ऐसा भी होता है : कहीं एक क्लास में ठूँस-ठूँस कर भरे जाते हैं, तो कहीं एक विद्यार्थी के लिए खोला गया बंद पड़ा 76 साल पुराना स्कूल !

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 20 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में जहाँ शिक्षार्थियों की संख्या के आगे शिक्षा संस्थान कम हैं, वहाँ क्या कोई सरकार एक विद्यार्थी के लिए पूरा स्कूल खोल सकती है ? शिक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण-निजीकरण की अंधी दौड़ के बीच निजी शिक्षा संस्थानों में ऊँची फीस की कमाई के लिए क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है, तो निर्धन विद्यार्थियों की बड़ी तादाद सरकारों के लिए सिर दर्द सिद्ध होती है। यही कारण है कि कई सरकारी स्कूल में एक-एक क्लास में क्षमता से अधिक ठूँस-ठूँस कर विद्यार्थियों को भरा जाता है। ठीक इसके विपरीत तमिलनाडु में राज्य सरकार ने एक विद्यार्थी के लिए बंद पड़ा 76 वर्ष पुराना स्कूल पुन: खोल दिया है।

यह सत्य घटना है तमिलनाडु में वलपराई के चिन्नाकल्लार से 4 किलोमीटर दूर पेरियाकल्लार में स्थित प्राथमिक स्कूल की, जहाँ पिछले सोमवार को एक 6 वर्षीय बालक शिवा को एडमिशन दिया गया। यह स्कूल 76 वर्ष पुराना है और पिछले कई वर्षों से लगभग बंद जैसी स्थिति में है। स्वतंत्रता से पूर्व 1943 में चाय के बागान में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए खोला गए इस स्कूल में मजदूरों के पलायन के चलते धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या घटती गई। तमिलनाडु सरकार के आदि द्रविड़ार और आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह स्कूल एक साल से बंद था। यहाँ से वर्ष 2017-18 में एक बालिका ने पढ़ाई की थी। उसके उत्तीर्ण होने के बाद स्कूल बंद हो गया और स्कूल के हैडमास्टर तथा शिक्षकों को उसी समय अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया।

विश्वास नहीं हुआ राजेश्वरी को !

चिन्नाकल्लार में अभी भी चाय के बागान हैं और कई लोग वहाँ मजदूरी करते हैं। इन्हीं में एक हैं राजेश्वरी, जो अपने 6 वर्षीय पुत्र शिवा को आदि द्रविड़ार स्कूल में दाखिला दिलाना चाहती थीं। चिन्नाकल्लार के सबसे निकट पेरियाकल्लार स्थित यह प्राथमिक स्कूल ही था। इसीलिए राजेश्वरी ने यह स्कूल दोबारा खोल कर शिवा को एडमिशन दिलाने के लिए अधिकारियों को आवेदन भेजा। राजेश्वरी की खुशी का उस समय ठिकाना न रहा, जब अधिकारियों ने उनका आवेदन स्वीकार कर लिया। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि सिर्फ एक विद्यार्थी के लिए तमिलनाडु शासन-प्रशासन एक साल से बंद पड़ा स्कूल पुन: खोल देगा। स्कूल के हैडमास्टर एम. शक्तिवेल ने राजेश्वरी के आग्रह पर शिवा को गत सोमवार को पहली कक्षा में दाखिला दिलाया। प्रशासन ने शक्तिवेल को स्कूल और बच्चे दोनों का ध्यान रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी है।

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार 1943 में जब यह स्कूल खोला गया था, तब करी 300 मजदूर काम करते थे। स्कूल 70 सालतक चला और हर साल 50 से अधिक बच्चों को यहाँ पढ़ाया जाता था, परंतु पिछले कुछ वर्षों में मजदूरों के पलायन से स्कूल को चालू रखना मुश्किल हो गया था। इसके बावजूद वर्ष 2017-18 तक यह स्कूल खुला हुआ था, जब एक बालिका ने यहाँ से पढ़ाई पूरी की, परंतु उसके बाद कोई विद्यार्थी नहीं आने के कारण 2018-19 में स्कूल बंद रहा। अब शिवा के एडमिशन के साथ स्कूल 2019-20 के शैक्षणिक सत्र के लिए पुन: खुल गया है।

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