मोरारी बापू की प्रशंसनीय पहल : गणिकाओं को गुणवान बनाया और कन्यादान भी किया…

अहमदाबाद 19 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय सनातन धर्म में संत या सद्पुरुष उसे कहा जाता है, जो हर असंभव को संभव करने का सामर्थ्य रखता है। एक आत्म-साक्षात्कारी पुरुष या संत कभी किसी महाराजा या सम्राट के पास नहीं जाता, अपितु सम्राट को उसके पास आना पड़ता है। आज भी हमारे देश में ऐसे सद्पुरुषों की कमी नहीं है, जो दुर्जन-दुराचारियों को ही नहीं, अपितु विवशता के चलते गणिका बन चुकी हैं, उन्हें गुणवान बना देते हैं। ऐसे ही एक सद्पुरुष हैं गुजरात सहित पूरे विश्व में विख्यात राम कथा वाचक संत मोरारी बापू।

वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामायण के माध्यम से त्रेता युग में अवतरित हुए भगवान श्री राम की कथा को जन-जन तक सरल शब्दों में पहुँचाने का श्रेयकर कार्य कर रहे संत मोरारी बापू चाहते, तो एक कथावाचक के रूप में सीमित रह जाते, परंतु समय-समय पर उन्होंने अपने कार्यों से स्वयं को संतत्व की परिभाषा में भी ढाला। मोरारी बापू का संतत्व उस समय अत्यंत चर्चा में आया, जब उन्होंने दिसम्बर-2018 में मुंबई में रेड लाइट एरिया कमाटीपुरा में उन्होंने गणिकाओं (देह व्यापार में लिप्त-सेक्स वर्कर्स) का दौरा कर वहाँ की सेक्स वर्करों को अयोध्या में आयोजित होने वाली रामकथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया था। बाद में अयोध्या में आयोजित रामकथा में मोरारी बापू ने स्वयं ही तुलसीदास की मानस गणिका का पाठ किया था, जो तुलसीदास और वेश्याओं के संवाद पर आधारित है। इस रामकथा के दौरान मोरारी बापू ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे सेक्स वर्किंग के जाल से मुक्त होने की इच्छुक गणिकाओं को मुक्त कराए। इसके बाद मोरारी बापू के समर्थकों ने फरवरी-2019 तक 6.5 करोड़ रुपए एकत्र किए और यह रकम सेक्स वर्करों को छुड़ाने और पुनर्वास में लगे छ एनजीओ को सौंप दी। इनमें एक एनजीओ कांदिवली स्थित रेस्क्यू फाउंडेशन को 51 लाख रुपए दिए गए, जिसने दो सेक्स वर्करों को सेक्स जाल से बाहर निकाला।

मोरारी बापू ने किया कन्यादान

20 से 22 वर्ष की दो युवतियों को विवाह के लिए जामनगर और राजकोट के दो युवक वर स्वरूप मिल गए। इन युवतियों का विवाह मोरारी बापू के भावनगर में महुवा तहसील के तलगाजरडा गाँव स्थित आश्रम में सम्पन्न हुआ। स्वयं मोरारी बापू ने इन युवतियों का कन्यादान किया। इस अवसर पर मोरारी बापू ने कहा, ‘अयोध्या में राम कथा के दौरान मैंने कहा था कि जो भी लड़की इस व्यवसाय (वेश्यावृत्ति) से जुड़ी है और विवाह करना चाहती है, तो योग्य वर मिलने पर उन्हें यह अवसर दिया जाएगा और आश्रम पूरी तरह से इसमें मदद करेगा। आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अयोध्या में मानस गणिका के पाठ के बाद हमने इन दो लड़कियों की यहां तलगाजरडा में शादी कराई। मैं लड़कों और उनके परिवार की प्रशंसा करता हूँ, जिन्होंने इन लड़कियों को अपनाया। ऐसा करने के लिए महान साहस चाहिए।’

और बापू बोले, ‘मेरी बेटियों को पूरा सम्मान देना…’

गणिका से गुणवान कन्याओं में परिवर्तित होकर नया जीवन आरंभ करने जा रही दोनों युवतियों का कन्यादान करने वाले संत मोरारी बापू ने इस अवसर पर एक पिता की तरह कन्याओं के वर और वरपक्ष के लोगों से कहा, ‘जब मैं कमाटीपुरा में इन लड़कियों से मिला, मैंने उनसे कहा था कि तुम्हारे पिता तुमसे मिलने आए हैं। तुम्हारा नया घर तलगाजरडा है। हर साल तुम अपने पिता से मिलने आना और तुम्हारा पूरे सम्मान के साथ स्वागत होगा।’ कन्यादान के दौरान संत मोरारी बापू ने गणिकाओं से विवाह करने वाले दोनों लड़कों से कहा, ‘अब उनकी (लड़कों की) जिम्मेदारी बढ़ गई है। ये मोरारी बापू की बेटियाँ हैं, ये तलगाजरडा की लड़कियाँ हैं। इनका ध्यान रखना और पूरा सम्मान देना।’

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