VIDEO : अमित शाह का SPG मास्टरस्ट्रोक, मोदी को मिल गया 2029 तक सुरक्षा कवच

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (AMIT SHAH) ने बुधवार को लोकसभा (LOK SABHA) में विशेष सुरक्षा दल यानी SPECIAL PROTECTION GROUP (SPG)  संशोधन बिल (AMENDMENT BILL) पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पास कर दिया गया। इस बिल में शाह ने जो संशोधन पेश किये हैं, उसके अनुसार एसपीजी सुरक्षा अब केवल वर्तमान प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री व उनके परिवारजनों को 5 वर्ष तक ही उपलब्ध कराई जाएगी। इस संशोधन के माध्यम से शाह ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। अर्थात् पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और उनके परिवारजनों तथा गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा वापस लेने के केन्द्र सरकार के निर्णय को उचित ठहराया है, वहीं दूसरी ओर पीएम नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2029 तक एसपीजी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर दी है। शाह का मानना है कि इस संशोधन से एसपीजी सुरक्षा पर होने वाले खर्च में भी भारी कटौती होगी।

इस प्रकार देखा जाए तो एसपीजी सुरक्षा में तीन महत्वपूर्ण संशोधन किये गये हैं। पहला ये कि अब एसपीजी सुरक्षा पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवारजनों को केवल पाँच वर्ष के लिये ही मिलेगी। पहले इस सुरक्षा का कार्यकाल एक वर्ष का था और हर वर्ष सुरक्षा के कारणों की समीक्षा करके सुरक्षा का कार्यकाल बढ़ाने या घटाने का फैसला किया जाता था, परंतु अब संशोधन के बाद समीक्षा का प्रावधान नहीं होगा। 5 साल पूरे होने के बाद एसपीजी सुरक्षा हटा कर आवश्यकतानुसार अन्य श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी। अन्य कैटेगरी में ज़ेड प्लस, जेड, वाई और एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है। इस संशोधन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और उनके परिवार तथा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का परिवार यानी गांधी परिवार (सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा) एसपीजी सुरक्षा के हकदार नहीं रहेंगे। उनकी यह सुरक्षा पहले ही वापस ली जा चुकी है। इस प्रकार अब केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही यह सुरक्षा ले रहे हैं और पीएम पद से हटने के बाद भी 5 वर्ष तक वे एसपीजी सुरक्षा के हकदार होंगे, इसलिये पीएम मोदी की एसपीजी सुरक्षा वर्ष 2029 तक सुनिश्चित हो गई है। एसपीजी में 3,000 जाँबाज कमांडो हैं और इस पर वार्षिक सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 2019-20 के वार्षिक बजट में मोदी सरकार ने एसपीजी सुरक्षा बजट 535 करोड़ रुपये आबंटित किया है। इस हिसाब से देखा जाए तो इस पर प्रति दिन डेढ़ करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च किया जाता है।

क्या है एसपीजी सुरक्षा कानून ?

भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हुई हत्या से पहले 1981 तक देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा दिल्ली पुलिस (DELHI POLICE) के एक विशेष अंग के जिम्मे थी। 1981 के बाद इन्टेलिजेंस ब्यूरो (INTELLIGENCE BUREAU) ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिये एक विशेष कार्य बल का गठन किया था। हालाँकि इस सुरक्षा कवर के बावजूद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। इसलिये प्रधानमंत्री सहित कुछ महत्वपूर्ण वीवीआईपी (VVIP) लोगों की अंग रक्षा के लिये एक विशेष सुरक्षा बल की आवश्यकता महसूस की गई। तत्पश्चात् स्व. इंदिरा गांधी के बेटे और उनकी मृत्यु के बाद देश के प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में 1988 में संसद में विशेष सुरक्षा बल यानी (SPECIAL PROTECTION GROUP-SPG) अधिनियम पास करवा कर इसका गठन किया गया था। प्रारंभ में यह अधिनियम प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रख कर ही पास किया गया था, बाद में संशोधन करके इसके दायरे में पूर्व प्रधानमंत्री व उनके परिवारों को भी ला दिया गया था। शाह ने संशोधन करके इसका दायरा एक बार फिर सीमित करने का प्रयास किया है। यह केन्द्र सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा बल है, जो देश के प्रधानमंत्री, उनके परिवार, पूर्व प्रधानमंत्री गण तथा उनके परिवारजन और पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है। यह बल सीधे-सीधे केन्द्र सरकार के मंत्रिमंडलीय सचिवालय के अधीन होता है और इन्टेलिजेंस ब्यूरो के अंतर्गत उसके एक विभाग के रूप में काम करता है।

एसपीजी प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिये चौबीसों घण्टे अलर्ट रहता है। यह सुरक्षा बल देश का सबसे पेशेवर और आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है। एसपीजी के जवान प्रधानमंत्री को उनके निवास स्थान, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा हर उस स्थान पर, जहाँ प्रधानमंत्री रहते हैं या जाते हैं, उसकी कड़ी सुरक्षा जाँच करते हैं। उनके विमान और वाहनों तक की कड़ी जाँच की जाती है। इसके लिये इन जवानों को सुरक्षा, अंगरक्षा, अनुरक्षण और अनुरक्षणिक जाँच के लिये सविशेष और पेशेवर परीक्षण उपकरण तथा हथियार उपलब्ध कराये जाते हैं। यह देश के अंदर तथा विदेश दौरों पर भी प्रधानमंत्री को एक पल के लिये भी अकेला नहीं छोड़ते हैं और उन्हें चारों ओर से घेरे रह कर उनकी अंगरक्षा करते हैं।

गत अगस्त महीने में केन्द्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और इसी महीने गांधी परिवार के तीनों सदस्यों की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली है। अब उन्हें एसपीजी सुरक्षा के स्थान पर ज़ेड प्लस (Z+) सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। यह सुरक्षा केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल (CRPF) की विशेष वीआईपी सुरक्षा करने वाली टीम की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। इस कैटेगरी में प्रत्येक व्यक्ति के साथ सीआरपीएफ के 200 कमांडो सुरक्षा में तैनात होते हैं, इस प्रकार गांधी परिवार के तीन सदस्यों की सुरक्षा के लिये 3 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

तीनों कंपनियों के मिला कर 600 कमांडो गांधी परिवार को चौबीसों घण्टे सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। चूँकि सीआरपीएफ के पास बुलेटप्रूफ गाड़ियाँ नहीं हैं, इसलिये उन्हें (डॉ. मनमोहन सिंह तथा गांधी परिवार के तीनों सदस्यों को) यह गाड़ियाँ एसपीजी की ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिये सीआरपीएफ ने विशेष रूप से केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिख कर इसकी अनुमति प्राप्त की है।

SPG अधिनियम 1988 के प्रावधान

एसपीजी अधिनियम 1988 में प्रधानमंत्री के अतिरिक्त अन्य सभी महत्वपूर्ण वीवीआईपी को जिन्हें एसपीजी सुरक्षा प्रदान की गई हो, उन्हें एक वर्ष के लिये एसपीजी सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। साथ ही केन्द्र सरकार विभिन्न सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ मिल कर हर तीन महीने में एसपीजी सुरक्षा की समीक्षा करती है और आवश्यकतानुसार एक वर्ष की सुरक्षा का कार्यकाल बढ़ाती है।

1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद एसपीजी अधिनियम में पहला संशोधन किया गया था और सभी पूर्व प्रधानमंत्री एवं उनके परिवारजनों के लिये एक वर्ष की सुरक्षा का कार्यकाल बढ़ा कर 10 वर्ष कर दिया गया था। हालाँकि 1999 में केन्द्र में आई अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 2003 में फिर एक बार एसपीजी की कार्य प्रणाली की समीक्षा की और उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों पी. वी. नरसिम्हा राव, एच. डी. देवेगौड़ा तथा आई. के. गुजराल की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी। इसी साल वाजपेयी सरकार ने एक बार फिर से एसपीजी अधिनियम की समीक्षा की थी और उसमें संशोधन करके पूर्व प्रधानमंत्रियों को दी जाने वाली एसपीजी सुरक्षा का कार्यकाल 10 वर्ष से घटा कर पुनः एक वर्ष कर दिया था तथा समीक्षा के आधार पर वार्षिक सुरक्षा कवर बढ़ाने का प्रावधान किया था। तब से ही यह प्रणाली चली आ रही है। इसी प्रावधान की बदौलत 2004 में प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद 2018 में उनके निधन तक वाजपेयी को एसपीजी सुरक्षा मिलती रही।

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