27.9 करोड़ लोग ‘दल-दल’ से उबर गए, फिर भी ‘मेरा भारत सबसे निर्धन’ !

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ऑक्सफर्ड पावर्टी एण्ड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशएटिव (OPHI) की ओर से तैयार किए गए वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) 2019 के अनुसार भारत में 2005-06 से 2015-16 के बीच 10 सालों में गरीबों की संख्या तेजी से घटी है और 10 साल पहले भारत में लगभग 64 करोड़ लोग गरीबी के शिकंजे में थे उनमें से 27.9 करोड़ लोग 10 साल बाद गरीबी के बाहुपाश से बाहर निकलने में सफल हो गये हैं। यानी भारत में 55.1 प्रतिशत गरीबों की संख्या घटकर अब 36.9 प्रतिशत रह गई है। वैसे तो यह रिपोर्ट भारतीयों के लिये एक अच्छी खबर है, परंतु साथ में आपको एक वास्तविकता से भी अवगत करा दें कि अभी भी दुनिया के सर्वाधिक गरीब भारत में ही बसते हैं।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का पूरा ब्यौरा

संयुक्त राष्ट्र की ओर से विश्व के 10 देशों में रहने वाली लगभग 2 अरब गरीब आबादी के जीवन में आए परिवर्तनों को देखने के लिये एक रिसर्च की गई थी। इस परिवर्तन का निष्कर्ष निकालने के लिये केवल उनकी आय पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि 10 प्रमुख संकेतकों पर फोकस किया गया था। इनमें पोषण, स्वच्छता, बच्चों की स्कूली शिक्षा, स्कूल में बच्चों की उपस्थिति, बिजली, आवास, भोजन पकाने के ईंधन की व्यवस्था और परिवारों की संपत्ति को भी ध्यान में लेकर अनुसंधान किया गया था। जिन 10 देशों की स्थिति पर अनुसंधान किया गया था उनमें भारत के अलावा, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कंबोडिया, डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, हैती, नाइजीरिया, पेरू और वियतनाम शामिल हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि इन सभी देशों में गरीबों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। इनमें भी भारत और कंबोडिया में एमपीआई मूल्य में सबसे अधिक तेजी से कमी आई है और इन देशों की सरकारों तथा लोगों ने गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में प्रभावित करने वाला काम किया है। इथियोपिया और पेरू में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किये गये हैं।

दक्षिण एशिया में सर्वाधिक प्रगति, भारत में झारखंड अव्वल

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार गरीबी दूर करने के लिहाज से दक्षिण एशिया में सर्वाधिक प्रगति देखने को मिली है। भारत में सर्वाधिक 27.9 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। जबकि इसी 10 साल के अंतराल में बांग्लादेश में भी 1.90 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। भारत की बात की जाए तो देश के झारखंड राज्य में सबसे अधिक सुधार दर्ज किया गया है। इस राज्य में 2005-06 में गरीबी का औसत 74.9 यानी लगभग 75 प्रतिशत था, जो 2015-16 तक 10 साल में घटकर 46.5 प्रतिशत पर आ गया है। इस प्रकार इस राज्य के गरीब लोगों के जीवन-स्तर में तेजी से सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार देश में सर्वाधिक गरीब 4 राज्यों में निवास करते हैं। इनमें झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश शामिल हैं। देश के सर्वाधिक 19 करोड़ गरीब लोग इन्हीं चार राज्यों में रहते हैं। जो देश के कुल गरीबों की संख्या में आधे हैं। इनके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नागालैंड का नंबर आता है। केरल सबसे कम गरीब आबादी वाला राज्य है। इस राज्य में 92 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से ऊपर हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत ने बहुआयामी यानी विभिन्न स्तर पर तथा उपरोक्त 10 मानकों में पिछड़े हुए लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

अभी भी सर्वाधिक निर्धन भारत में

संयुक्त राष्ट्र की इसी रिपोर्ट का गहन अध्ययन करने से पता चलता है कि भारत में कुल लगभग 64 करोड़ गरीबों में से 27.9 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इसका अर्थ है कि अभी भी देश में लगभग 36.1 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं। जो कि आँकड़े के हिसाब से एक बड़ा वर्ग है और औसत के हिसाब से भी देखें तो 55.1 प्रतिशत गरीबों की संख्या 36.9 प्रतिशत हो गई है, जिसका अर्थ है कि अभी भी 18.2 प्रतिशत लोग गरीबी के दलदल में धँसे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार भी विश्व की सर्वाधिक गरीब आबादी अफ्रीका के सहारा और दक्षिण एशिया में निवास करती है।

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