‘72’ से पहले ही ब्रिटिश ब्रीफकेस को BYE-BYE : पहली बार मखमली लाल कपड़े में लाया गया भारत का ‘बही खाता’ !

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहली बार ब्रीफकेस की बजाए लाल रंग के मखमली कपड़े में लिपटा बजट की बजाए बही खाता 2019 लेकर वित्त मंत्रालय पहुँचीं।

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

* NDA सरकार लगातार बदल रही अनेक परम्पराएँ

* वाजपेयी सरकार ने 2001 से सुबह 11 बजे बजट पेश करना आरंभ किया

* मोदी सरकार ने 2017 से 1 फरवरी को बजट पेश करने की परम्परा शुरू की

* मोदी सरकार ने 92 वर्ष पुरानी रेल बजट परम्परा को 2017 में समाप्त किया

अहमदाबाद, 5 जुलाई, 2019 (YUVAPRESS)। 26 नवम्बर, 1947 का वह दिन था, जब देश के प्रथम वित्त मंत्री षणमुखम् चेट्टी शाम को लेदर बैग में भारत का पहला बजट लेकर वित्त मंत्रालय पहुँचे थे। यही लेदर बैग कालांतर में ब्रीफकेस में परिवर्तित हो गई और यह ब्रिटिश परम्परा 1 फरवरी, 2019 को भी निभाई गई, जब तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ब्रीफकेस लेकर चार माह का बजट (लेखानुदान) प्रस्तुत करने के लिए पहुँचे, परंतु भारत ने आज यानी 5 जुलाई, 2019 को ब्रिटिश ब्रीफकेस परम्परा को भारत ने 72 वर्षीय होने से पहले ही अलविदा कह दिया, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2019-20 का बजट ब्रीफकेस में नहीं, अपितु लाल रंग के मखमली कपड़े में लेकर वित्त मंत्रालय पहुँचीं। इतना ही नहीं, मखमली लाल कपड़े पर बजट नहीं, अपितु बही खाता लिखा हुआ था।

सामान्य रूप से बजट वाले दिन पूरे देश की निगाहें वित्त मंत्री और उनके बजट के प्रावधानों पर रहती हैं, परंतु 72 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ कि जब देश की निगाहें और मीडिया के कैमरे वित्त मंत्री पर कम, लाल रंग के मखमली कपड़े में लिपटे बजट दस्तावेज पर अधिक केन्द्रित थे। सभी के लिए यह नज़ारा बिल्कुल नया और अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय था, क्योंकि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि वित्त मंत्री के हाथों में बजट दस्तावेज किसी ब्रीफकेस की बजाए लाल रंग के मखमली कपड़े में लिपटी हुई स्थिति में हो।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी उपस्थित थे।

सबकी आँखों को ब्रिटिश परम्परा वाली ब्रीफकेस देखने की आदत जो पड़ गई थी, परंतु आज वित्त मंत्री भी नई थीं और बजट दस्तावेज रखने का अंदाज़ भी नया था। वैसे केन्द्र में जब-जब एनडीए सरकार आई, तब-तब कई ब्रिटिश परम्पराओं से धीरे-धीरे किनारा किया जाने लगा। वर्ष 1947 से 2000 तक ब्रिटिश परम्परा के अनुसार बजट शाम 5 बजे पेश होता था, परंतु 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने बजट का समय सुबह 11 बजे का कर दिया। तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 28 फरवरी, 2001 को पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश किया। इसी प्रकार वर्ष 1947 से 2016 तक बजट 28 फरवरी को पेश करने की अंग्रेजी परम्परा चली आ रही थी, परंतु मोदी सरकार ने इसमें बदलाव किया और 2017 से 1 फरवरी को बजट पेश किया जाने लगा। अरुण जेटली 1 फरवरी को बजट पेश करने वाले प्रथम वित्त मंत्री बने। मोदी सरकार ने एक और ब्रिटिश परम्परा रेल बजट का भी अंत किया। 1924 से लगातार आम बजट से अलग पेश हो रहा रेल बजट 92 वर्ष बाद आम बजट के साथ सम्मिलित कर दिया गया। सुरेश प्रभु 2016 में अंतिम रेल बजट पेश करने वाले रेल मंत्री बन गए, क्योंकि 2017 से रेल बजट को आम बजट में शामिल कर लिया गया।

मोदी ने बजट-ब्रीफकेस परम्परा को बना दिया इतिहास

26 नवम्बर, 1947 को भारत के प्रथम वित्त मंत्री षणमुखम् चेट्टी लेदर बैग में बंद भारत का प्रथम बजट पेश करने के लिए लोकसभा की ओर जाते हुए।

आइए अब बात करते हैं आम बजट और उससे जुड़ी ब्रीफकेस परम्परा की, जो अब इतिहास बन गई है। ब्रिटिश संसद को विश्व की सभी संसदीय परंपराओं की जननी माना जाता है। बजट और ब्रीफकेस परंपरा की जननी भी ब्रिटिश संसद ही है। वर्ष 1733 में जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री (चांसलर ऑफ एक्सचेकर) रॉबर्ट वॉलपोल ब्रिटिश संसद में देश की वित्तीय स्थिति का लेखा-जोखा पेश करने के लिये आए, तो उस लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेज एक चमड़े के बैग में रखकर लाए थे। चूँकि इस बैग को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता है, इसलिये जब हर साल वित्तीय लेखा-जोखा लेकर वित्त मंत्री संसद में आने लगे तो कहा जाने लगा कि वित्त मंत्री बुजेट खोलेंगे और तब पता चलेगा कि उसमें क्या है ? कालांतर में इसे बुजेट से बजट कहा जाने लगा। इसके बाद बजट ही इसका नामकरण हो गया।

अलग-अलग वित्त मंत्रियों की ओर से अलग-अलग रंग की ब्रीफकेस में लाया गया बजट। (फाइल चित्र)

भारतीय संविधान के रचयिता बाबासाहब आंबेडकर ने ब्रिटेन सहित विविध देशों के संविधान से कुछ न कुछ लेकर ही भारतीय संविधान की रचना की है। इसलिये भारत ने भी अंग्रेजों की ही परंपरा को अपनाते हुए बजट पेश किया। आज़ाद भारत में सबसे पहले 26 नवम्बर 1947 को पहला बजट पेश किया गया, जो देश के प्रथम वित्त मंत्री आर. के. षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था। वह भी लेदर बैग के साथ बजट पेश करने के लिये संसद पहुँचे थे। तब से ही बजट पेश करने के लिये ब्रीफकेस लेकर संसद भवन पहुँचने की यह परंपरा भारत में निभाई जाती आ रही है। इतने साल बीतने के बावजूद ब्रीफकेस का आकार लगभग वही का वही रहा है, केवल परिवर्तन हुआ है तो ब्रीफकेस के रंग में हुआ।

1 फररवरी, 2019 को ब्रीफकेस में बजट पेश करने वाले अंतिम वित्त मंत्री बने पीयूष गोयल। (फाइल चित्र)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब 1991 में वित्त मंत्री थे तो उन्होंने पहली बार काले रंग का बैग इस्तेमाल किया था। जवाहरलाल नेहरू, यशवंत सिन्हा भी काले रंग का बैग लेकर ही संसद पहुँचे थे, जबकि प्रणव मुखर्जी ने लाल रंग का ब्रीफकेस उपयोग किया था। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के हाथों में ब्राउन और लाल रंग के ब्रीफकेस नज़र आ चुके हैं, जबकि फरवरी में पियूष गोयल भी लाल रंग का ब्रीफकेस उपयोग कर चुके हैं। अब देखना होगा कि महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हाथों में किस रंग का ब्रीफकेस देखने को मिलेगा।

Leave a Reply

You may have missed