विचित्र परंपराएँ : कहीं मेले में मामा-मामी की मौज़, कहीं दुल्हन भगा ले जाने का रिवाज़, कहीं कुँवारों की पिटाई, तो कहीं दुल्हन करती है कुत्ते से शादी !

भारत में अलग-अलग धर्म-संप्रदाय के लोग रहते हैं, यह तो सब जानते हैं, किंतु भारतीय संस्कृति महान बनी है अपनी अदभुत और अकल्पनीय कलाओं तथा अलग-अलग समुदायों में प्रचलित अविश्वसनीय परंपराओं से। भारतीय संस्कृति में पर्व-त्यौहारों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। हालाँकि बहुत-सी परंपराएँ आधुनिकता की भेंट चढ़ गई हैं और अपना अस्तित्व खो चुकी हैं, परंतु कुछ समुदायों में आज भी कुछ ऐसी अदभुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय परंपराएँ प्रचलित हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

मामा-मामी बिना पैसे के खरीदते हैं सामान

पूर्वोत्तर के असम में मोरीगाँव नामक जिला है, जिसमें जूनबिल नामक क्षेत्र में एक अजीबो-गरीब मेला लगता है। यह मेला अपनी विचित्र परंपरा के लिये जाना जाता है। इस मेले में पहाड़ी और मैदानी जन जाति के लोग बड़ी संख्या में जुटते हैं। यह लोग इस मेले में आते तो हैं अपना सामान बेचने के लिये, परंतु बिना पैसों के सामान बेचकर चले जाते हैं। आप भी हैरान रह गये न ! आप सोच रहे होंगे कि पैसे लिये नहीं तो सामान कैसे बेचा होगा ? यही विचित्रता तो इस मेले को खास बनाती है। इस मेले की विशेषता है कि यहाँ पैसे लेकर सामान खरीदा या बेचा नहीं जाता है, बल्कि सामान की अदला-बदली की जाती है। दोपहर के समय पहाड़ी और मैदानी जन जाति के लोग अपना सामान लेकर इस मेले में पहुँचते हैं, यहाँ सामान की कीमत तय होने के बाद उतनी ही कीमत वाले सामान से अदला-बदली करके घर चले जाते हैं। इन जन जातियों को यहाँ विशेष नाम दिया गया है। यहाँ की सामान्य बोलचाल की भाषा में इन जन जातियों को मामा-मामी कहते हैं।

मप्र में दुल्हन को भगा ले जाते हैं लोग

पश्चिमी मध्य प्रदेश में रहने वाली एक जन जाति में शादी करने के लिये एक बहुत ही अजीबो-गरीब परंपरा है। यह जन जाति अपने विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह कराने के लिये भगोरिया मेले का आयोजन करती है। इस अनोखे मेले को आदिवासी युवक युवतियों के ‘प्रेम-पर्व’ के रूप में जाना जाता है। यह मेला हर वर्ष आयोजित होता है। यह मेला सदियों से इस समुदाय की परंपरा बना हुआ है, हालाँकि अब समुदाय के युवाओं में ही इस परंपरा के विरोध के स्वर बुलंद होने लगे हैं, परंतु विरोध के बीच भी मेले का आयोजन निरंतर हो रहा है। इस मेले में इस जन जाति के लोग बड़े अनूठे ढंग से अपनी दुल्हन चुनते हैं। मेले में आदिवासी युवक पान का बीड़ा लेकर पसंदीदा युवती के समक्ष जाता है और उसे पान का बीड़ा देता है, यदि युवती ने उसके हाथ से बीड़ा ले लिया तो इसका मतलब है कि युवती ने भी युवक का प्रेम निवेदन स्वीकार कर लिया है। इसके बाद युवक उस युवती के गाल पर गुलाल लगाकर उसे भगा ले जाता है और कुछ समय बाद दोनों शादी करके घर लौटते हैं।

कंवारे लड़कों की लाठियों से पिटाई

राजस्थान के जोधपुर में विचित्र प्रथा प्रचलित है। यहाँ कंवारे लड़कों की शादीशुदा महिलाएँ लाठियों से पिटाई करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस तरह पिटने के बाद इन कंवारे लड़कों की एक साल के भीतर ही शादी हो जाती है। शादीशुदा महिलाएँ सज-संवरकर घरों से लाठियाँ लेकर बाहर निकलती हैं और कंवारे लड़कों की पिटाई करती हैं और यह लड़के भी चुपचाप पिट जाते हैं। आजकल तो विदेश से आने वाले पर्यटक (विदेशी महिलाएँ) भी इस परंपरा में शामिल होने लगे हैं।

लड़कियों की होती है कुत्तों से शादी

झारखंड के कुछ हिस्सों में लड़कियों की शादी कुत्तों से करवाने की प्रथा है। ऐसा करने के पीछे इन लोगों का मानना है कि इससे लड़कियों की ग्रह दशा बदल जाती है और उन्हें भूत-प्रेत से छुटकारा मिलने के साथ-साथ अच्छा वर मिलता है। यह शादी सांकेतिक ही होती है, इसके बावजूद इसमें शादी की सभी रीति-रश्मों का सख्ती से पालन किया जाता है। लोगों को शादी का निमंत्रण भी भेजा जाता है और मंडप तैयार करके पूरे मंत्रोच्चार-विधि से शादी संपन्न कराई जाती है।

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