ये है NEW INDIA : अयोध्या विवाद पर ‘सुप्रीम’ निर्णय से साम्प्रदायिक सौहार्द के नए युग का सूत्रपात

* धर्म के नाम पर लड़-कट जाने का दौर समाप्त

* ‘INDIA पहले, बाकी सब बाद में’ का उदय

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 9 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अयोध्या राम जन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक बहुप्रतीक्षित निर्णय के बाद समग्र देश में साम्प्रदायिक सौहार्द के नए युग का सूत्रपात हुआ है। 150 करोड़ हिन्दुओं के आस्था स्थल अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना देखने वाले हजारों लोगों को जहाँ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने राहत और सुकून दिया है, वहीं विवादास्पद भूमि पर स्वामित्व मांगने वाले मुस्लिम पक्ष की भावनाओं का पूर्ण आदर-सम्मान करते हुए 5 एकड़ अलग भूमि देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपने आप में विविधतापूर्ण भारत की एकता के स्तंभ में एक सुदृढ़ शिला को जोड़ गया।

हिन्दुओं की आस्था के अनुसार भगवान राम विष्णु के अवतार थे, जिन्होंने त्रेता युग में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में महाराज दशरथ के घर जन्म लिया था। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय चाहे जो भी आता, करोड़ों हिन्दुओं की इस आस्था में लेसमात्र भी परिवर्तन नहीं होने वाला था। यद्यपि सुप्रीम कोर्ट ने केवल आस्था के नाम पर कोई निर्णय नहीं दिया है, अपितु सभी तरह के तथ्यों पुराण-इतिहास और आधुनिक उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बना कर संपूर्ण संवैधानिक और वैधानिक निर्णय दिया है। चालीस दिनों की उतार-चढ़ाव वाली सुनवाई, धारदार दलीलों और वक्तव्यों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखा, तभी से सरकार और प्रशासन सहित 90 के दौर के उन सभी लोगों को आशंकाएँ थीं कि सुप्रीम कोर्ट जब सुरक्षित रखा गया अपना निर्णय सुनाएगा, तो देश फिर एक बार 30 वर्ष पीछे जा सकता है और धार्मिक ताना-बना बिगड़ सकता है। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश सरकार से लेकर कई राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह ने सुप्रीम निर्णय के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के पूरे प्रबंध कर रखे थे, परंतु भारत के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उसका गरिमापूर्वक सम्मान करके पूरे विश्व को यह दिखा दिया कि ये NEW INDIA है, जो धर्म के नाम पर लड़-कट जाने वाले दौर से बहुत आगे निकल चुका है।

साकार-सार्थक हुआ मोदी का ह्यूस्टन उद्घोष, ‘भारत में सब अच्छा है’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर अपने संबोधन में भारत को न्यू इंडिया बताते हैं और आज भारत के 136 करोड़ लोगों ने यह सिद्ध भी कर दिखाया कि हम चाहें हिन्दू हों या मुसलमान, पहले हम भारतीय हैं। मोदी ने ह्यूस्टन में आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिन्दी सहित छह भारतीय भाषाओं में उद्घोष किया था, ‘भारत में सब अच्छा है’। मोदी का यह उद्घोष आज इतने संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के किसी एक पक्ष में निर्णय के आने के बाद भी शांति बने रहने के साथ साकार और सार्थक भी हुआ। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से मुस्लिम पक्ष और मुस्लिम वर्ग के कुछ लोगों को निराशा अवश्य हुई होगी, क्योंकि विवादास्पद भूमि रामलला विराजमान की घोषित की गई है, परंतु देश की सबसे बड़ी अदालत के सबसे बड़े निर्णय को देश के दोनों धर्मों के लोगों ने हृदयपूर्वक स्वीकार किया और सिर-मत्थे चढ़ाया। शासन-प्रशासन की गड़बड़ी या अप्रिय घटना की सभी आशंकाएँ पूर्णत: निर्मूल हो गईं, जब देश में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद न तो हिन्दू धर्मावलंबियों की ओर से उन्मादी विजयोत्सव मनाया गया और न ही मुस्लिम धर्मावलंबियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कोई भी टिप्पणी की। यद्यपि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इतना अवश्य कहा कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) दायर करने पर विचार करेगा और यह उसका संवैधानिक अधिकार भी है। बोर्ड के वक़ील ज़फर यार गिलानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जब रिव्यू पिटिशन दायर करने पर विचार करने की बात कही, तब साथ ही उन्होंने देश में एकता, शांति और भाई-चारा बनाए रखने की भी अपील की, जो अपने आप में न्यू इंडिया की नई तसवीर है।

सबने रखी ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ की लाज

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पूर्व ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह ट्वीट कर देशवासियों से अपील की कि फ़ैसले को किसी की भी हार-जीत से जोड़ कर न देखा जाए, वह एक कुशल, सक्षम और न्यू इंडिया का सपना देखने वाले प्रधानमंत्री की छवि को उजागर कर गया, वहीं निर्णय आने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और देशवासियों को केवल और केवल भारतभक्ति का संदेश दिया।

इसी प्रकार गृह मंत्री अमित शाह ने भी अत्यंत विवेकपूर्ण प्रतिक्रिया देते हुए उच्चतम् न्यायालय के निर्णय का हृदयपूर्वक स्वागत किया और देश में शांति, भाईचारे, साम्प्रदायिक सौहार्द को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट और सीधे शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय देश के सभी नागरिकों के लिए है, संघ इसका स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल निर्णय है, किसी की हार या जीत नहीं। संघ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में सहयोग करेगा। संघ का मुख्य उद्देश्य मानव निर्माण है, जिसमें धर्म-जाति का कोई भेद नहीं किया जाता। इसी प्रकार बाबा रामदेव ने भी देश के लिए शांति को ही सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

विश्व स्तरीय मस्जिद का निर्माण हो : बी. एन. शर्मा

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सेवानिवृत्त महानिरीक्षक (IG) बी. एन. शर्मा ने भी अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद कहा कि यह फ़ैसला किसी की हार या जीत नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया है और अब आवश्यकता इस बात की है कि मस्जिद भी विश्व स्तरीय और भव्य बननी चाहिए। उन्होंने ट्विटर पर अयोध्या मुद्दे पर कई ट्वीट करते हुए देश के लोगों से द्वेष से दूर शांति और सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। एक हिन्दू होकर भी बी. एन. शर्मा ने विश्व स्तरीय मस्जिद के निर्माण का विचार व्यक्त करके यह सिद्ध कर दिया कि साम्प्रदायिक सौहार्द और सहिष्णुता भारत का मूल धर्म, मूल स्वभाव है। पढ़िए बी. एन. शर्मा के अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद किए गए ट्वीटस, जो बीएसएफ के एक उच्च पद पर रह चुके आला अधिकारी की सच्ची देशभक्ति को उजागर करते हैं।

युवाPRESS के लिए भी स्व-धर्म से ऊपर राष्ट्र धर्म

युवाPRESS के मुख्य सम्पादक आई. के. शर्मा ने भी अयोध्या मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हृदयपूर्वक और भावपूर्वक स्वागत किया है। यद्यपि साथ ही उन्होंने इस निर्णय को किसी भी पक्ष की जय-पराजय से न जोड़ने की पुरजोर अपील करते हुए कई ट्वीट किए। इन ट्वीट के माध्यम से शर्मा ने देशवासियों विशेषकर युवावर्ग से देश की उन्नति, देश के विकास के साथ केवल और केवल भारत देश के बारे में सोचने की मार्मिक अपील की है।

और ट्रेंड हो गया #hindumuslimbhaibhai

आम तौर पर सोशल मीडिया किसी भी मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का माध्यम बन जाता है या कुछ कुत्सित तत्व ऐसा करने में सफल हो जाते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले और बाद में भी अयोध्या मुद्दे से इतर कई ऐसे विवादास्पद हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जिनसे भारत की एकता, अखंडता और शांति को ख़तरा हो सकता है, परंतु इनके सबके बीच सकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाला एक हैशटैग #hindumuslimbhaibhai भी तेजी से ट्रेंड कर रहा था, जिसमें लोगों ने भारत के भाई-चारे, हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई-जैन एकता, साम्प्रदायिक सौहार्द की आकर्षक और प्रेरक तसवीरों के साथ अपने सकारात्मक विचार दुनिया के सामने रखे।

आप भी देखिए न्यू इंडिया की नई तसवीर :

https://twitter.com/Farhanq74865083/status/1193027437044486144?s=20
https://twitter.com/ameenvillan/status/1193118330149687297?s=20

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