BIG BREAKING : अयोध्या में 491 साल पुराने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर 9 नवंबर को ‘सुप्रीम’ फैसला

*उत्तर प्रदेश में शनिवार को स्कूल-कॉलेज समेत सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। आखिरकार जिस घड़ी का पूरे देश को इंतज़ार था, वह घड़ी आ गई। अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की भूमि को लेकर 491 साल से चले आ रहे विवाद का 9 नवंबर-2019 शनिवार को देश की सबसे बड़ी अदालत फैसला सुनाएगी। फैसला सुबह 10.30 बजे सुनाया जाएगा। इससे पूर्व अयोध्या समेत पूरे उत्तर प्रदेश में चाक-चौबंद सुरक्षा प्रबंध किये गये हैं और स्कूल-कॉलेज समेत सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रखने के आदेश जारी किये गये हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से देश के सभी राज्यों को भी सतर्क रहने के कड़े निर्देश दिये गये हैं। फैसला दोनों पक्षकारों और उनके वकीलों की उपस्थिति में सुनाया जाएगा। जो खंडपीठ शनिवार को फैसला सुनाने वाली है उसका नेतृत्व मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं। पीठ में शामिल अन्य न्यायमूर्ति हैं जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डॉ. डी.वाय. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर।

फैसले को लेकर कड़े सुरक्षा प्रबंध

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनज़र केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट रहने की हिदायत दी है और केन्द्र शासित प्रदेशों में भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये हैं। उधर अयोध्या में धारा 144 लागू की गई है। साथ ही अयोध्या में कानून व्यवस्था की रखवाली के लिये अर्ध सैनिक बलों के 4,000 जवानों को तैनात किया गया है। प्रत्येक राज्य में भी सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये हैं और उनसे खास तौर से कहा गया है कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी राज्य में कोई अप्रिय घटना घटित नहीं होनी चाहिये। गुजरात में भी अहमदाबाद सहित सभी शहरों और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ही अपने मंत्रियों और पार्टी नेताओं के लिये खास हिदायत जारी की थी कि हर कोई बड़बोला नेता अयोध्या मामले पर बयान देने से बचे। शुक्रवार सुबह चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया रंजन गोगोई ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाकर उनसे सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी ली थी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिये शनिवार का दिन सुनिश्चित किया है।

ये न्यायमूर्ति सुनाएँगे फैसला

इससे पहले 6 अगस्त से अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक सुनवाई शुरू की थी। यह सुनवाई 40 दिन चली और 16 अक्टूबर को पूरी हुई थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली 5 सदस्यीय खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पीठ में जस्टिस एस.ए. बोबड़े, जस्टिस डॉ. डी.वाय. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं। यही खंडपीठ शनिवार को फैसला सुनाने वाली है। फैसला दोनों पक्षकारों और उनके वकीलों की उपस्थिति में सुनाया जाएगा। चूँकि मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई आगामी 17 नवंबर को सेवा निवृत्त हो रहे हैं, इसलिये उम्मीद की जा रही थी कि उससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। अपेक्षा के अनुरूप फैसले का वो समय आ गया है, जिसका पूरे देश को बेसब्री से इंतज़ार था। इस फैसले के साथ ही मंदिर-मस्जिद को लेकर देश के दो प्रमुख समुदायों में चल रहे विवाद का भी अंत आने की उम्मीद की जा रही है। दोनों समुदायों के वरिष्ठ धर्म गुरुओं ने भी अपने – अपने समुदाय से शांति बनाये रखने की अपील की है और सर्वोच्च अदालत का फैसला जिस किसी के भी पक्ष में या विरोध में आये उसे लेकर किसी भी प्रकार से किसी भी समुदाय को उत्तेजित नहीं होने के लिये कहा है। क्योंकि हिंसा किसी भी समुदाय की ओर से शुरू की जाए, वह दोनों ही समुदायों के लिये और विशेष कर देश के लिये हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिये युवाPRESS भी सभी से शांतिपूर्ण ढंग से फैसले को स्वीकार करने की अपील करता है, क्योंकि यही देश हित में है।

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