नागरिकता संशोधन बिल पर लग सकती है मोदी मंत्रिमंडल की मुहर ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। संसद के शीतकालीन सत्र (WINTER SESSION OF PARLIAMENT) में अब गरमाहट आ सकती है। बुधवार को होने वाली केन्द्र सरकार के मंत्रिमंडल (CABINET) की साप्ताहिक बैठक में मोदी-शाह की जोड़ी नागरिकता संशोधन बिल (CITIZENSHIP AMENDMENT BILL) पर मुहर लगवा सकती है। इसके बाद गुरुवार को इस बिल को लोकसभा (LOK SABHA) में पेश किया जा सकता है। निचले सदन में पारित होने के बाद इस बिल को अगले सप्ताह राज्य सभा (RAJYA SABHA) में पेश किये जाने की संभावना है। हालाँकि इस बिल को लेकर न सिर्फ संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा होने के आसार हैं, बल्कि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी (राजग-NDA) में भी गाँठ पड़ने की संभावना है। इतना ही नहीं, पूर्वोत्तर (NORTH EAST) के 8 राज्यों में भी इस बिल को लेकर भारी उठा-पटक हो सकती है।

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक में ?

बीते दिनों असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़नशिप (NRC) की फाइनल लिस्ट जारी की गई थी, जिसमें 1971 के बाद आकर बसे 19 लाख से अधिक लोगों के नाम काट दिये गये हैं। एक जानकारी के अनुसार इनमें 12 लाख ऐसे बंगाली हिंदू हैं, जो पूर्वकालीन पूर्वी बंगाल यानी वर्तमान बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हैं। इन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिये केन्द्र सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक पारित कराना चाहती है। इस विधेयक में 1971 की डेडलाइन को बढ़ा कर 2014 करने का प्रावधान हो सकता है। इस विधेयक में बांग्लादेश के साथ-साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत में आकर बसे वहाँ के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता आसानी से प्राप्त हो सके, ऐसे कुछ प्रावधान इस प्रस्तावित विधेयक में किये जाने की बात सामने आने से कांग्रेस और वामपंथी दल तो हल्ला मचाने वाले ही हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी भी इस विधेयक को अपने राज्य में लागू नहीं करने की पहले ही घोषणा कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, बिहार जैसे राज्य में जहाँ भाजपा और जेडीयू की मिलीजुली सरकार है, वहाँ के मुख्यमंत्री नितिश कुमार भी इस विधेयक पर नाखुशी जता चुके हैं। उधर असम में भी भाजपा का सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) इससे खुश नहीं है। पूर्वोत्तर के अन्य 7 राज्यों में भी भाजपा ने जिन स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया है, वे दल भी भाजपा के इस विधेयक का समर्थन करने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूर्वोत्तर राज्य पहले से ही बांग्लादेशी घुसपैठियों से हैरान-परेशान हैं। ऊपर से बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता आसानी से सुलभ कराने वाले विधेयक से इन राज्यों की स्थानीय जनता की मुश्किलें बढ़ जाएँगी।

पीओके के नागरिकों को कश्मीर में दी है नागरिकता

हाल ही में केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने के बाद पीओके से आए कश्मीरियों को कश्मीर में भारतीय नागरिकता दी थी। इस विधेयक में बांग्लादेश के अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान सहित विभिन्न पड़ोसी देशों से भारत में आकर बसे इन देशों के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता सुलभ कराने की भाजपा की पहल को विभिन्न राजनीतिक दल हिंदुत्ववादी कार्ड मान कर चल रहे हैं। इसलिये माना जा रहा है कि जिस बिल को मोदी सरकार बुधवार को मंत्रिमंडल की मंजूरी दिलवाकर अगले दिन लोकसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है, वह बिल लोकसभा में भाजपा के बहुमत के कारण आसानी से पारित हो जाएगा, परंतु राज्य सभा में पेच फँस सकता है, जहाँ विपक्षी दलों के साथ-साथ भाजपा को अपने सहयोगी दलों से भी चुनौती मिलने की पूरी संभावना है। यदि भाजपा इस बिल को पास कराने में सफल हुई तो फिर मोदी सरकार एनआरसी को पूरे देश में लागू करने पर काम शुरू कर सकती है।

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