ऐसी भी होती है पुलिस : ‘भगौड़ा’ सामने था, पर ग़िरफ़्तार नहीं किया..!

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 18 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। ‘हम बदले-तो जग बदले’। यह सुवाक्य यदि कोई अपने जीवन में उतार ले, तो दुर्जन और दुराचारी को भी सज्जन बना सकता है। इतना ही नहीं, जो पुलिस दुर्जनता के कारण बंदी बनाना चाहती हो, वही पुलिस ऐसे आदमी को सज्जन व्यक्ति का प्रमाण पत्र भी देती है। सामान्यत: पुलिस किसी अपराधी प्रवृत्ति को आसानी से छोड़ती नहीं है, परंतु पुलिस को लेकर ऐसी नकारात्मक मानसिकता को दूर करने वाला एक किस्सा तमिलनाडु में सामने आया है। इस कहानी की दिलचस्प बात यह है कि पुलिस जिस वॉण्टेड हिस्ट्रीशीटर को 17 वर्षों तक तलाश कर रही थी, जब वह मिला, तो पुलिस ने उसे गिरफ़्तार नहीं किया, अपितु गुड कैरेक्टर सर्टिफिकेट देकर समाज में पुन: स्थापित किया।

यह कहानी है तमिलनाडु के एक बड़े शहर तिरुनेलवेली की, जहाँ एस. शेखर इस समय सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पद पर कार्यरत् हैं। शेखर ने पुलिस बल और पुलिस को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच को कई दृष्टांतों से बदलने का प्रयास किया है। एक समय था, जब एस. शेखर तिरुनेववेली शहर में ही पुलिस उप निरीक्षक (PSI) के पद पर कार्यरत् थे, परंतु कई स्थानांतरणों और पदोन्नतियों के बाद शेखर आज फिर तिरुनेलवेली में कार्यरत् हैं और वह भी एसीपी के पद पर। तिरुनेलवेली के साधारण लोगों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक समाचार हो सकता था, परंतु कभी शेखर के लिए वॉण्टेड हिस्ट्रीशीटर रहे मुरुगन को इस समाचार ने आनंद से भर दिया और वे शुक्रवार को एसीपी शेखर को ‘थैंक यू’ कहने के लिए उनके कार्यालय पहुँच गए।

जिसकी 17 साल से थी तलाश, उसे ग़िरफ़्तार नहीं कर सके शेखर

एसीपी एस. शेखर और मुरुगन की शुक्रवार को लगभग 20 वर्षों के बाद मुलाक़ात हुई। शेखर-मुरुगन की यह दूसरी मुलाक़ात थी, जिसमें मुरुगन शेखर को धन्यवाद कहने आए थे, परंतु इस धन्यवाद के भाव की जड़ में 20 वर्ष पहले 1999 में हुई मुलाक़ात है। यह वह समय था, जब शेखर तिरुनेलवेली के पीएसआई थे। उस समय मुरुगन छोटे-बड़े अपराध करने वाले आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति (हिस्ट्रीशीटर) थे। तिरुनेलवेली पुलिस को मुरुगन की 17 वर्षों यानी 1982 से तलाश थी, परंतु मुरुगन पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था। पुलिस उसे भगौड़ा घोषित कर चुकी थी। इसी दौरान एस. शेखर तिरुनेलवेली में पीएसआई के रूप में नियुक्त हुए। शेखर भी मुरुगन की तलाश में जुट गए और 1999 में अचानक एक दिन उन्हें वांछित हिस्ट्रीशीटर मुरुगन मिल भी गए, परंतु आश्चर्य के बीच शेखर ने मुरुगन को ग़िरफ़्तार नहीं किया। वास्तव में पीएसआई शेखर ने मुरुगन को एक दुकान पर नौकरी करते हुए देखा था। कोई साधारण पुलिस कर्मचारी होता, तो एक वॉण्टेड हिस्ट्रीशीटर को देखते ही धर लेता, परंतु शेखर ने ऐसा नहीं किया। शेखर ने देखा कि हिस्ट्रीशीटर मुरुगन ने अपनी हिस्ट्री ही बदल डाली है। वे अपराध की दुनिया छोड़ चुके हैं और मेहनत से कमाई रोटी खाते हैं। पीएसआई शेखर ने मुरुगन के इस परिवर्तन को न केवल सराहा, अपितु उन्हें अच्छे आचरण का प्रमाणपत्र भी दिलवाया, ताकि भविष्य में भी कोई पुलिस कर्मचारी उन्हें पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि के नाम पर परेशान न करे।

शेखर जैसे भी होते हैं पुलिस कर्मचारी

आज तिरुनेलवेली शहर के एसीपी के रूप में कार्यरत् एस. शेखर कहते हैं, ‘मैंने केवल मुरुगन को नया जीवन आरंभ करने में उसकी सहायता की। आज मुरुगन एक फुलटाइम सूप वेंडर हैं।’ मुरुगन को जब पता चला कि बीस वर्ष पहले 1999 में जिस पीएसआई एस. शेखर ने उन्हें नया जीवन दिया था, वे तिरुनेलवेली में एसीपी के रूप में लौटे हैं, तो मुरुगन से रहा नहीं गया। वे हर्ष-विभोर होकर उनसे मिलने के लिए पहुँच गए। मुरुगन केवल शेखर को धन्यवाद कहने पहुँचे थे, परंतु मुरुगन को उस समय आश्चर्य हुआ, जब बीस साल बाद भी शेखर ने मुरुगन को पहचान लिया।

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