कहाँ गया ‘असहिष्णुता गैंग’, जिसने कठुआ पर मचाया ‘कोहराम’ और अलीगढ़ पर फरमाया ‘आराम’ ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 8 जून, 2019। बच्चे तो भगवान का रूप होते हैं। उनका भी कोई धर्म हो सकता है ? जो जाति-धर्म-पंथ से परे और राग-द्वेष से परे मासूम तथा निर्दोष होते हैं, उन्हें यदि कोई अदावत का शिकार बनाए, तो इससे बड़ा घिनौना कृत्य क्या हो सकता है। ख़ैर, यह तो अपराध करने वाले का घिनौना कृत्य है, जो अदालत के ज़रिए दंडित भी कर दिया जाएगा, परंतु हमें तो आश्चर्य उन लोगों से हो रहा है, जो देश की जनता की नुमाइंदगी करने का दावा करते हैं, परंतु पूरे देश में हाहाकार मचाने वाले अलीगढ़ ट्विंकल हत्याकांड पर मौन हैं।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में बड़ों के झगड़े में एक ढाई साल की बच्ची ट्विंकल शर्मा को मौत के घाट उतार दिया गया। यह घटना ठीक वैसी ही है, जैसी कि 2018 में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुई थी। फर्क़ इतना है कि अलीगढ़ की ट्विंकल ढाई वर्ष की थी, जबकि कठुआ की आसिफा 8 वर्ष की थी, परंतु मासूमियत के मामले में आसिफा और ट्विंकल में कोई फर्क़ नहीं था और दोनों की हत्या का कारण भी समान यानी दो ऐसे परिवारों के बीच की रंजिश, जो संयोग से अलग-अलग धर्मों के हैं। आसिफा की हत्या के आरोपी हिन्दू हैं, तो ट्विंकल की हत्या के आरोपी मुस्लिम हैं, परंतु दोनों ही घटनाओं का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। दोनों ही घटनाएँ रंजिश का परिणाम है। इसके बावजूद दोनों घटनाओं के बाद हुई प्रतिक्रियाओं ने हमारे देश के तथाकथित धर्म निरपेक्ष राजनेताओं और धर्म के ठेकेदारों की पोल खोल कर रख दी है। इन घटनाओं को लेकर प्रतिक्रियाओं में जो फर्क़ है, वह तो अपराधियों से भी घिनौने कृत्य के समान है।

आसिफा पर आँसुओं की बाढ़, ट्विंकल पर क्यों नहीं ?

आसिफा बानो की हत्या यानी कठुआ बलात्कार कांड 10 जनवरी से 17 जनवरी, 2018 के बीच हुआ था। इस घटना के बाद जहाँ एक ओर पूरे जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम संगठनों के ठेकेदारों, स्थानीय राजनीतिक दलों पीडीपी-नेशनल कॉन्फ्रेंस, फारूक़क अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं ने श्रीनगर में कैंडल मार्च से लेकर न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए थे, वहीं दिल्ली में बैठे तथाकथित धर्म निरपेक्ष राजनीतिक दलों के नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल ने तो आसिफा हत्या कांड को लेकर सीधे मोदी सरकार पर हमला बोल दिया था। आसिफा पर आँसू बहाने वालों में बॉलीवुड के कई चेहरे भी शामिल हुए थे। इन लोगों ने यहाँ तक कह दिया था कि मोदी के शासन में भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है। अब जबकि आसिफा हत्या कांड के ठीक 1 साल 5 महीने बाद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ट्विंकल हत्या कांड हुआ है, तब आरोपियों के विरुद्ध कोई संगठन, कोई बड़ी पार्टी, नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्म के ठेकेदारों का कोई झुंड न तो अलीगढ़ से लेकर लखनऊ की सड़कों पर उतरा और न ही दिल्ली में कोई धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। क्यों ? केवल इसलिए कि आसिफा हत्या कांड के आरोपी हिन्दू हैं, जबकि ट्विंकल हत्या कांड के आरोपी मुस्लिम हैं ? यद्यपि बॉलीवुड ने कोई भेदभाव नहीं रखा। बॉलीवुड सहित आम जनता ने तो सोशल मीडिया पर आसिफा को लेकर जो रोष व्यक्त किया था, वही गुस्सा ट्विंकल को लेकर भी व्यक्त किया है। शर्म तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले उन नेताओं पर आती है, जो मासूम बच्चों पर कोई रुख़ अपनाने से पहले उनका धर्म और आरोपियों का धर्म देखते हैं। धिक्कार है ऐसे राजनेताओं और लोगों पर।

स्वरा, सोनम और करीना की कड़ी आलोचना

वैसे बॉलीवुड में भी अनेक चेहरे ऐसे हैं, जो निष्पक्ष नहीं हैं। कुछ कट्टर भाजपा समर्थक हैं, तो कुछ कट्टर कांग्रेस समर्थक। कुछ को कांग्रेस से प्रेम या मोह नहीं है, परंतु वे भाजपा से नफ़रत करते हैं। इसीलिए आसिफा और ट्विंकल की हत्या में फर्क़ करने वाले कुछ लोग बॉलीवुड में भी देखने को मिल ही जाते हैं और आम जनता ऐसे लोगों को तुरंत पहचान भी लेती है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर अचानक स्वरा भास्कर आ गई। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर वही शख्स हैं, जिन्होंने आसिफा की हत्या पर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर की थीं, परंतु ट्विंकल हत्या कांड के बाद स्वरा का कोई ट्वीट या पोस्ट सोशल मीडिया पर नहीं आया है। ऐसा नहीं है कि स्वरा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने शुक्रवार को ही ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली है, परंतु अलीगढ़ ट्विंकल हत्या कांड पर कोई प्रतिक्रियानहीं दी। इससे गुस्साए एक यूज़र ने लिखा, ‘अब कहाँ गए स्वरा भास्कर जैसे असहिष्णुता गैंग के लोग ? क्या अब वे ट्विंकल के लिए अपनी आवाज़ नहीं उठाएँगे ?’

वहीं कुछ लोग आसिफा की मौत के समय में स्वरा की पोस्ट की गई तस्वीर को रीपोस्ट करके उनसे सवाल कर रहे हैं। स्वरा ही नहीं, करीना कपूर खान और सोनम कपूर को भी लोग ट्रोल कर रहे हैं।

Leave a Reply

You may have missed