सुप्रीम कोर्ट की तूणीर से गुरुवार को निकलेंगे ये और दो बाण, किसको करेंगे ‘घायल’ ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। देश की सबसे बड़ी अदालत अयोध्या मामले में अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुनाने के बाद अब दो और बड़े मामलों का गुरुवार सुबह 10.30 बजे निर्णय सुनाने जा रही है। 17 नवंबर को सेवा निवृत्त होने वाले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई गुरुवार को राफेल विमान सौदे में कथित भ्रष्टाचार को लेकर दायर याचिकाओं पर तथा केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाएँगे। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पहले निर्णय को लेकर काफी हलचल देखने को मिल रही है और बड़ा सवाल भी उठ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की तूणीर से निकलने वाले यह दो नये बाण किसको ‘घायल’ करने वाले हैं ?

क्या हैं राफेल डील से जुड़ी याचिकाएँ ?

सुप्रीम कोर्ट में फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल खरीदने के लिये की गई डील पर सवाल उठाये गये हैं। इनमें आरोप लगाया गया है कि विमानों की ज्यादा कीमत चुकाई गई है और गलत तरीके से ऑफसेट पार्टनर चुना गया है। इसलिये डील को रद्द किया जाए। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने फ्रांस की लड़ाकू विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया है। इसमें एक विमान की कीमत 1,646 करोड़ रुपये सुनिश्चित की गई है और 36 विमानों के लिये 59,256 करोड़ रुपये चुकाने का सौदा हुआ है। इस सौदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पहली जनहित याचिका एडवोकेट मनोहरलाल शर्मा ने दायर की है। इसके बाद एक अन्य वकील विनीत ढांडा ने याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस सौदे की जांच कराने का अनुरोध किया था। इस सौदे को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और इसके बाद दो पूर्व मंत्रियों भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी के साथ एडवोकेट प्रशांत भूषण ने एक अलग याचिका दायर की जिसमें अदालत से अनुरोध किया गया है कि विमान खरीद सौदे में कथित अनियमितताओं के लिये केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।

इस मुद्दे पर सरकार के बचाव में पक्ष रखने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि 2016 में विमान की कीमत मुद्रा विनिमय दर के आधार पर 670 करोड़ रुपये थी, परंतु विमान में लगे साजो-सामान की कीमत का खुलासा करने से देश के दुश्मनों और प्रतिद्वंद्वियों को फायदा पहुँच सकता है, इसलिये उसका खुलासा नहीं किया जा सकता। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तीन सदस्यीय खंडपीठ ने वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा की है और वायुसेना में इन विमानों की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्राप्त की है। खंडपीठ में गोगोई के नेतृत्व में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ भी हैं, जो गुरुवार को राफेल पर अदालत का निर्णय सुनाएगी। सवाल यह उठता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केन्द्र सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करेगा या विमान सौदे में आरोप लगाने वालों को करारा झटका देगा ? उल्लेखनीय है कि एक राफेल विमान भारत आ चुका है, जिसकी दशहरे पर शस्त्र पूजा के दौरान लंदन जाकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूजा की थी।

क्या है सबरीमाला मंदिर विवाद ?

यह विवाद 13 साल पुराना है और पहली बार 2006 में तब सामने आया जब मंदिर के मुख्य ज्योतिषी परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा था कि मंदिर में स्थापित भगवान अयप्पा की शक्ति क्षीण होती जा रही है और वे इसलिये नाराज़ हैं क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया था। इसके बाद कन्नड़ अभिनेता प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ था और उनके कारण अयप्पा नाराज़ हुए हैं। उन्होंने इसके लिये प्रायश्चित करने की बात भी कही थी। उन्होंने कहा था कि 1987 में जब वे अपने पति के साथ दर्शन के लिये मंदिर में गई थीं तब भीड़ में धक्का लगने से वह गर्भगृह में पहुँच गई थीं और भगवान अयप्पा के चरणों में जा गिरी थीं। इसी दौरान उन्होंने अयप्पा को छू लिया था और वहाँ उपस्थित पुजारी ने उन्हें फूल भी दिये थे। जयमाला के इस दावे के बाद केरल में हंगामा खड़ा हो गया था। इसी हंगामे से देश भर में इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी होने का मुद्दा उछला। 2006 में ही राज्य के यंग लॉयर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के प्रवेश निषेध के विरुद्ध याचिका दायर की। इसके बाद यह मामला 10 साल तक लटका रहा। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ट्रस्ट त्रावणकोर देवासम बोर्ड से महिलाओं को प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता है ? इस बारे में जवाब माँगा था। जवाब में बोर्ड ने कहा था कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और इस वजह से मंदिर में केवल ऐसी बालिकाएँ या बुजुर्ग महिलाओं को ही प्रवेश दिया जाता है, जिनका मासिक धर्म शुरू न हुआ हो या जिनका मासिक धर्म आना बंद हो गया हो। 7 नवंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिये जाने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय संविधान द्वारा महिलाओं को प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है, इसलिये यह मामला संवैधानिक पीठ को भेजा जाना चाहिये। इसी साल इस मामले को संवैधानिक पीठ को सौंपा गया था। जुलाई 2018 में पाँच जजों की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की थी। 28 सितंबर 2018 को सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाते हुए सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। अदालत के इस फैसले के खिलाफ 64 पुनर्विचार याचिकाएँ दायर हुई हैं, जिन पर गुरुवार को सीजेआई गोगोई के नेतृत्व वाली बेंच निर्णय सुनाने वाली है।

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