33 वर्षों बाद नई शिक्षा नीति लाएगी मोदी सरकार, 3 भारतीय भाषाएँ होंगी अनिवार्य !

अहमदाबाद, 2 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। दोबारा सरकार में आने के साथ ही मोदी सरकार एक्शन में आ गई है। सरकार का नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और शनिवार को ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इस नये ड्राफ्ट में तीन भारतीय भाषाएँ पढ़ाने की सिफारिश की गई है, इसको लेकर कुछ दक्षिण भारतीय राज्यों में असंतोष सामने आ रहा है, हालाँकि सरकार ने सभी राज्यों को आश्वस्त किया है कि यह केवल ड्राफ्ट है और जो भी फैसला लिया जाएगा वह सभी की सहमति से लिया जाएगा।

मोदी सरकार के नये मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शनिवार को अपने मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इसके कुछ देर बाद ही प्रख्यात वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाले नेशनल एजुकेशन पैनल (NEP) ने नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट उन्हें सौंप दिया। इस ड्राफ्ट में वर्तमान शिक्षा नीति में बड़े बदलाव की सिफारिशें की गई हैं। अब सरकार जून माह में इस ड्राफ्ट के संदर्भ में सभी राज्यों से फीडबैक माँगेगी। इसके बाद 1 जुलाई को इस ड्राफ्ट को फीडबैक में मिले सुझावों के अनुसार आवश्यक बदलाव के साथ फाइनल करेगी।

इस नई शिक्षा नीति में प्री-स्कूल और पहली कक्षा में बच्चों को मातृभाषा के अलावा दो और भाषाएँ पढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें की गई सिफारिश के अनुसार कक्षा-3 तक मातृभाषा में ही लिखने-पढ़ने के साथ-साथ बच्चों को दो और भारतीय भाषाएँ सिखाई जानी चाहिये। इसके अतिरिक्त यदि कोई विदेशी भाषा भी पढ़ना-लिखना चाहे तो उसे तीन भारतीय भाषाओं के बाद चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा भी सिखाई जा सकती है।

इसी प्रकार नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में 12वीं कक्षा तक के लिये 5+3+3+4 का फॉर्मूला प्रस्तावित किया गया है। इस फॉर्मूले के तहत 5 वर्ष का फाउंडेशन कोर्स होगा। इसमें कक्षा 1 और 2 की पढ़ाई को भी शामिल किया जाएगा। इसे प्री-प्राइमरी स्कूल नाम दिया जाएगा। इसके बाद प्रीपेरटरी स्टेज में कक्षा 3, 4 और 5 को रखा जाएगा। इसके पश्चात् तीन कक्षाएँ 6, 7 व 8 को मिडल स्टेज में रखा जाएगा और आखिर में चौथे स्टेज में कक्षा 9, 10, 11 और 12 को रखा जाएगा।

नई शिक्षा नीति में निजी स्कूलों को उनकी फीस तय करने की स्वतंत्रता देने की भी सिफारिश की गई है। हालाँकि इसमें मनमाने ढंग से फीस न बढ़ाए जाने का भी सुझाव दिया गया है। इसके अलावा इसमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करने का भी सुझाव दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान शिक्षा नीति 1986 में तैयार हुई थी और 1992 में इसमें संशोधन किये गये थे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में नई शिक्षा नीति लाने की घोषणा की थी।

नई शिक्षा नीति में तीन भारतीय भाषाओँ के फॉर्मूले को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने विरोध प्रकट किया है। इसलिये सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सिफारिश है, सुझाव है, कोई नीति नहीं है। यह सिफारिश एनईपी कमेटी ने की है, मोदी सरकार सभी भाषाओं के विकास के लिये काम कर रही है, इसलिये किसी को भी कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिये, क्योंकि एनईपी समिति ने मात्र सिफारिशें की हैं, अभी यह सरकार की पॉलिसी नहीं बनी हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी इसे गलतफहमी ठहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को गलत जानकारी मिली होगी, पीएम मोदी पहले ही कह चुके हैं कि किसी भी क्षेत्र पर कोई विशेष भाषा लागू नहीं की जाएगी। हमारी सरकार ने एक मसौदा तैयार किया है और अब हम इसके बारे में विविध राज्यों से जानकारी एकत्र करेंगे और फिर आगे की चर्चा करेंगे। सरकार का किसी विशेष भाषा को फैलाने का कोई इरादा नहीं है, हम सार्वजनिक सहमति बनाने पर विचार कर रहे हैं।

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