क्या है वह ‘MODI STRIKE’, जो देश-विदेश में बड़े-बड़े धुरंधरों को कर रही धराशायी ?

* वह क्या है नरेन्द्र मोदी के पास, जो उन्हें बनाती है खास ?

* अगर ‘लड़ाकू’ होना आधार है, तो ट्रम्प-पुतिन पीछे कैसे ?

* क्यों नहीं लुभा सकी चिरायु राष्ट्रपति जिनपिंग की जादूगरी ?

* क्या हैं वे 3T, जो मोदी की ENERGY की MYSTERY हैं ?

* क्या है मोदी में, जो देश-दुनिया के वर्तमान राजनेता में नहीं ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 22 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। कल यानी 21 जून, 2019 शुक्रवार को जब पूरी दुनिया भारत के नेतृत्व में और भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विश्व योग दिवस मना रहा था, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम कर रहा था, तब 168 वर्ष पुराने एक ब्रिटिश सामयिक ने उस नरेन्द्र मोदी को दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेता घोषित किया, जिसे कुछ महीनों पहले तक भारत में कुछ तुच्छ राजनेता ‘चौकीदार चोर है’ से लेकर सैकड़ों गालियाँ बक रहे थे। वैसे भी संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) से भारत की धरोहर योग को वैश्विक मान्यता दिलाने का महान पुरुषार्थ करने वाले नरेन्द्र मोदी को योग के मुद्दे पर तो भारत में कोई राजनेता घेरने की औक़ात रखता नहीं है, उस पर ब्रिटिश हेराल्ड नामक मैगज़ीन की ओर से कराए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण में नरेन्द्र मोदी को विश्व का सबसे शक्तिशाली नेता घोषित किया गया, तो भारत में मोदी के हाथों करारी मात खा चुके राजनीतिक विरोधी ही नहीं, अपितु दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन भी भौंचक्के रह गए।

वास्तव में ब्रिटिश हेराल्ड नामक मैगज़ीन ने अपने पाठकों के बीच WORLD’S MOST POWERFUL PERSON POLL 2019 कराया था। दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के चयन की इस प्रतिस्पर्धा में विश्व की दो सबसे बड़ी महाशक्तियाँ अर्थात् अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी थे, तो पहले दक्षिण एशिया, फिर एशिया और उसके बाद पूरी दुनिया में तीसरी शक्ति के रूप में उभरने की कोशिश और कवायद में जुटे चीन के चिरायु राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी थे, परंतु इन सभी बड़े-बड़े धुरंधरों को धराशायी करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति चुने गए।

जब ऑनलाइन वोटिंग समाप्त हुई, तब जो परिणाम घोषित हुए, उसने ट्रम्प, पुतिन और जिनपिंग को अपनी औक़ात दिखा दी। ब्रिटिश हेराल्ड के इस रीडर्स पोल में नरेन्द्र मोदी 30.9 प्रतिशत वोट पाकर प्रथम स्थान पर रहे, जबकि मोदी के निकटतम् प्रतिद्वंद्वी पुतिन रहे, जिन्हें 29.9 प्रतिशत वोट हासिल हुए। पूरी दुनिया की ठेकेदारी का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मात्र 21.9 प्रतिशत और विस्तारवादी नीति पर चलने वाले चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को महज 18.1 प्रतिशत वोट मिले, जिसने उन्हें दुनिया में अपनी गिरती छवि का अहसास करा दिया होगा।

क्या सिर्फ STRIKE बना सकती है शक्तिशाली ?

Bharat Ki Baat Sabke Saath

ब्रिटिश हेराल्ड मैगज़ीन में प्रकाशित लेख के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनकी आतंकवाद विरोधी कड़ी छवि के लिए अधिक रेटिंग मिली। लोगों को पुलवामा आतंकी हमले के बाद की गई एयर स्ट्राइक ने ही नहीं, अपितु मोदी के कुशल प्रशासक होने के गुण ने भी आकर्षित किया। लोगों को मोदी सरकार के आयुष्मान भारत, उज्ज्वला और स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रम भाए और लोगों ने मोदी में एक कुशल नेतृत्वकर्ता देखते हुए उन्हें वोट दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एक स्ट्राइक किसी व्यक्ति को विश्व का शक्तिशाली व्यक्ति बना सकती है ? उत्तर कदाचित नहीं ही होगा। वास्तव में मोदी यदि आज विश्व के शिखर पर पहुँचे हैं, तो उसके पीछे उनकी आंतरिक ऊर्जा, उनकी विशाल विचारधारा और प्रखर-प्रचंड मनोबल जैसे गुणों का बड़ा योगदान है। यदि पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करने जैसे कार्यों को ही आधार बना कर दुनिया वोट देती, तो फिर अमेरिका और रूस तो कई देशों में घुस कर इस तरह की कार्रवाइयाँ करते रहते हैं। फिर तो नंबर वन ट्रम्प या पुतिन को होना चाहिए, परंतु ऐसा नहीं हुआ। जिस शी जिनपिंग को चीन की जनता ने उनके जीवित रहने तक राष्ट्रपति के पद पर चस्पा कर रखा है, उन्हें दुनिया ने क्यों नकार दिया ? क्योंकि पूरी दुनिया जानती है कि चीन जैसा चालाक, स्वार्थी और विस्तारवादी नीति के जरिए अन्य देशों पर नियंत्रण करने में कोई देश माहिर नहीं है।

ये तीन चीजें बनाती हैं मोदी को अलग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जीवन बचपन से ही त्याग और वैराग्य को महत्व देने वाली भारतीय अध्यात्म, सनातनी व वैदिक परम्परा से जुड़ा और प्रभावित रहा है। मोदी को जो 3T भारत सहित पूरी दुनिया के नेताओं से अलग बनाते हैं, उनमें त्याग, तप-तपस्या और तन्मयता शामिल हैं। भारत में कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी से लेकर अध्यक्ष राहुल गांधी तक सभी राजनीतिक दलों के नेता राजनीति करते हैं और साथ में परिवार चलाते-चलाते परिवारवाद तक चलाने की कोशिश कर लेते हैं, तो विश्व के अधिकांश बड़े नेताओं के भी अपने परिवार हैं और कई नेता परिवारवाद को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं। दूसरी 130 करोड़ की जनता के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निजी परिवार में माँ, भाई, भाभी, बहन सहित कई संबंधी हैं, परंतु कोई भी मोदी का निकटस्थ नहीं है, जो मोदी के त्याग को दर्शाता है। नरेन्द्र मोदी ने संघ में रह कर, भाजपा संगठन में रह कर, गुजरात का मुख्यमंत्री बन कर और देश का प्रधानमंत्री बन कर भी सिर्फ उसी जनता को परिवार माना, जिसने उन्हें प्रेम से आशीर्वाद दिया। मोदी ने उस जनता में अपने व्यक्तिगत परिवार को भी शामिल मान लिया। यही कारण है कि मोदी का जीवन संन्यासी सम्राट, फ़कीर बादशाह से कम नहीं है। बचपन से बगल में झोला लटकाए घूमने वाले मोदी के पास आज भी कोई सामान नहीं है। तो कुल मिला कर त्याग मोदी की नस-नस में समाया है, तो निरंतर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना मोदी का तप और तपस्या है और कर्तव्यों में तन्मयता उनका तीसरा गुण है, जो उन्हें देश और दुनिया के सभी नेताओं से अलग दर्शाता है।

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