कांग्रेस की ‘प्रज्ञा’ को क्या हो गया है ? गोडसे को देश भक्त कहने वाली शिवसेना के साथ बैठ गई

*क्या महिला सांसद को ‘आतंकवादी’ कहने वाले राहुल गांधी को माफी नहीं माँगनी चाहिये ?

विशेष टिप्पणी : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 29 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। कांग्रेस, वह पार्टी जिसने लोकसभा में भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाथूराम गोडसे को देश भक्त कहने वाले बयान को लेकर जम कर हंगामा बरपाया। हालाँकि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने अपनी भूल स्वीकार कर ली। इतना ही नहीं, बल्कि दो घण्टे के भीतर ही उन्होंने दो बार माफी माँगी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही करने के लिये लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के कार्यालय को नोटिस दिया है, जिस पर लोकसभा सचिवालय जाँच करेगा और इसके बाद ही इस नोटिस को लेकर निर्णय किया जाएगा कि इसे सिफारिश के साथ लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा जाएगा कि इस नोटिस को विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाए या खारिज किया जाए ? इसके बाद अब सवाल यह उठता है कि यदि प्रज्ञा सिंह ने अपनी गलती स्वीकार करके माफी माँग ली, तो उन्हीं प्रज्ञा सिंह को लेकर अपमानजनक ट्वीट करने वाले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को माफी नहीं माँगनी चाहिये ? जिन्होंने अदालत की ओर से आरोपमुक्त घोषित की गई तथा देश की जनता द्वारा चुन कर लोकसभा में एक संवैधानिक सदस्य पद पर आसीन की गई महिला सांसद को ‘आतंकवादी’ कहा। क्या ऐसा करके राहुल गांधी ने एक महिला का अपमान नहीं किया ? एक सांसद का अपमान नहीं किया और क्या उस जनता का भी अपमान नहीं किया, जिसने उन्हें चुन कर संसद में भेजा है ? माफी माँगने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता के तौर पर राहुल गांधी के अड़ियल रवैये पर भी सवाल उठता है कि उनका यह बयान कितना उचित है, जिसमें उन्होंने बड़ी संवेदनहीनता के साथ कह दिया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है, जिसके लिये उन्हें माफी माँगनी पड़े, वह माफी नहीं माँगेंगे, जिसको जो करना हो कर लो। क्या राहुल गांधी ने देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी के नैतिक मूल्यों का भी अपमान नहीं किया है। जो कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी द्वारा संस्थापित और उनके आदर्शों को पार्टी की विचारधारा बताती है, जो महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के प्रतीक हैं, उन महात्मा गांधी के चश्मे से भी देखें तो भी यह सवाल उठता है कि राहुल गांधी का व्यवहार कितना उचित है ?

कांग्रेस की ‘प्रज्ञा’ को क्या हो गया है ?

सवाल केवल राहुल गांधी ही नहीं, अपितु कांग्रेस पार्टी की ‘प्रज्ञा’ यानी ज्ञान-समझ पर भी उठते हैं, जिसके नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाथूराम गोडसे को लेकर दिये गये बयान पर भाजपा ही नहीं, अपितु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधते रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में वीर सावरकर के लिये भारत रत्न की सिफारिश करने का मुद्दा शामिल किया था, तो कांग्रेस नेता प्रज्ञा ठाकुर के बयान को आगे करके भाजपा और पीएम मोदी पर व्यंग्य बाण छोड़ते थे कि वीर सावरकर के साथ-साथ गोडसे को भारत रत्न नहीं दिलाएँगे ? अब गोडसे पर बयान को लेकर प्रज्ञा ठाकुर को कठघरे में खड़ी करने वाली कांग्रेस खुद कठघरे में आ गई है। कांग्रेस ने जिस शिवसेना के साथ मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाई है, वही शिवसेना खुद गोडसे को देश भक्त कह चुकी है।

‘बिज़नेस स्टैंडर्ड के वेब पोर्टल में 20 जनवरी-2013 को प्रकाशित हुई खबर’ के अनुसार शिवसेना के समर्थन से ठाणे में आयोजित हुई एक मराठी साहित्यिक सभा के अवसर पर एक स्मारिका प्रकाशित की गई थी। इसमें शिवसेना ने महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को देश भक्त बताते हुए लिखा था कि महात्मा गांधी के देश का विभाजन करके पाकिस्तान बनाने के निर्णय से बड़ी संख्या में हिंदुओं का कत्लेआम हुआ था, जिससे आहत होकर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या करने का कदम उठाया था। ऐसा कह कर उसे एक देश भक्त के रूप में चित्रित किया गया था। अब कांग्रेस उसी शिवसेना के साथ महाराष्ट्र की सरकार में भागीदार बन कर बैठी है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस की नैतिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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