भारत का 9/11 : आज हर नागरिक के लिए ‘क्लेश निवारण पर्व’ मनाने का दिन

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 9 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। 9/11 लिखते, बोलते या सुनते ही हमें अमेरिका सहित पूरे विश्व को आतंकवाद रूपी क्लेश के सबसे भयावह रूप का स्मरण हो आता है, जब 9 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को आत्मघाती विमानों के जरिए ध्वस्त कर दिया गया था। विश्व के इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हैं, जिन्हें लोग उनकी तारीख़ से ही याद करते हैं। 9/11 की तरह ही हमारे देश में 26/11 की तारीख़ भी 9/11 जैसी ही कुत्सित घटना के लिए याद की जाती है, जब 26 नवंबर, 2008 को मुंबई को आतंकवादियों ने दहला दिया था। तारीख़ों के इस इतिहास में अब एक और 9/11 जुड़ने जा रहा है। एक 9/11 तो अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले का परिचायक है, परंतु जो दूसरा 9/11 है, वह भारत का 9/11 है, जो पूरे भारत के साम्प्रदायिक सौहार्द की अग्नि परीक्षा लेकर आया है।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं साढ़े चार सौ वर्षों से अधिक पुराने राम जन्म भूमि विवाद की, जिस पर आज यानी 9 नवंबर, 2019 यानी 9/11 के दिन भारत का सबसे बड़ा न्यायालय अपना निर्णय सुनाने वाला है। अमेरिका का 9/11 भले ही उसे दर्द और पीड़ाएँ दे गया हो, परंतु भारत का 9/11 देश के 130 करोड़ लोगों की अग्नि परीक्षा लेकर आया है, जहाँ हमें पूरे विश्व को यह दिखाने और सिद्ध करने का अवसर मिला है कि भारत वास्तव में अनेकता में एकता का सबसे बड़ा दृष्टांत है।

भारत सहित समग्र विश्व में बसने वाले 150 करोड़ हिन्दुओं की आस्था है कि भगवान राम ने अयोध्या में उस स्थान पर ही जन्म लिया था, जो पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से विवादास्पद स्थल बना हुआ है। इस विवाद ने भारत के साम्प्रदायिक सद्भाव को समय-समय पर चुनौतियाँ दीं और इन चुनौतियों का सामना करते हुए अनेक निर्दोष नागरिकों को भी अपने प्राणों की आहूति देनी पड़ी, परंतु अब जबकि भारत की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट आज इस अत्यंत पुराने और संवेदनशील मुद्दे पर लम्बी, धारदार और गूढ़ सुनवाई के बात किसी निष्कर्ष पर पहुँच कर कोई निर्णय सुनाने जा रहा है, तब देश के हर नागरिक, चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम, उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को शिरोधार्य कर भारत के 9/11 को सदा-सदा के लिए पूरी दुनिया के समक्ष साम्प्रदायिक सौहार्द के एक अनुपम-उत्तम दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत करने को तैयार रहना चाहिए। आशा यही करनी चाहिए और युवाPRESS भी सभी देशवासियों से यही अपील करता है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को सर-माथे चढ़ा कर भारत के 9/11 को क्लेश निवारण पर्व बना दे। निर्णय किसी के भी पक्ष में आए, परंतु पर्व पूरा देश मनाए, देश का हर नागरिक मनाए।

You may have missed