धारा 370 : विदेशियों के ‘साहस’ से सबक लेंगे स्वदेशी ‘दुस्साहसी’ ?

*EU के बाद अब अमेरिकी संसद में ‘नमो-नमो’

*रिपब्लिकन सांसद होल्डिंग बोले, ‘370 हटाना BOLD-BRAVE कदम’

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर अब केन्द्र शासित प्रदेश है और लद्दाख भी उससे अलग होकर अब स्वतंत्र केन्द्र शासित प्रदेश बन गया है। इसी के साथ अब दोनों ही प्रदेशों में केन्द्र सरकार की योजनाएँ और भारतीय संविधान के नियम-कानून लागू हो गये हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो दोनों ही प्रदेशों में आर्थिक विकास के द्वार खुल गये हैं। यह बात हम इसलिये कह रहे हैं, क्योंकि केन्द्र सरकार ने भी जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली और प्रदेश की व्यवस्था को संचालित करने वाली धारा 370 के अनावश्यक प्रावधानों को हटाते समय गत 5 अगस्त को यही घोषणा की थी कि, इस धारा को अस्थाई धारा के रूप में लागू किया गया था, इसके बावजूद इसे लंबे समय से हटाया नहीं जा रहा था। अब जबकि उनकी सरकार को लगता है कि इस धारा की आवश्यकता नहीं रह गई है तो इसके अनावश्यक प्रावधानों को समाप्त किया जाता है। सरकार ने यह भी कहा था कि इस धारा का कुछ स्थानीय राजनेता राजनीतिक लाभ उठाने के लिये दुरुपयोग कर रहे थे, जबकि आम आदमी को विकास और सुविधाओं के लाभ नहीं मिल रहे थे। यह धारा कश्मीर घाटी के विकास में बाधक थी। सरकार की कही ये बातें हम इसलिये दोहरा रहे हैं, क्योंकि यही बातें जम्मू कश्मीर का दौरा करने वाले यूरोपीय सांसदों के प्रतिनिधि मंडल ने भी कही थी कि जम्मू कश्मीर के लोग शांति चाहते हैं। जबकि इस धारा के कारण पड़ोसी देश में बैठे आतंकवादियों को प्रदेश में आतंकवाद फैलाने का तथा पड़ोसी देश को अलगाववाद, अशांति और अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों को अंजाम देने का मौका मिलता था। अब यही बात अमेरिकी संसद में भी न सिर्फ दोहराई गई है, बल्कि यह कदम उठाने के लिये पीएम नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा भी की गई है। अब सवाल उन लोगों की राजनीतिक मंशा और मनोदशा पर उठते हैं, जो अभी भी राजनीतिक विद्वेष के चलते मोदी सरकार के इस कदम की सराहना करना तो दूर की बात है, परंतु आलोचना करने से नहीं थक रहे हैं। सवाल ये भी उठता है कि, क्या कांग्रेस समेत विपक्षी दल और उनके नेता यूरोपीय सांसदों तथा अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद जॉर्ज होल्डिंग से कोई सबक लेंगे ?

क्या कहा अमेरिकी सांसद जॉर्ज होल्डिंग ने ?

अमेरिकी संसद में नॉर्थ कैरोलीना की दूसरी कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन सांसद जॉर्ज होल्डिंग ने जम्मू कश्मीर के लिये उठाये गये मोदी सरकार के कदम को ‘BOLD’ करार देते हुए यह कदम उठाने के लिये पीएम मोदी की प्रशंसा भी की है। उन्होंने अमेरिकी संसद में कहा कि भारतीय संसद ने जो कदम उठाए हैं, वे जरूरी थे। क्योंकि यह कदम क्षेत्र में दीर्घकालीन स्थिरता के लिये जरूरी था और इसके लिये उनकी (पीएम मोदी) प्रशंसा होनी चाहिये। होल्डिंग के अनुसार भारतीय संसद ने जम्मू कश्मीर के स्टेट्स में बदलाव करने वाले प्रस्ताव को पारित किया और ऐसे प्रावधानों को बदला, जो कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में बाधक थे और अलगाववाद की भावना को बढ़ावा दे रहे थे। अभी तक कश्मीर में आर्टिकल 370 के तहत शासन चल रहा था, जो कि एक पुराना और अस्थाई प्रावधान था। इस आर्टिकल ने संभवतः उन लोगों के लिये अच्छा काम किया, जिनका उद्देश्य राजनीतिक था, परंतु इस आर्टिकल के कारण आम लोगों को आर्थिक विकास के अवसर नहीं मिल रहे थे।

होल्डिंग ने पाकिस्तान को दिया झटका

होल्डिंग ने पाकिस्तान और उसके यहाँ पल रहे आतंकवाद की भी निंदा की और कहा कि इस आर्टिकल के कारण पाकिस्तान में मौजूद कई आतंकी संगठनों को भारत में आतंकवाद फैलाने में मदद मिलती थी, जिससे आम आदमी और उनके परिवार परेशान थे। आतंकवाद इस क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा था। इसलिये मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे, एक तो पुरानी नीति को बरकरार रखा जाए या क्षेत्र का कानूनी दर्जा बदल कर उसे प्रगति के रास्ते पर ले जाया जाए। होल्डिंग ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग बेहतर जीवन डिज़र्व करते हैं और पीएम मोदी की ओर से उठाया गया बोल्ड स्टेप बिल्कुल सही है। संसद में दो तिहाई बहुमत से जम्मू कश्मीर का दर्जा बदला गया है, जो कि सुधार की जरूरत पर सहमति को दर्शाता है। होल्डिंग ने बदलाव के बाद भी विकास में बाधा डालने की चाहत रखने वाली गतिविधियों की भी कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों ने हाल ही में आम नागरिकों को बाहर निकलने, काम करने और सार्वजनिक स्थलों पर नहीं जाने की चेतावनी देने वाले पोस्टर चिपकाये थे। ये संगठन अभी भी सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं और आम नागरिकों तथा बच्चों पर हमला कर रहे हैं। क्षेत्र में आतंकी संगठनों ने प्रवासी मजदूरों और सेब के व्यापार में शामिल लोगों पर हमला किया है। जम्मू कश्मीर के फलने-फूलने के लिये जरूरी है कि वहाँ शांति और स्थिरता आये। आम नागरिक और उनके परिवार सुरक्षित महसूस करें।

कश्मीर में बाहरी लोगों को निशाना बना रहे आतंकी

उल्लेखनीय है कि कश्मीर में आतंकी प्रवासी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। विशेष कर ट्रक ड्राइवरों और मजदूरों पर हमले कर रहे हैं, ताकि विभिन्न राज्यों के लोग कश्मीर जाने से डरें। पिछले दिनों कुलगाम जिले में पश्चिम बंगाल के 5 मजदूरों की आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी, जबकि पिछले 3 सप्ताह में चार ट्रक ड्राइवरों की भी हत्या की गई है।

यूरोपीय सांसद भी कर चुके भारतीय पक्ष का समर्थन

होल्डिंग से पहले यूरोपीय सांसदों की 27 सदस्यीय टीम ने मंगलवार और बुधवार को जम्मू कश्मीर का दौरा किया था। इस दौरे में यूरोपीय सांसदों ने स्थानीय लोगों, व्यापारियों, सैनिकों तथा पुलिस जवानों आदि से मिल कर स्थानीय हालात का जायजा लिया था और इसके बाद कहा था कि जम्मू कश्मीर के लोग शांति चाहते हैं। यूरोपीय सांसदों ने भी पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होने की बात कही थी। इस प्रकार धारा 370 को लेकर यूरोपीय और अमेरिकी सांसद ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया है और भारतीय पक्ष का समर्थन किया है। होल्डिंग के बयान से भारतीय विपक्ष को भी सबक लेने की आवश्यकता है। क्योंकि होल्डिंग ने अपने बयान में जो एक बात कही है, उससे भारतीय विपक्ष को भी चिंतन करने की आवश्यकता है। होल्डिंग ने कहा कि भारतीय संसद ने दो तिहाई बहुमत से धारा 370 के अनावश्यक प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव को पारित किया है, जो दर्शाता है कि मोदी सरकार के प्रस्ताव को संसद का बहुमत समर्थन प्राप्त हुआ है। इसके बावजूद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेता एक मात्र मोदी विरोध की राजनीति से ऊपर उठ कर नहीं सोच पा रहे हैं। मोदी विरोध के अंधानुकरण में विपक्षी नेता राष्ट्रहित और कश्मीर हित की भी अनदेखी कर रहे हैं, जिसका खामियाज़ा उन्हें हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ा है।

क्या विपक्ष को राजनीति का नया पाठ सीखने की जरूरत है ?

इससे एक और बात जो सिद्ध हुई है वो ये कि पीएम मोदी कहते हैं कि उन्होंने भारतीय राजनीति में नई पहल की है और जाति-पांति की राजनीति से ऊपर उठ कर राष्ट्रवाद की राजनीति को तरजीह दी है। उनकी यह बात भी देशवासियों में स्वीकार की जा रही है और विपक्ष को भी इससे सीख लेने की आवश्यकता है कि उसे भी जाति समुदाय, क्षेत्रवाद और परिवारवाद की राजनीति से ऊपर उठ कर राजनीति के मुद्दे सुनिश्चित करने चाहिये।

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