विचित्र, किंतु कटु सत्य : एक दिन ऐसा आएगा, जब नहीं रहेंगे ‘प्रिय’ काका-मौसी और ‘चुहलबाज़’ देवर-साली !!!

* विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 11 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। शीर्षक पढ़ कर आश्चर्य हुआ न ? क्या करें ? यही है भविष्य की सच्चाई। वास्तव में कुछ दशकों बाद हमारे देश ही नहीं, अपितु समग्र विश्व में कुछ मानवीय संबंध सदैव के लिए समाप्त हो जाएँगे। हम पूरे विश्व की बात न करते हुए केवल हमारे देश और उसमें भी विशेषकर हिन्दू धर्मावलम्बियों की बात करें, तो यह निश्चित है कि भविष्य में हर व्यक्ति काका और मौसी जैसे संबंधों को गँवा चुका होगा, तो चुहलबाज़ी करने के लिए भाभी को नहीं मिलेगा देवर और बहनोई को नहीं मिलेगी साली। वैसे अंग्रेजी में तो भाई के भाई, बहन और बहन के भाई, बहन सहित कई संबंधों के लिए दो ही शब्द है अंकल और आंटी, परंतु हमारे भारतीय समाज में ऐसा नहीं है। यहाँ तो हर संबंध के लिए अलग-अलग नाम हैं, जैसे काका, मौसी, बुआ, मामा, साला-साली, बहनोई

आप सोच रहे होंगे हम ये क्या ‘बके’ जा रहे हैं ? क्या वास्तव में एक दिन ऐसा भी आएगा, जब हम इन चार अमूल्य संबंधों को सदा के लिए खो देंगे ? इस कल्पना को थोड़ा और विस्तार दें, तो हम काका के साथ ही काकी व ककेरे भाई-बहन और मौसी के साथ ही मौसा व मौसेरे भाई-बहन जैसे संबंधों से भी सदा के लिए वंचित हो जाएँगे। इससे भी बड़ी एक बात यह होगी भविष्य में कि एक भाई का नहीं होगा कोई दूसरा भाई और एक बहन की नहीं होगी कोई दूसरी बहन।

चलिए, अब अधिक रहस्य न बनाते हुए आपको बता ही देते हैं कि हम संबंधों के इस पुष्पगुच्छ में होने वाले भविष्य के बिखराव की आज क्यों चर्चा कर रहे हैं ? वास्तव में आज गुरुवार 11 जुलाई, 2019 को विश्व जनसंख्या दिवस (WORLD POPULATION DAY) है। भारत सहित दुनिया भर के सभी प्रकार के मीडिया में विश्व जनसंख्या दिवस (डब्ल्यूपीडी-WPD) के उपलक्ष्य में बढ़ती जनसंख्या को लेकर चिंता, उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं और भविष्य के संभावित संकटों पर चर्चा हो रही है। हम यह भी पढ़ चुके हैं कि 2050 तक भारत जनसंख्या के मामले में चीन को पछाड़ कर विश्व का नंबर 1 देश बन जाएगा।

धैर्य… धैर्य… धैर्य… हमारे शीर्षक का बढ़ती जनसंख्या से कोई लेना-देना नहीं है। हम तो यहाँ बढ़ती जनसंख्या की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों के दुष्प्रभावों यानी SIDE EFFECTS की बात कर रहे हैं। अभी हाल ही में हमने संसद में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर भी एक समाचार प्रकाशित किया था, जिसके अनुसार भारत में जनसंख्या वृद्धि दर में लगातार गिरावट आ रही है। इसमें भी पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सबसे आगे हैं। देश की जनसंख्या का घटना विकास की दृष्टि से शुभ संकेत है, परंतु इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि जनसंख्या वृद्धि में गिरावट के साथ ही मृत्यु दर में कमी के चलते जनसंख्या में उम्रदराज़ यानी अधेड़ (40 वर्ष से अधिक आयु) लोगों की संख्या बढ़ती जाएगी और जन्म दर में गिरावट के कारण 0-19 वर्ष के नवयुवकों की संख्या घटती जाएगी।

ख़ैर, इस चिंता का निवारण क्या हो सकता है, यह सरकारों को देखना है। हम तो सामाजिक संबंधों पर आसन्न संकट की बात करना चाहते हैं। भारत के दृष्टिकोण से देखें, तो जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट में मुख्य भूमिका बहुसंख्यक हिन्दू धर्म के लोगों की है। अल्पसंख्यक समुदाय में अभी भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर धार्मिक रुढ़ियाँ व्याप्त हैं। दूसरी तरफ हिन्दू समाज ने ‘हम दो-हमारे दो’ जैसे जनसंख्या नियंत्रण के अनेक व अधिकतम् उपायों को अपनाया है और कई सामाजिक रुढ़ियों के बावजूद अब एक आम हिन्दू युगल अधिकतम् दो ही संतानों को जन्म देता है। इसमें भी युगल का प्रयास यह होता है कि संतान में एक लड़का और एक लड़की हो।

क्या-क्या होगा ‘एक लड़का-एक लड़की’ के कारण ?

अब आपको ‘हम दो-हमारे दो’ तथा ‘एक लड़का-एक लड़की’ के सूत्र के साथ जनसंख्या नियंत्रण में अधिकतम् भागीदारी दर्ज कराने वाले हिन्दू समाज पर इस सूत्र के कारण क्या-क्या दुष्प्रभाव पड़ेंगे ? सबसे पहला और बड़ा दुष्प्रभाव तो यह पड़ेगा कि जिस युगल की संतान में एक लड़का और लड़की होंगे, तो स्पष्ट है कि उस लड़के की बहन तो होगी, परंतु कोई भाई नहीं होगा। इसी तरह लड़की का भाई तो होगा, परंतु उसकी कोई बहन नहीं होगी। इसे थोड़ा और विस्तार दें, तो युगल के पुत्र की संतान का कोई काका नहीं होगा, क्योंकि पुत्र का कोई भाई नहीं है। इसी तरह युगल की पुत्री की संतान की कोई मौसी नहीं होगी, क्योंकि पुत्री की कोई बहन नहीं है। इस तरह जिस युगल की संतानों में एक लड़का-एक लड़की है, उस घर में भविष्य में काका और मौसी जैसे संबंध विलुप्त हो जाएँगे। इसके साथ ही काकी, ककेरे भाई-बहन, मौसा और मौसेरे भाई-बहन जैसे संबंधों का जन्म ही नहीं हो सकेगा। इसी पर थोड़ा और मनन-चिंतन करें, तो ‘एक लड़का-एक लड़की’ वाले घर में लड़का जिस लड़की से विवाह करेगा, उस लड़की का कोई देवर नहीं होगा, क्योंकि लड़की के पति का कोई भाई नहीं है। इसी प्रकार ‘एक लड़का-एक लड़की’ वाले घर में लड़की जिस लड़के से विवाह करेगी, उस लड़के की कोई साली नहीं होगी, क्योंकि उसकी पत्नी की कोई बहन नहीं है। इस प्रकार भविष्य में चुहलबाजी के लिए बने देवर-भाभी और जीजा-साली का रिश्ता भी डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाएगा।

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