सर्वमंगल सावधान ! राफेल, सबरीमाला, अयोध्या और CJI पर आने वाले हैं ‘सु्प्रीम’ फ़ैसले

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 2 नवम्बर, 2019 (युवाPRESS)। वैसे तो ‘सर्वमंगल सावधान’ एक बॉलीवुड फिल्म का नाम है, परंतु इसके निहितार्थ यही निकलते हैं कि सब कुछ मंगल हो और हम भी यही कामना करते हैं कि देश के सर्वोच्च न्यायालय से आगामी 4 नवंबर से 17 नवंबर के दौरान सब मंगलकारी फ़ैसले आएँ। किसी का भी अनिष्ट न हो। सबको सुप्रीम कोर्ट (SC) के निर्णयों पर संतोष हो और देश का हर नागरिक एससी के किसी भी मसले पर दिए गए किसी भी निर्णय का नतमस्तक होकर स्वागत करें।

वास्तव में सुप्रीम कोर्ट आगामी 4 नवंबर से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने निर्णय सुनाने वाला है। दीपावली अवकाश पूर्ण होने के साथ ही मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट 4 नवंबर से अपना कामकाज शुरू कर देगा। बताया जाता है कि सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने से पहले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय की मुहर लगाएँगे, जिनमें सबसे संवेदनशील मुद्दा है अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद। इसके अतिरिक्त राफेल ख़रीद-फरोख्त, सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश, सीजेआई को सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) की सीमा में लाने जासे मुद्दों पर भी निर्णय आ सकते हैं।

सबसे पहले बात संवेदनशील अयोध्या मुद्दे की ही करें, तो इस समग्र विवाद पर 40 दिन की सुनवाई पूरी हो चुकी है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ को अब अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद पर निर्णय देना है। 1858 से देश के सामाजिक-धार्मिक मामलों के महत्वपूर्ण केन्द्र रहे इस विवाद को लेकर 1885 से अदालती मुकदमा चल रहा है। सीजेआई गोगोई चाहते हैं कि वे सेवानिवृत्ति से पहले इस पर निर्णय देकर जाएँ। यही कारण है कि 17 नवंबर से पहले अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से कोई निर्णय आने की पूरी संभावना है। इसके अलावा सबरीमाला अयप्पा मंदिर में सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की समीक्षा पर भी फ़ैसला आने वाला है। राफेल सौदे को लेकर सरकार को दी गई क्लीन चिट के विरुद्ध दायर याचिका और सीजेआई को आरटीआई के दायरे में लाने की मांग वाली याचिका पर भी फ़ैसला आने की उम्मीद की जा रही है।

फैसले को लेकर अटकलें

अयोध्या मामले को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि पांच न्यायाधीशों की बेंच एक सर्वसम्मत फैसला किस तरह दे पाएगी। इस तरह के मुद्दे पर, जिसने हिंदू और मुस्लिमों को विभाजित किया, एकमत होने का स्वागत किया जाएगा क्योंकि यह किसी भी तरह की अस्पष्टता को दूर करेगा जो 4-1 या 3-2 (5 जजों के बीच) के फैसले के कारण हो सकती है।

1934 में भी क्षतिग्रस्त किए गए थे गुंबद

साल 1934 में अयोध्या में एक सांप्रदायिक दंगे ने बाबरी मस्जिद के तीन गुंबदों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके बाद शहर में रहने वाले हिंदुओं पर जुर्माने से अंग्रेजों ने इसका पुनर्निर्माण कराया था। 22 दिसंबर, 1949 की आधी रात को रामलला मूर्ति को केंद्रीय गुंबद में रखने के बाद विवादित ढांचे पर मुकदमेबाजी साल 1950 में शुरू हुई। हिंदू भक्त गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में एक मुकदमा दायर किया, जिसमें गुंबद में ही रामलला की पूजा करने का अधिकार मांगा गया।

रामलला ने भी दायर किया मुकदमा

निर्मोही अखाड़े ने रामलला के जन्मस्थान पर पूजा करने के अधिकारों को लेकर 1959 में मुकदमा दायर किया जिसके दो साल बाद 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी मुकदमा दायर कर दिया। फिर रामलला की ओर से 1989 में जन्मभूमि पर मालिकाना हक का दावा करने वाला मुकदमा हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश ने उनका निकट मित्र बनकर दाखिल किया था जो मस्जिद को गिराने से तीन साल पहले किया था।

सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का मामला

चीफ जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 6 फरवरी को 65 याचिकाओं पर अपने फैसले को सुरक्षित रखा था, जिसमें न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले की समीक्षा करने संबंधित 57 याचिकाएं शामिल हैं। कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी जिस पर याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि चूंकि सबरीमाला में भगवान अयप्पा एक ब्रह्मचारी थे, इसलिए अदालत को 10-50 साल के मासिक धर्म में महिलाओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

RTI के तहत CJI ऑफिस पर भी फैसला

सीजेआई ऑफिस को आरटीआई के तहत लाने की अनुमति देने पर गोगोई की अध्यक्षता वाली एक अन्य पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। वहीं, फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद संबंधित मामले में एनडीए सरकार को क्लीन चिट पिछले साल दी गई, लेकिन इस फैसले को चुनौती देते हुए समीक्षा याचिका दायर की गईं जिस पर सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच के निर्णय का इंतजार है।

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