विनाश नहीं, विराट विपदा विजय विश्वास दे गया विकराल ‘वायु’ !

* माना कि संकट विकराल था, पर निपटने की तैयारी भी विराट थी, अंतत: ओ‘मान’ गया ‘वायु’

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 14 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। संकट चाहे आसन्न हो, आया हो, आकर चला गया हो या केवल भय दिखा कर लौट गया हो, हर स्थिति में वह सदैव सीख देकर ही जाता है। गुजरात पर भी पिछले 96 घण्टों से ‘वायु’ चक्रवात का संकट मंडरा रहा था, परंतु यह संकट मंडराया, डराया और गुजरात तट को स्पर्श न करते हुए ओमान की तरफ आगे बढ़ गया और गुजरात संभावित ढाँचागत विनाश से बच गया, परंतु यह ‘वायु’ गुजरात को विपदा पर विजय का विराट विश्वास का उपहार देकर गया है।

अरब सागर में उठे वायु चक्रवात का संकट मंडराते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी केन्द्र सरकार, सेना-नौसेना-वायुसेना, एनडीआरएफ, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, उप मुख्यमंत्री नीतिन पटेल सहित पूरी गुजरात सरकार और समूचा प्रशासन युद्ध स्तरीय महाश्रम में जुट गए। लगातार 72 घण्टों तक शासन-प्रशासन ने वायु के संभावित संकट से निपटने के लिए जो तैयारियाँ कीं, वह संभावित संकट की विकरालता से कई गुना विराट थीं।

गुजरात में आपदा प्रबंधन के सुनियोजित ढाँचे की नींव रखने वाले नरेन्द्र मोदी के सीधे मार्गदर्शन में गुजरात शासन और प्रशासन ने वायु के संभावित ख़तरे से निपटने के लिए सभी सरकारी पदाधिकारियों और अधिकारियों को लगा दिया। शासन-प्रशासन ने तैयारी ऐसी की थी कि गुजरात के इतिहास के सबसे ख़तरनाक और विनाशकारी सिद्ध होने की आशंका वाला वायु चक्रवात यदि आ भी जाता, तो भी गुजरात का कुछ अधिक नहीं बिगाड़ पाता। यद्यपि यह अहंकार करने की नहीं, अपितु गौरव करने की बात है और इसके साथ ही राहत की बात यह भी रही कि वायु चक्रवात गुजरात तट से टकराए बिना ओमान की तरफ चला गया।

24 घण्टे में 3.70 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया

अप्रैल के अंत और मई के आरंभ में ही देश पर फानी चक्रवात का संकट आया था। उससे निपटने के लिए भी केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी सरगर्मियों के बीच भी संघीय ढाँचे की भावना के अनुरूप प्रभावित सभी राज्यों की सहायता करने की पहल की, तो इस फानी संकट से निपटने में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और उनके शासन-प्रशासन ने जो मुस्तैदी दिखाई, उसकी न केवल भारत, अपितु दुनिया भर में प्रशंसा हुई। ओडिशा और नवीन के बाद अब गुजरात व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जो तत्परता व सक्रियता दिखाई, वह पूरे देश के लिए प्रेरक साबित हो सकती है।

वायु चक्रवात के संकट को लेकर गुजरात सरकार ने ऐतिहासिक कार्य करते हुए सिर्फ 24 घण्टे के भीतर 3 लाख 70 हजार लोगों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण किया, 700 राहत शिविर खड़े किए। किसी भी शासन-प्रशासन के लिए यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं है। तटवर्ती इलाकों की स्थिति पर स्वयं मुख्यमंत्री रूपाणी ने निरंतर नज़र बनाए रखी और पल-पल की जानकारी ली। तटवर्ती क्षेत्रों में फँसे 10 हजार पर्यटकों को बाहर निकाला। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार और सेना की तीनों विंग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, कोस्ट गार्ड, पुलिस ने भी संभावित राहत-बचाव कार्य के लिए व्यापक समन्वय के साथ काम किया। यदि यह तूफान गुजरात तट से टकराता, तो प्रभावितों की संख्या 6 लाख तक पहुँच सकती थी और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए भी विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों की सहायता से लाखों फूड पैकेट तैयार किए गए थे।

Karnataka Election 2018

इस दौरान राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी दल से बड़ा देश की भावना का परिचय दिया। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की सहायता में जुट जाने की अपील की और उस अपील का ज़मीन पर असर भी दिखाई दिया।

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