इमरान को NRPs से मांगनी पड़ती है भीख, परंतु भारतीय NRIs हैं पक्के देशप्रेमी, 2018 में इतने करोड़ रुपए भेज कर विदेशी धरती पर रह कर भी भारत के विकास में किया योगदान

प्रधानमंत्री बनने के बाद इमरान खान लगातार अपने देश की खस्ता आर्थिक हालत से परेशान हैं और दर-दर जाकर भीख मांग रहे हैं। उन्होंने भीख का यह कटोरा पाकिस्तान से बाहर रहने वाले प्रवासी पाकिस्तानियों (NRP) के समक्ष भी धरा, परंतु उन्हें कोई महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली। इसके उलट, भारत को अपने प्रवासी भारतीयों (NRI) पर गर्व हो, ऐसी एक रिपोर्ट सामने आई है। यह रिपोर्ट साबित करती है कि एनआरआई पक्के देशभक्त हैं और विदेश में रह कर भी भारत के विकास में योगदान कर रहे हैं।

विश्व बैंक (WB) के अनुसार 2018 में भारत में सबसे ज्यादा 79 अरब डॉलर यानी करीब 5.53 लाख करोड़ रुपये आये। यह धन भारत से बाहर अन्य देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों (NRI) ने भेजा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार विदेश से अपने घर पैसा भेजने के मामले में भारतीय पूरी दुनिया में सबसे आगे हैं। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान इस मामले में सबसे फिसड्डी है। दूसरा पड़ोसी देश चीन इस मामले में भारत के बाद दूसरे नंबर पर है और तीसरे नंबर पर मेक्सिको है।

आपको बता दें कि खाड़ी देशों में तथा अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में नौकरी या व्यवसाय करने वाले एनआरआई जब भारत में अपने माता-पिता या पत्नी-बच्चों जैसे परिवार के सदस्यों को पैसे भेजते हैं, तो उसे रेमिटेंस कहते हैं। यह पैसा वह बैंक, डाक या ऑनलाइन ट्रांसफर जैसे माध्यमों से भेजते हैं, जो विदेशी मुद्रा के रूप में उनके देशों को मिलता है।

भारत में वर्ष 2016 में प्रवासी भारतीयों ने 62.7 अरब डॉलर यानी लगभग 42.65 खरब रुपये भेजे थे। 2017 में 65.3 अरब डॉलर भेजे और वर्ष 2018 में यह धनराशि 15 प्रतिशत बढ़कर 79 अरब डॉलर तक पहुंच गई। चीनी नागरिकों ने अपने देश में 67 अरब डॉलर भेजे और मेक्सिकन नागरिकों ने 36 अरब डॉलर स्वदेश भेजे। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार केरल में आई बाढ़ के बाद प्रवासी भारतीयों द्वारा पैसे घर भेजने के मामले में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

दूसरी ओर सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक सऊदी अरब में रहते हैं, इसलिये उसे सबसे ज्यादा रेमिटेंस सऊदी अरब से प्राप्त होता है, लेकिन वर्ष 2018 में उसकी रेमिटेंस में वृद्धि के स्थान पर भारी गिरावट देखने को मिली। पाकिस्तान की ग्रोथ मात्र 7 प्रतिशत रही, जबकि बांग्लादेश की ग्रोथ उससे बेहतर रही और बांग्लादेश को पिछले वर्ष 15 प्रतिशत अधिक रेमिटेंस मिला।

इस रिपोर्ट के अनुसार कम अथवा मध्यम आय वाले देशों को 2017 की तुलना में 2018 में 9.6 प्रतिशत ज्यादा रेमिटेंस मिला, जिसका आँकड़ा 529 अरब डॉलर यानी लगभग 37,030 अरब रुपये था। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक रेमिटेंस बढ़कर 689 अरब डॉलर यानी लगभग 48,230 अरब रुपये तक पहुंच गया, जो 2017 में 633 अरब डॉलर यानी लगभग 43,044 अरब रुपये था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2018 में चीन को छोड़कर कम और मध्यम आय वाले देशों को एफडीआई से ज्यादा रेमिटेंस मिला है। जो देश यह रेमिटेंस प्राप्त करता है, उसके लिये यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का माध्यम होता है और इस विदेशी मुद्रा का उस देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है। विशेषकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को रेमिटेंस गति प्रदान करता है। कई देश तो ऐसे हैं जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अन्य क्षेत्रों की तुलना में रेमिटेंस से प्राप्त धनराशि का योगदान अधिक है। नेपाल, ताजिकिस्तान, हैती और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी की एक चौथाई के लगभग धनराशि रेमिटेंस से ही प्राप्त करते हैं।

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