कभी देखा है DIAMOND FARM ? पग-पग हीरे उगलता है यह खेत ! आपको भी चाहिए, तो पहुँच जाइए यहाँ

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। आपने फिल्म उपकार का वह गाना तो सुना ही होगा, जिसमें फिल्म के नायक मनोज कुमार एक लाइन गाते हैं कि ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती।’ यह फिल्म कृषि प्रधान थी, जिसमें फिल्म का नायक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद खेती को ही व्यवसाय के रूप में चुनता है। इस फिल्म में पकी हुई सुनहरी रंग धारण करने वाली फसलों को सोना और हीरा-मोती की संज्ञा दी गई है, परंतु हम बात कर रहे हैं एक ऐसे खेत की, जिसकी मिट्टी सचमुच हीरे उगलती है और अब तक इस धरती से 31,000 हीरे मिल भी चुके हैं।

अमेरिका की इस धरती से मिल रहे हैं हीरे

जिस देश की धरती से हीरे मिल रहे हैं, उस देश का नाम अमेरिका है। अमेरिका के अरकांसास राज्य में ‘दी क्रेटर ऑफ डायमंड’ नाम की जगह है। इस जमीन में सबसे पहले 1906 में हीरे मिलने की शुरुआत हुई । जमीन के मालिक जॉन हडलेस्टोन को उसकी इस जमीन से सबसे पहले दो चमकते हुए क्रिस्टल मिले थे। जब उनकी जाँच करवाई गई तो पता चला कि वह तो बेशकीमती हीरे हैं। इसके बाद ही जॉन हडलेस्टोन ने इस जमीन को ‘दी क्रेटर ऑफ डायमंड’ नाम दे दिया। इतना ही नहीं, जॉन ने हीरे उगलने वाली इस 243 एकड़ जमीन को एक डायमंड कंपनी को ऊंची कीमत पर बेच दिया।

1906 से ही इस जमीन में हीरों की खोजबीन जारी थी। 1972 में यह जमीन नेशनल पार्क के हिस्से में आ गई। नेशनल पार्क के हिस्से में आने के बाद इस जमीन को आम लोगों के लिये खोल दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार 1972 से लेकर अभी तक यहाँ लोगों को 31,000 हीरे मिल चुके हैं। अमेरिका का 40 कैरेट का सबसे बड़ा ‘अंकल सैम’ हीरा भी इसी जमीन से मिला था, जो कि अमेरिका में मिला अब तक का सबसे बड़ा हीरा है।

सामान्य तौर पर ऐसी जगहों को सुरक्षा घेरे में रखा जाता है और वहाँ किसी भी इंसान को आने-जाने की इजाजत नहीं दी जाती है। हीरे की खदानों के आसपास आम लोगों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी जाती है। हालाँकि यहाँ ऐसा नहीं है। यहाँ हीरा ढूँढने के लिये कोई भी आ – जा सकता है। यहाँ सभी को हीरा ढूँढने की आज़ादी दी जाती है। इसके बाद लोग जितने हीरे खोजते हैं, उन्हें उतने हीरों की उचित कीमत देकर उनसे हीरे खरीद लिये जाते हैं।
भारत में कहाँ मिलते हैं हीरे

भारत के मध्य प्रदेश में पन्ना नामक एक जगह है, जहाँ हीरे मिलते हैं। मध्य प्रदेश के विंध्याचल रेंज में लगभग 240 किलोमीटर के अंदर हीरे की खदानें हैं। 6,000 साल पहले यहाँ कच्चे हीरे मिले थे। इन्हें पन्ना की खदानों के नाम से भी पहचाना जाता है। यहाँ हीरे की खुदाई के लिये 1968 में नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी) की स्थापना की गई थी। यह एनएमडीसी पन्ना जिले के मझगाँव में हीरे की खदान का संचालन करता है। यह खदान अभी तक अनेक बेशकीमती हीरे दे चुकी है। यहाँ से निकला हीरा दक्षिण अफ्रीका की खदानों से भी अच्छा होता है। यह अत्यंत चमकदार होता है और काटने में भी कम वेस्ट होता है। एनएमडीसी के अनुसार यह खदान हर साल लगभग 80,000 कैरेट हीरों का उत्पादन करती है।

जून-2015 में इस खदान से 80 कैरेट का हीरा निकलने की बात सामने आई थी, जिसकी कीमत 50 करोड़ रुपये थी। पन्ना के तत्कालीन विधायक ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि वह हीरा खदान संचालक और पुलिस अफसरों ने मिलकर बेच दिया। इससे पहले 2010 में एनएमडीसी ने दावा किया था कि खदान से 37.68 कैरेट का हीरा निकला था जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये थी। एनएमडीसी के दावे के अनुसार यह हीरा खदान से निकला अब तक का सबसे बड़ा हीरा था। पन्ना में अधिकांश हीरे ऐसी खदानों से निकले हैं जो ज्यादा गहरी नहीं हैं। जमीन की सतह से दो से तीन फीट नीचे ही काफी बड़े हीरे निकले हैं। महुआ टोला की खदान से 44.55 कैरेट का हीरा निकला था। इसके बाद 2015 में 80 कैरेट का हीरा निकला था जिसे खदान का संचालक लेकर भाग गया।

पन्ना क्षेत्र में पन्ना, सतना जिले के मझगाँव, हीनोता और छतरपुर जिले के अंगौर गाँव हीरे के लिये प्रसिद्ध हैं। पन्ना की भागने नदी द्वारा जमा किये गये निक्षेपों में रामखेरिया नामक स्थान पर धरातल के समीप ही हीरे प्राप्त हो जाते हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के कडपा, अनंतपुर, कुरनूल, कृष्णा तथा गोदावरी जिलों में नदियों द्वारा बहाकर लाई गई जलोढ़ मिट्टी तथा बजरी से भी हीरे मिलते हैं। महानदी की घाटी में भी संबलपुर और चंद्रपुर जिले हीरे के केन्द्र माने जाते हैं। हीरे के लिये भारत का नाम प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में गोलकुण्डा की खान से निकला कोहिनूर हीरा अब तक आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, जो अब ब्रिटेन के पास है।

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