कबाइलियों से खाली नहीं करवाया जा सका था, जिस पर अब पाकिस्तान का कब्जा है। जबकि जम्मू कश्मीर के 45 प्रतिशत हिस्से पर भारत का कब्जा है और लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा चीन के कब्जे में है। 1950 के दशक में चीन ने तिब्बत को अपने देश में मिलाने के बाद अक्साई चिन के लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर हिस्से को भी अपने नियंत्रण में ले लिया था। यह इलाका लद्दाख से जुड़ा हुआ है, इसमें अब चीन ने नेशनल हाईवे 219 बना लिया है, जो उसके पूर्वी प्रांत शिंजियांग से जुड़ता है। भारत इसे अवैध कब्जा करार देता है और इस हिस्से पर अपने अधिकार का दावा करता है। इसके अलावा शक्सगाम घाटी के 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके पर भी चीन का नियंत्रण है। काराकोरम पर्वतों से निकलने वाली शक्सगाम नदी के दोनों ओर शक्सगाम वादी फैली हुई है। इस पर 1948 में पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था और बाद में 1963 में चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के दौरान इस क्षेत्र को पाकिस्तान ने चीन के सुपुर्द कर दिया था। पाकिस्तान का मानना था कि इससे दोनों देशों के बीच दोस्ती बढ़ेगी और साथ ही यह दलील दी थी कि चूँकि यहाँ पर पहले से अंतरराष्ट्रीय सीमा निर्धारित नहीं थी, इसलिये पाकिस्तान को इसे चीन को सौंपने से कोई नुकसान नहीं हुआ। इसी इलाके को लेकर पाकिस्तान और चीन के बीच समझौता हुआ है, जिसके मुताबिक चीन और पाकिस्तान यहीं पर बने काराकोरम हाइवे से एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं, जो पश्चिमी कश्मीर के जरिये दोनों देशों को जोड़ता है। चीन पाकिस्तान के बीच अरबों डॉलर के इस आर्थिक गलियारे में मल्टीलेन एस्फाल्ट की सड़कें बनाई जा रही हैं, ताकि पूरे साल इनका इस्तेमाल किया जा सके।

भारत का रुख है कि अक्साई चिन और शक्सगाम आज भी जम्मू कश्मीर के अभिन्न अंग हैं। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सम्बंधों में कई बार तल्खी आ जाती है और कई बार सीमा पर झड़प की स्थिति भी पैदा हो जाती है। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कई बैठकें भी हो चुकी हैं, परंतु अभी तक मुद्दा सुलझ नहीं पाया है।

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