मुश्किल में पाकिस्तान : अगस्त में फेल हुए इमरान अक्टूबर में पास होंगे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। पाकिस्तान पर मुश्किलों के बादल मंडराने लगे हैं। अगले 24 घण्टे उसके लिये बेहद तनावपूर्ण हैं। पेरिस में सोमवार से फाइनान्सियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक शुरू होने वाली है, जिसने पाकिस्तान को अभी तो ग्रे लिस्ट में रखा है, परंतु अब पाकिस्तान को आतंकवादियों के प्रति हमदर्दी और सहानुभूति महंगी पड़ सकती है और उसे ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो पहले से ही टूटी-फूटी अर्थ व्यवस्था वाले पाकिस्तान को किसी भी देश से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलेगी और वो कौड़ी-कौड़ी के लिये मोहताज़ हो जाएगा। ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिये पाकिस्तान को साबित करना पड़ेगा कि उसने आतंकी फंडिंग और मनी लॉण्ड्रिंग रोकने के साथ-साथ आतंकियों और उनके संगठनों के विरुद्ध ठोस कदम उठाये हैं। यह साबित करना पाकिस्तान के लिये आसान नहीं होने वाला है। लिहाजा अभी से उसकी धड़कनें तेज हो गई हैं और सबकी नज़र अब एफएटीएफ की बैठक पर टिकी हुई हैं।

पाकिस्तान की एक साल की डेडलाइन हुई खत्म

उल्लेखनीय है कि एफएटीएफ ने जून-2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और उसे 27 बिंदुओं का एक्शन प्लान देते हुए उस पर अमल के लिये एक वर्ष का समय दिया था। इस एक्शन प्लान में कहा गया था कि पाकिस्तान को मनी लॉण्ड्रिंग, आतंकी संगठनों की टेरर फण्डिंग को बैंकों तथा नॉन बैंकिंग फाइनांसियल संस्थाओं, कॉर्पोरेट व नॉन कॉर्पोरेट सेक्टरों से मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने के उपाय करने थे। सूत्रों की मानें तो सिक्युरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान की ओर से तैयार की गई अनुपालन रिपोर्ट की पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री हम्माद अज़हर के सामने जाँच की जाएगी और यदि एफएटीएफ के अनुसार पाकिस्तान 27 बिंदुओं के एक्शन प्लान को लागू करने में विफल होता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा।

अगस्त में फेल हुआ पाकिस्तान अक्टूबर में पास होगा ?

अभी अगस्त-2019 में एशिया पेसिफिक जॉइंट ग्रुप ने पाकिस्तान को इसमें फेल पाया था। इसलिये शुरुआती लक्षण कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं और पाकिस्तान पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। हालाँकि पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि उनका देश ब्लैकलिस्ट होने से बच जाएगा। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि पिछले महीने बैंकॉक में हुई एशिया पेसिफिक जॉइंट ग्रुप की बैठक में अच्छे तरीके से जाँच नहीं की गई थी। दूसरी ओर भारतीय मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि बैंकॉक बैठक को लेकर पाकिस्तान गंभीर तनाव में है। क्योंकि इस बैठक में पाकिस्तान 27 बिंदुओं में से मात्र 6 बिंदुओं पर ही खरा उतरा था। ऐसे में पाकिस्तान पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बढ़ गया है। तकनीकी अनुपालन में भी पाकिस्तान को 40 में से 10 बिंदुओं में ही संतोषजनक पाया गया है। जबकि 30 बिंदुओं में पाकिस्तान को ज़ीरो मार्क दिये गये थे। जिन 10 बिंदुओं में उसके काम को संतोषजनक बताया गया है, उनमें भी पैरामीटर्स पर पाकिस्तान की स्थिति कमज़ोर ही रही है।

ब्लैकलिस्ट हुआ तो रही-सही साख भी गँवा देगा पाकिस्तान

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने एफएटीएफ को दिखाने के लिये पिछले दिनों कई आतंकियों को पकड़ कर जेल में डाल दिया है। हालाँकि पुराना इतिहास देखने पर पता चलता है कि पाकिस्तान ऐसी कार्यवाही महज दुनिया की आँखों में धूल झोंकने के लिये ही करता आया है। वास्तविकता तो यह है कि पाकिस्तान में आतंकियों को पूरी और खुली छूट मिलती है और वे भारत तथा अमेरिका के विरुद्ध अक्सर विष उगलते रहते हैं। पिछले दिनों की बात करें तो पाकिस्तान ने एक तरफ दुनिया के कई देशों से मिल कर कश्मीर मुद्दे पर झूठी बातें फैलाने के प्रयास किये और दूसरी तरफ उसके नेता एफएटीएफ पर भी अपने देश के पक्ष में समर्थन जुटाने के प्रयासों में लगे दिखाई दिये। पाकिस्तान ने लगभग सभी सदस्य देशों से संपर्क किया और कोशिश की कि उसे ब्लैकलिस्ट ना होने दिया जाए। पाकिस्तान को चीन, तुर्की और मलेशिया से विशेष मदद मिलने की आस है। अभी पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था खस्ताहाल है और पहले ही भारत उसे आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया के अन्य देशों से अलग-थलग कर चुका है, जिसके कारण उसे किसी भी देश से आर्थिक मदद नहीं मिल रही है। ऐसे में यदि उसे एफएटीएफ ने ब्लैकलिस्ट में डाल दिया तो दुनिया में उसकी रही-सही प्रतिष्ठा भी खत्म हो जाएगी और जो देश उसके समर्थक हैं, वे भी उसकी कोई मदद नहीं कर पाएंगे, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बरबाद और चौपट हो जाएगी।

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