PM मोदी ने तिरुपति जाए बिना कर दिया 23,63,20,000 रुपए के सोने का चढ़ावा ! जानिए आप भी कैसे पा सकते हैं ‘घर बैठे गंगा नहाने’ का लाभ ?

अहमदाबाद, 14 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चौबीसों घण्टे देश के लोगों की भलाई के लिए काम करने का दावा करते हैं और उनकी योजनाओं में उनके इस दावे की झलक भी दिखाई देती है। मोदी सरकार ने पाँच वर्ष से अधिक के कार्यकाल में कई ऐसी योजनाएँ लागू कीं, जिनसे न केवल अत्यंत ग़रीब, अपितु मध्यम वर्ग के लोगों को भी फायदा हुआ। यहाँ तक कि मोदी की एक योजना तो ऐसी है, जिसका फायदा उठा कर स्वयं भगवान तिरुपति बालाजी मालामाल हो गए।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम (GMS) के बारे में। इस योजना के तहत आम जनता और सभी प्रकार के संगठन सरकार के समक्ष अपने सोने को जमा करा कर परिपक्वता पर निर्धारित अतिरिक्त सोना प्राप्त कर सकते हैं। देश के सबसे अमीर मंदिर तिरुपति बालाजी मंदिर ने मोदी सरकार की इस योजना यानी जीएमएस का फायदा उठाने में तनिक भी देरी नहीं की और 3 साल में ही उसे 70 किलो अतिरिक्त सोना मिला, जिसकी कीमत वर्तमान 10 ग्राम सोने के मूल्य के हिसाब से 23,63,20,000 रुपए होती है।

उल्लेखनीय है कि तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट ने जीएमस योजना के तहत वर्ष 2016 में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 1311 किलो सोना जमा कराया था। तीन साल बाद पीएनबी ने योजना के तहत तिरुपति मंदिर को 70 किलो अतिरिक्त सोना ब्याज के रूप में प्रदान किया है। आज की तारीख़ में सोने का प्रति 10 ग्राम भाव 33 हजार रुपए से अधिक है। इस हिसाब से देखा जाए, तो तिरुपति मंदिर को तीन वर्षों में 23 करोड़ 63 लाख 20 हजार रुपए का फायदा है।

सर्वविदित है कि आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में करोड़ों लोग सोना चढ़ाते हैं। मंदिर का संचालन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) के अधीन है, जिसके पास 9,259 किलो से अधिक सोना है। टीटीडी ने जीएमएस के तहत 5,387 किलो सोना भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में और 1,938 किलो सोना भारतीय ओवरसीज़ बैंक (IOB) में जमा कर रखा है।

आप किस सोच में हैं ? घर में रखा सोना अंडे नहीं देता !

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम यानी जीएमएस वर्ष 2015 में आरंभ की थी। इसका उद्देश घरों-तिज़ोरियों-कोषालयों में अचल सम्पत्ति के रूप में बंद पड़े सोने का श्रेष्ठ उपयोग करना है। जीएमएस के तहत कोई भी व्यक्ति या संगठन अधिकृत बैंक में 1-3 वर्ष के शॉर्ट टर्म, 5-7 वर्ष के मिड टर्म और 12 वर्ष के लॉंग टर्म के लिए सोना जमा करा सकता है। इसके अलावा 1 वर्ष 3 महीने, 2 वर्ष 4 महीने आदि अवधि के लिए भी सोना फिक्स कराया जा सकता है। जीएमएस के तहत सोना जमा कराने वालों को ब्याज के रूप में 2.25 से 2.50 प्रतिशत ब्याज दिया जाता है, जो सोने या नकद दोनों में से किसी भी विकल्प के रूप में आपको चाहिए, दिया जाता है। जीएमएस के तहत होने वाली ब्याज आय कर से मुक्त है।

लॉकर से क्यों अलग और फायदेमंद है जीएमएस ?

आम जनता अपनी धन-सम्पत्ति के लिए सबसे सुरक्षित स्थान बैंकों को मानती है। इसी कारण जहाँ लोग नकद राशि बैंक खातों में जमा करवाते हैं, वहीं सोना या उससे बने आभूषण व अन्य कीमती वस्तुएँ-दस्तावेज बैंक लॉकर में रखवाते हैं, परंतु जीएमएस योजना का फायदा यह है कि लॉकर में रखे सोना उतना ही रहता है, जितना आपने रखा होता है, जबकि जीएमएस के तहत रखा गया सोना ब्याज देता है। जीएमएस के तहत न्यूनतम् 30 ग्राम 995 शुद्धता वाला सोना बैंक में रखा जा सकता है। इसमें बैंक गोल्ड-बार, सिक्के, गहने आदि शामिल हैं।

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