राफेल डील : मोदी सरकार को क्लीन चिट, शेर की दहाड़ नहीं, शोर सिद्ध हुए राहुल के आरोप

*राहुल गांधी का ‘राफेल’ तीसरे परीक्षण में भी क्रैश

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 14 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। सुप्रीम कोर्ट की तूणीर से गुरुवार को निकले दो बाणों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को घायल कर दिया है। बुधवार को ही युवाPRESS ने लिखा था कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की तूणीर से दो बाण निकलने वाले हैं, जो किसे घायल करेंगे, इसका पता गुरुवार को ही चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आज जो दो बड़े निर्णय सुनाए, उन दोनों ही बाणों ने सीधे-सीधे राहुल गांधी को निशाना बनाया और उन्हें घायल कर दिया। यह बात हम इसलिये कह रहे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने लड़ाकू विमान राफेल के सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उसकी न्यायिक जाँच कराने की माँग करने वाली पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया है और ऐसा करके एक ओर सुप्रीम अदालत ने केन्द्र की मोदी सरकार को क्लीन चिट दी, वहीं दूसरी ओर इस मामले की जाँच कराने की कोई जरूरत नहीं है, कह कर राहुल गांधी को करारा झटका दिया। इसके अलावा राफेल से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लोक सभा चुनाव के दौरान मोदी सरकार के विरुद्ध इस्तेमाल करने को लेकर भी राहुल गांधी के विरुद्ध दायर की गई मानहानि की याचिका में भी राहुल गांधी को झटका लगा है। राहुल गांधी ने लिखित माफी माँगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार तो कर लिया, साथ ही कहा कि राजनीतिक मामलों में कोर्ट को नहीं घसीटा जाना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अपने आप में राहुल गांधी जैसे नेताओं के लिये चेतावनी स्वरूप है, जिन्होंने राफेल को लेकर राजनीति की और बाद में सुप्रीम कोर्ट के बयान का भी राजनीतिक उपयोग किया था।

राहुल गांधी का ‘राफेल’ तीसरे परीक्षण में भी क्रैश

इस प्रकार देखा जाए तो राहुल गांधी का ‘राफेल’ लगातार तीसरे परीक्षण में भी क्रैश हो गया। पहला परीक्षण तब क्रैश हुआ था, जब पिछले साल 14 दिसंबर-2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील में भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच कराने की माँग करने वाली एडवोकेट प्रशांत भूषण, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी आदि की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद दूसरा राहुल गांधी के राफेल का दूसरा परीक्षण तब नाकाम हो गया जब वे इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में राफेल को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का नारा लेकर निकले, परंतु देश की जनता ने उनके राफेल को क्रैश कर दिया और 2014 से भी अधिक बहुमत के साथ मोदी सरकार को क्लीन चिट दी। अब पुनर्विचार याचिका के रूप में राफेल तीसरे परीक्षण में भी क्रैश हो गया।

दरअसल मोदी सरकार ने फ्रांस की लड़ाकू विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन से राफेल नामक 36 लड़ाकू विमान खरीदने की डील की है, जिसमें से एक विमान की डिलीवरी भारत को मिल भी गई है। लोकसभा चुनाव से पूर्व और चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और मोदी सरकार के विरुद्ध ‘चौकीदार चोर है’ का नारा बुलंद किया था।

राहुल ने सुप्रीम कोर्ट से लिखित में माँगी माफी

राफेल डील की जाँच कराने की माँग कराने वाली याचिकाएँ खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने राफेल डील के लीक हुए दस्तावेजों को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर लोकसभा चुनाव के पहले मतदान से एक दिन पहले 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका सुनवाई के लिये स्वीकार कर ली, तो राहुल गांधी ने उन्माद में आकर राजनीतिक बयान दे दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि चौकीदार चोर है। भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने इस बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और अदालत से राहुल गांधी पर अदालत की अवमानना और मानहानि का मुकदमा चलाने की गुहार लगाई। इस पर राहुल गांधी को अपने उन्मादी बयान के लिये अदालत से लिखित माफी माँगनी पड़ी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी लेखी की इस याचिका का भी निपटारा कर दिया और राहुल गांधी के माफीनामे को यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि अब आगे से राजनीति में सुप्रीम कोर्ट को घसीटने से बचना होगा।

You may have missed